14वीं गढ़वाल राइफल्स का स्वर्ण जयंती समारोह में पूर्व सैनिकों ने की यादें ताजा
सूबेदार बलबीर सिंह राणा ‘अडिग’ की पुस्तक ‘वीरता और विरासत की गाथा’ का लोकार्पण
भटिंडा, 2 सितंबर(शास्त्री)। पराक्रम, वीरता और शौर्य की गौरवशाली परंपरा के लिए विख्यात 14वीं गढ़वाल राइफल्स का तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह भटिंडा कैंप में भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय सेना की प्रतिष्ठित पलटनों में शामिल 14वीं गढ़वाल राइफल्स ने अपने 50 वर्षों के सफर में सैन्य कौशल, अनुशासन और अदम्य साहस के अनेक उच्च प्रतिमान स्थापित किए हैं।
पलटन को अब तक चार थल सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशंसा पत्र, कोर कमांडर प्रशस्ति-पत्र और संयुक्त राष्ट्र फोर्स कमांडर प्रशस्ति-पत्र सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। 14वीं गढ़वाल राइफल्स की स्थापना 1 सितंबर 1976 को कोड़िया स्थित वर्तमान वीसी गब्बर सिंह कैंप, कोटद्वार में तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल सतीश सोढ़ी के नेतृत्व में हुई थी, जो बाद में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अपने पांच दशक के गौरवशाली सफर में बटालियन ने सिक्किम से लेकर दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में से एक सियाचिन तक अपनी सैन्य क्षमता का परिचय दिया है। बटालियन ने ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन फाल्कन, ऑपरेशन राइनो और ऑपरेशन स्नो लेपर्ड जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गढ़वाल राइफल्स की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है।
पचास वर्षों का इतिहास पुस्तक में संजोया
स्वर्ण जयंती समारोह के प्रथम दिन एक सितंबर को पारंपरिक आयोजनों के साथ सैन्य समागम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बटालियन के पांच दशकों के गौरवशाली इतिहास पर केंद्रित पुस्तक ‘वीरता और विरासत की गाथा : एक अदम्य गढ़वाली पलटन—फैबुलस फोर्टीन (1976-2026)’ के हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही स्वर्ण जयंती बैनर का अनावरण और वीर नारियों का सम्मान भी किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी रहे कर्नल (सेवानिवृत्त) जे.के. शर्मा, युद्ध सेवा मेडल तथा वर्तमान कमान अधिकारी कर्नल अमित कुमार डिमरी, शौर्य चक्र ने बटालियन के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बटालियन के पांच दशकों के स्वर्णिम इतिहास, सैन्य उपलब्धियों और गौरवपूर्ण परंपराओं को याद करते हुए उपस्थित सैन्य परिवारों और पूर्व सैनिकों को संबोधित किया।
पुस्तक के लेखक एवं संपादक सूबेदार बलबीर सिंह राणा ‘अडिग’ (सेवानिवृत्त) के प्रयासों की सभी रैंकों के अधिकारियों और जवानों ने सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि बटालियन के 50 वर्षों के इतिहास को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने वाली यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को सेना और राष्ट्र की सेवा के लिए प्रेरित करेगी। पुस्तक में बटालियन की स्थापना से लेकर वर्तमान तक के 50 वर्षों और 18 कार्यकालों के इतिहास, सैन्य अभियानों, उपलब्धियों और महत्वपूर्ण घटनाओं को क्रमवार संजोया गया है।
वीर नारियों और पूर्व सैनिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
स्वर्ण जयंती के इस ‘वीरता और विरासत महोत्सव’ में 14वीं गढ़वाल राइफल्स की वीर नारियों के साथ बड़ी संख्या में सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, जेसीओ, जवान तथा उनके परिवारजन शामिल हुए। वर्षों बाद एक ही मंच पर जुटे पूर्व और वर्तमान सैनिकों ने बटालियन से जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं। इस दौरान पांच दशकों की सैन्य यात्रा, कठिन अभियानों और पलटन की गौरवशाली परंपराओं की यादें एक बार फिर जीवंत हो उठीं।
बटालियन के कमान अधिकारी कर्नल अमित कुमार डिमरी, शौर्य चक्र और सूबेदार मेजर सुरेश कुमार ने समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए स्वर्ण जयंती समारोह में उनकी सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
समारोह में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल बी. चेंगप्पा, ब्रिगेडियर वी. मनोरम, ब्रिगेडियर हरीश पंकज, ब्रिगेडियर अजय नेगी, ब्रिगेडियर अमिताभ रॉय, सेना मेडल, वीर चक्र, सेवारत ब्रिगेडियर अजय मल्होत्रा, ब्रिगेडियर अमित प्रभाकर सहित बटालियन के अनेक पूर्व कमान अधिकारी, पूर्व सूबेदार मेजर और विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
स्वर्ण जयंती समारोह ने 14वीं गढ़वाल राइफल्स के अतीत और वर्तमान को एक मंच पर लाकर उसकी पांच दशक लंबी सैन्य यात्रा को यादगार बना दिया। इस अवसर पर जहां शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया, वहीं बटालियन की वीरता, सैन्य परंपरा और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया गया।
