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ऊधमसिंह नगर में बिना मान्यता चल रहे चार मदरसे सील, अन्य संस्थानों की भी जांच तेज

नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था के तहत ऊधमसिंह नगर में कार्रवाई, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब



रुद्रपुर/बाजपुर, 2 सितंबर। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा के लिए लागू नई व्यवस्था के बीच बिना निर्धारित मान्यता और आवश्यक दस्तावेजों के संचालित संस्थानों की जांच तेज हो गई है। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन ने चार मदरसों को सील कर दिया। प्रशासन का कहना है कि निरीक्षण के दौरान संबंधित मदरसा संचालक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की कार्रवाई की गई। प्रशासन ने मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, बाजपुर; मदरसा गुलशने इस्लाम, कनोरा; मदरसा जामिया फातिमा, बाजपुर तथा मदरसा मोइनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलाखेड़ा-बाजपुर को सील किया है।

एसडीएम ऋचा सिंह के अनुसार जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में संचालित मदरसों की जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों से मान्यता और संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन चार संस्थान अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के अन्य मदरसों की भी जांच जारी है और निर्धारित मान्यता अथवा जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

नई व्यवस्था को हाई कोर्ट में चुनौती

इस बीच राज्य में मदरसा शिक्षा को लेकर लागू नई व्यवस्था का मामला नैनीताल हाई कोर्ट भी पहुंच गया है। कुछ मदरसा संचालकों ने नई मान्यता व्यवस्था के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के कारण कई मदरसों के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही नई व्यवस्था की वैधानिकता और उसके क्रियान्वयन से जुड़े सवाल अब न्यायिक विचार के दायरे में भी हैं।

ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुरूप जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेने अथवा जरूरी मानकों और नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों पर जोर

राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा के साथ आधुनिक एवं मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना चाहती है। नई व्यवस्था में विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और कौशल विकास जैसे आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर भी जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। हाई कोर्ट में चल रहे मामले में राज्य सरकार अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मदरसा शिक्षा की पुरानी व्यवस्था में बदलाव कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है।

सरकार का कहना है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए बच्चों को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिससे वे उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों में अन्य विद्यार्थियों के साथ बराबरी से आगे बढ़ सकें। इसके साथ ही प्रदेश में संचालित सभी शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित कानूनों, मान्यता और शैक्षणिक मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

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