रम्माण की मुखौटा निर्माण कला नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
सलूड़-डुंग्रा में चार माह की प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू, 24 छात्र-छात्राएं सीखेंगे पारंपरिक कला
ज्योतिर्मठ, 2 सितंबर (कपरूवाण)। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की पहल पर विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण की पारंपरिक मुखौटा निर्माण कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भराड़ीसैंण, गैरसैंण स्थित अंतरराष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से बुधवार को क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर सलूड़-डुंग्रा में रम्माण मुखौटा निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य रम्माण की सदियों पुरानी मुखौटा निर्माण कला को संरक्षित करने के साथ ही इसे नई पीढ़ी को हस्तांतरित करना है। पहले चरण में क्षेत्र के विद्यालयों से जुड़े 24 छात्र-छात्राओं को चार माह तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। रम्माण के पारंपरिक मुखौटा निर्माण के प्रमुख कलाकार मोहन लाल इन छात्र-छात्राओं को मुखौटे तैयार करने की बारीकियां सिखाएंगे।
चार माह का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की ओर से नामित विशेषज्ञ प्रशिक्षणार्थियों के कौशल का मूल्यांकन करेंगे। मूल्यांकन में सफल प्रतिभागियों को सात हजार रुपये प्रतिमाह की दर से कुल 28 हजार रुपये मानदेय के साथ टूल किट और प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को पारंपरिक मुखौटा निर्माण में दक्ष बनाने के साथ इस कला को आजीविका का माध्यम बनाने के लिए भी प्रोत्साहित करना है। दूसरे चरण में क्षेत्र के अन्य इच्छुक लोगों को भी प्रशिक्षण देने की योजना है। प्रशिक्षक के मानदेय और मुखौटा निर्माण के लिए आवश्यक काष्ठ की व्यवस्था भी विधानसभा की ओर से की जाएगी।
रम्माण के संयोजक डॉ. कुशल भंडारी ने 16 नवंबर 2025 को विधानसभा अध्यक्ष को मुखौटा निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव भेजा था। विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद अब इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारा गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की ओर से रम्माण के संरक्षण और इसे व्यापक पहचान दिलाने के लिए इससे पहले भी प्रयास किए गए हैं। तीन अक्टूबर 2025 को उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सलूड़-डुंग्रा की विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण के मुखौटे की प्रतिकृति और रम्माण पर आधारित पुस्तिका भेंट की गई थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित अनेक प्रमुख हस्तियों को भी रम्माण पुस्तिका भेंट कर इस विशिष्ट लोक विरासत से परिचित कराया गया है।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा के अनुभाग अधिकारी राकेश चंद्र रमोला, समीक्षा अधिकारी अंशुमान काला एवं अन्य अधिकारियों ने रम्माण समिति को टूल किट, बैनर और प्रशिक्षण से संबंधित सामग्री प्रदान की।
क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ढोल-दमाऊ की पारंपरिक धुनों के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य भरत सिंह कुंवर, ग्राम प्रधान सलूड़ सुनीता देवी, ग्राम प्रधान डुंग्रा रीना, अस्सी गाण्या भरत सिंह पंवार, रम्माण समिति के अध्यक्ष शरत सिंह रावत, मुखौटा निर्माण प्रशिक्षक मोहन लाल, विकेश सिंह कुंवर, गोविंद सिंह पंवार, रघुवीर सिंह, प्रदीप सिंह, हीरा सिंह पंवार, रणबीर सिंह चौहान और पैनखंडा इंटर कॉलेज सलूड़-डुंग्रा के प्रबंधक अजीत कुंवर सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन रम्माण के संयोजक डॉ. कुशल भंडारी ने किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से रम्माण की विशिष्ट मुखौटा निर्माण परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
