दुर्गम पथरीले रास्ते पर छह किमी डोली में प्रसूता, अस्पताल पहुंची तो डॉक्टर नहीं
हेलीकॉप्टर ने भरी उड़ान, खराब मौसम ने रोका रास्ता; दो घंटे बाद मिली एंबुलेंस
–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट–
थराली, 3 सितम्बर। सड़क से छह किलोमीटर दूर पहाड़ी गांव। बारिश के बीच दुर्गम और पथरीला पैदल रास्ता। प्रसव पीड़ा से जूझती महिला को कुर्सीनुमा डोली पर उठाकर आगे बढ़ते ग्रामीण और ऊपर से खराब मौसम। किसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां डॉक्टर भी नहीं मिला। विकासखंड देवाल के सुदूरवर्ती पिनाऊ गांव की 33 वर्षीय खिमली देवी को अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की स्थिति को एक बार फिर सामने ला दिया है।
पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू का गांव पिनाऊ आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। यहां के ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए छह किलोमीटर से अधिक दुर्गम पहाड़ी रास्ता पैदल तय करना पड़ता है।
बुधवार सुबह खिमली देवी पत्नी धन सिंह को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से संपर्क कर हेलीकॉप्टर भेजने की मांग की। थराली विधायक भूपाल राम टम्टा की पहल पर हेलीकॉप्टर की व्यवस्था हुई और उसने घेस घाटी के लिए उड़ान भी भरी, लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण उसे आधे रास्ते से लौटना पड़ा।
हेलीकॉप्टर नहीं पहुंचने की सूचना के बाद ग्रामीणों ने समय गंवाए बिना प्रसूता को डोली पर बैठाया। बारिश और बेहद कठिन पथरीले रास्ते से करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर उसे बलाण गांव तक पहुंचाया गया। वहां से वाहन के जरिए महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल ले जाया गया।
परिजनों की परेशानी तब और बढ़ गई जब स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक उपलब्ध नहीं मिला। बताया गया कि वहां तैनात चिकित्सक परीक्षा के सिलसिले में बाहर गए हैं। जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद एक एएनएम स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और प्रसूता को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया। करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस पहुंचने पर महिला को जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया।
विधायक भूपाल राम टम्टा ने बताया कि हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर दी गई थी, लेकिन अत्यधिक खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण उसे वापस लौटना पड़ा।
