चिकित्सा विज्ञान का एक अनूठा मिश्रण है न्यूक्लियर मेडिसिन
Nuclear medicine is a specialized area of radiology. It uses very small amounts of a radioactive substance (radionuclide or radio-tracer) for health research, diagnosis, and treatment of various conditions, including cancer. Nuclear medicine imaging is a mix of many different disciplines. These include chemistry, physics, mathematics, computer technology, and medicine.Soft tissue, such as intestines, muscles, and blood vessels, is hard to see on a standard X-ray unless a contrast agent is used. This agent allows the tissue to be seen more clearly. Nuclear imaging shows organ and tissue structure as well as function
––ज्योति रावत –
न्यूक्लियर मेडिसिन रेडियोलॉजी का एक विशेष क्षेत्र है। इसमें स्वास्थ्य अनुसंधान, विभिन्न बीमारियों के निदान और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों के उपचार के लिए बहुत कम मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ (रेडियोन्यूक्लाइड या रेडियो-ट्रेसर) का उपयोग किया जाता है। यह रसायन विज्ञान, भौतिकी, गणित, कंप्यूटर तकनीक और चिकित्सा विज्ञान का एक अनूठा मिश्रण है। साधारण एक्स-रे से आंतों, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं जैसे नरम ऊतकों को देखना मुश्किल होता है और एक्स-रे मुख्य रूप से शरीर की बाहरी संरचना को दर्शाते हैं। इसके विपरीत, न्यूक्लियर इमेजिंग अंगों और ऊतकों की कार्यप्रणाली को गहराई से दिखाती है। इस प्रक्रिया में शरीर में बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ डाला जाता है। यह पदार्थ शरीर के ऊतकों द्वारा सोख लिया जाता है। इसके बाद उस अंग से निकलने वाले विकिरण (Radiation) को गामा कैमरा जैसे विशेष उपकरणों द्वारा ट्रैक किया जाता है, जिससे कंप्यूटर की मदद से सटीक डिजिटल चित्र तैयार होते हैं। इस तकनीक के जरिए ट्यूमर, संक्रमण, अंगों के असामान्य रूप से बड़े होने या रक्त प्रवाह जैसी समस्याओं का सटीक आकलन किया जा सकता है।

प्रमुख स्कैन और इसके चिकित्सीय उपयोग न्यूक्लियर स्कैन का उपयोग शरीर के कई अंगों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, रीनल स्कैन किडनी की कार्यप्रणाली और उसमें रक्त प्रवाह की रुकावटों को जांचते हैं, जबकि थायरॉयड स्कैन थायरॉयड ग्रंथि की कार्यक्षमता या किसी भी प्रकार की गांठ का पता लगाते हैं। गठिया, ट्यूमर या हड्डियों में दर्द के कारण जानने के लिए बोन स्कैन किए जाते हैं। इसी तरह, गैलियम स्कैन संक्रमण या सूजन वाली बीमारियों को पकड़ने में मदद करते हैं। हृदय स्कैन (हार्ट स्कैन) से हृदय में रक्त के प्रवाह और उसकी कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है, जिससे यह पता चलता है कि दिल के दौरे के बाद हृदय को कितना नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के लिए ब्रेन स्कैन और स्तन कैंसर का अधिक सटीकता से पता लगाने के लिए ब्रेस्ट स्कैन का उपयोग किया जाता है। न्यूक्लियर मेडिसिन केवल बीमारियों की पहचान (निदान) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग हाइपरथायरायडिज्म, थायरॉयड कैंसर, लिम्फोमा और विशिष्ट कैंसर के कारण होने वाले हड्डियों के दर्द के प्रभावी इलाज में भी किया जाता है।
न्यूक्लियर स्कैन की प्रक्रिया कैसे की जाती है? किसी भी न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन की प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है: सबसे पहले मरीज को ट्रेसर (रेडियोधर्मी पदार्थ) दिया जाता है, उसके बाद मशीन द्वारा चित्र (इमेज) लिए जाते हैं, और अंत में डॉक्टर उन चित्रों का विश्लेषण करते हैं। ट्रेसर देने और चित्र लेने के बीच का समय कुछ मिनटों से लेकर कुछ दिनों तक का हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि किस अंग की जांच की जा रही है। जांच प्रक्रिया के दौरान मरीज को गहने या धातु की चीजें उतारने के लिए कहा जाता है। इसके बाद एक आईवी (IV) लाइन के जरिए मरीज के शरीर में रेडियोधर्मी पदार्थ पहुंचाया जाता है। कुछ मामलों में मरीज का थोड़ा सा खून निकालकर उसमें रेडियोधर्मी पदार्थ मिलाया जाता है और फिर उसे वापस शरीर में डाल दिया जाता है। जब यह ट्रेसर शरीर में सही जगह पहुंच जाता है, तो मरीज के ऊपर एक गामा कैमरा सेट किया जाता है जो शरीर के अंदर की बारीकी से तस्वीरें लेता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को बिल्कुल स्थिर लेटना होता है, क्योंकि थोड़ी सी भी हरकत स्कैन की गुणवत्ता को खराब कर सकती है। जांच सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद आईवी लाइन निकाल दी जाती है और डॉक्टर के निर्देशानुसार मरीज घर जा सकता है।
