वाण में मिलन के बाद जुदा हुईं देव डोलियां, बड़ी जात वेदनी और बधाण की नंदा गैरोलीपातल पहुंची
वाण में करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने किए देव डोलियों और छंतोलियों के दर्शन, आज बड़ी जात बगवाबासा के लिए रवाना
-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/देवाल, 17 सितम्बर। लाटू धाम वाण में भावपूर्ण मिलन के बाद गुरुवार को नंदा देवी की यात्राएं अलग-अलग मार्गों पर आगे बढ़ गईं। दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियों, छंतोलियों तथा चौसिंगा खंडू के साथ चल रही नंदा देवी बड़ी जात कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए 14वें पड़ाव वेदनी बुग्याल पहुंची, जबकि बधाण परगना की राजराजेश्वरी नंदा देवी की डोली गैरोलीपातल पहुंची। वाण में करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खंडू के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
बुधवार को दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियां कनोल से वाण पहुंची थीं, जबकि बधाण की नंदा देवी की डोली मंदोली से यहां पहुंची। वाण में देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खंडू का बधाण की राजराजेश्वरी नंदा देवी की डोली से भावपूर्ण मिलन हुआ। इस दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। नंदा भगवती और लाटू देवता के जयकारों तथा पुष्पवर्षा के बीच यात्राओं का स्वागत किया गया।
इस अवसर पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, राज्य मंत्री बलवीर घुनियाल और मुख्यमंत्री समन्वयक दलवीर दानू सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, उपजिलाधिकारी थराली यशवीर सिंह, तहसीलदार अक्षय पंकज और थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया सहित प्रशासनिक अधिकारी भी व्यवस्थाओं के लिए वाण में मौजूद रहे। लाटू देवता मंदिर समिति के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट, ग्राम प्रधान नंदुली बिष्ट और पूर्व जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट सहित ग्रामीणों ने यात्रियों का स्वागत किया।
गुरुवार सुबह करीब आठ बजे दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियों, छंतोलियों तथा चौसिंगा खंडू ने नंदा चौक में बधाण की नंदा देवी से विदाई ली। देव डोलियों की जुदाई का यह क्षण भी भावुक रहा। इसके बाद बड़ी जात लाटू मंदिर पहुंची, जहां देवियों की लाटू देवता से भेंट के बाद यात्रा आगे बढ़ी।
बड़ी जात रणकाधार, नीलगंगा और गैरोलीपातल के दुर्गम रास्तों को पार कर वेदनी बुग्याल पहुंची, जहां पहले से मौजूद श्रद्धालुओं ने उसका स्वागत किया। बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत और मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने बताया कि शुक्रवार को यात्रा 15वें पड़ाव बगवाबासा के लिए रवाना होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
दूसरी ओर, करीब 11 बजे बधाण की राजराजेश्वरी नंदा देवी की डोली ने वाण से विदाई ली और रणकाधार तथा नीलगंगा होते हुए गैरोलीपातल पहुंची। राजराजेश्वरी मंदिर एवं मेला समिति कुरूड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़ और पूर्व अध्यक्ष मनशा राम गौड़ ने बताया कि शुक्रवार सुबह डोली वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। वहां वेदनी कुंड में तर्पण और नंदा देवी मंदिर में विशेष पूजा के बाद यात्रा सिद्धपीठ देवराड़ा के लिए वापस लौटेगी। वापसी का पहला पड़ाव बांक होगा।
भीड़ बढ़ी तो कम पड़ गईं ठहरने की व्यवस्थाएं
अपेक्षा से अधिक श्रद्धालुओं के वाण पहुंचने से बुधवार रात ठहरने की व्यवस्थाएं कम पड़ गईं। ग्रामीणों के प्रयासों के बावजूद सभी यात्रियों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था नहीं हो सकी। सैकड़ों श्रद्धालुओं को अपने वाहनों में अथवा नंदा चौक में चल रहे नंदा कौथिग में रात गुजारनी पड़ी। जिन्हें आगे की यात्रा में शामिल नहीं होना था, वे गुरुवार तड़के अपने गंतव्यों के लिए रवाना हो गए, जबकि हजारों श्रद्धालु बड़ी जात के साथ आगे बढ़े।
थराली विधायक भूपाल राम टम्टा की ओर से वाण में सार्वजनिक भंडारे का आयोजन भी किया गया। बुधवार रात और गुरुवार सुबह हजारों यात्रियों ने यहां प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया। विधायक भी यात्रा के दौरान वाण में मौजूद रहे।
