पहाड़ों में बढ़ता बंदरों का आतंक, घर में घुसकर पूर्व प्रधान को किया गंभीर घायल

गौचर, 23 सितम्बर (दिग्पाल गुसाईं)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती-किसानी के लिए बड़ी चुनौती बन चुके बंदर अब आबादी और घरों के भीतर तक पहुंचकर लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनने लगे हैं। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकासखंड की सिदोली ग्रामसभा में बुधवार को एक बंदर ने घर के अंदर घुसकर पूर्व ग्राम प्रधान सोनी केडियाल पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना ने पहाड़ में बंदरों के बढ़ते आतंक और मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर होती समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है।
जानकारी के अनुसार सोनी केडियाल अपने घर में रोजमर्रा के काम में व्यस्त थीं। इसी दौरान एक बंदर अचानक घर के अंदर घुस आया और उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके पैर पर गहरे घाव हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए कर्णप्रयाग अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों को घावों पर कई टांके लगाने पड़े। उनका उपचार जारी है।
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की समस्या अब किसी एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है। उत्तराखंड के अनेक पर्वतीय इलाकों में बंदरों के झुंड खेतों और बगीचों में फसलों, फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती से लोगों के विमुख होने के पीछे वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान को भी एक बड़ी वजह माना जाता रहा है। अब बंदरों के आबादी वाले क्षेत्रों और घरों तक पहुंचने से समस्या ने सुरक्षा का रूप भी ले लिया है।
पहाड़ में इस समस्या का सबसे अधिक सामना महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को करना पड़ रहा है। गांवों में महिलाएं खेती और पशुपालन के काम के लिए खेतों तथा जंगलों तक जाती हैं। कई स्थानों पर बंदरों के झुंडों के कारण खेतों की रखवाली भी चुनौती बन गई है। ऐसे में घर के भीतर घुसकर हमला करने जैसी घटनाएं ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा रही हैं।
पूर्व प्रधान पंकज देवली ने घटना पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अब अपने घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन और वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की समस्या को केवल फसल नुकसान के रूप में देखने के बजाय पहाड़ की खेती, ग्रामीण आजीविका और मानव सुरक्षा से जोड़कर दीर्घकालिक समाधान तलाशने की जरूरत है। आक्रामक बंदरों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाने के साथ ही उनकी बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी और निरंतर कार्ययोजना लागू की जानी चाहिए।
