बच्चों में बिस्तर गीला करने की समस्या: आयुर्वेद के साथ योग से बेहतर नतीजे, ITRA का अध्ययन
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर। बच्चों में रात को सोते समय अनजाने में बिस्तर गीला करने की समस्या के प्रबंधन में आयुर्वेदिक औषधि के साथ नियमित योगाभ्यास उपयोगी हो सकता है। जामनगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (ITRA) के एक छोटे चिकित्सकीय अध्ययन में आठ सप्ताह के दौरान दोनों को साथ अपनाने वाले बच्चों में केवल आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले बच्चों की तुलना में बेहतर परिणाम दर्ज किए गए।
बिस्तर गीला करने की समस्या को चिकित्सकीय भाषा में नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस और आयुर्वेद में ‘शय्यामूत्र’ कहा जाता है। यह बच्चों में अपेक्षाकृत सामान्य समस्या है। बार-बार ऐसा होने पर बच्चे को शर्मिंदगी, तनाव और आत्मविश्वास में कमी जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
38 बच्चों पर आठ सप्ताह अध्ययन
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान ITRA के कौमारभृत्य विभाग ने 6 से 14 वर्ष आयु के करीब 38 बच्चों को अध्ययन में शामिल किया। उन्हें दो समूहों में बांटकर आठ सप्ताह तक उपचार के प्रभाव का आकलन किया गया।
पहले समूह को ‘मेध्य रसायन चूर्ण’ दिया गया, जिसमें ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी और गिलोय शामिल थे। दूसरे समूह को यही औषधि देने के साथ सुबह और शाम उत्कटासन, अर्ध-शलभासन, भुजंगासन और शवासन का अभ्यास कराया गया।
अध्ययन में केवल आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले बच्चों में बिस्तर गीला करने की आवृत्ति में करीब 38 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया। इसके मुकाबले औषधि के साथ योग करने वाले बच्चों में यह सुधार करीब 70 प्रतिशत रहा।
यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि 70 प्रतिशत का आंकड़ा यह नहीं बताता कि इतने बच्चे पूरी तरह ठीक हो गए। यह अध्ययन में इस्तेमाल किए गए आकलन के आधार पर लक्षणों अथवा बिस्तर गीला करने की आवृत्ति में दर्ज सुधार को दर्शाता है।
स्मरणशक्ति और व्यवहार में भी बदलाव
शोधकर्ताओं के अनुसार संयुक्त उपचार वाले बच्चों में कुछ अन्य मानकों पर भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए। उनकी स्मरणशक्ति में करीब 61 प्रतिशत सुधार बताया गया, जबकि केवल औषधि लेने वाले समूह में यह करीब 31 प्रतिशत था।
इसी प्रकार संयुक्त उपचार समूह में चिड़चिड़ेपन में लगभग 66 प्रतिशत और अत्यधिक सक्रियता में करीब 71 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने एकाग्रता और मनोबल से जुड़े मानकों में भी सुधार की सूचना दी।
अध्ययन के निष्कर्ष ‘AYU’ जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र में सामने आए हैं। शोध प्रो. वैद्य वीरेंद्र कोरी, वैद्य सागर भिंडे और वैद्य अमीषा बावर्वा ने किया है।
ITRA की निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी के अनुसार बच्चों में बिस्तर गीला करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और यह समस्या उनके आत्मविश्वास तथा व्यवहार को भी प्रभावित कर सकती है। अध्ययन में आयुर्वेदिक औषधि और योग के संयुक्त प्रयोग से कई मानकों पर उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
बच्चे को डांटना समाधान नहीं
बिस्तर गीला करना आमतौर पर बच्चे की जानबूझकर की गई हरकत नहीं होती। इसलिए ऐसी स्थिति में बच्चे को डांटना, शर्मिंदा करना या दूसरे बच्चों से उसकी तुलना करना उचित नहीं है। समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि कुछ मामलों में इसके पीछे नींद, मूत्राशय नियंत्रण, कब्ज, मूत्र संबंधी संक्रमण अथवा अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।
यदि पहले लगातार सूखा रहने वाला बच्चा अचानक दोबारा बिस्तर गीला करने लगे, दिन में भी पेशाब पर नियंत्रण न रहे, पेशाब करते समय दर्द हो, बहुत अधिक प्यास लगे या समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
नतीजे उत्साहजनक, लेकिन अध्ययन छोटा
ITRA का यह अध्ययन आयुर्वेद और योग के संयुक्त उपयोग की संभावनाओं की ओर संकेत करता है, लेकिन इसमें केवल करीब 38 बच्चे शामिल थे और अध्ययन की अवधि आठ सप्ताह थी। इसलिए इसके परिणामों को बड़े और दीर्घकालीन अध्ययनों में दोहराया जाना जरूरी है।
अभिभावकों को अध्ययन में इस्तेमाल किए गए आयुर्वेदिक चूर्ण या योगासनों को अपने स्तर पर बच्चे का उपचार मानकर शुरू नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों को कोई भी औषधि देने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।


