युवा संगम के तहत उत्तराखंड के प्रतिनिधियों का दल पश्चिम बंगाल रवाना

श्रीनगर (गढ़वाल), 6 अक्टूबर। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत ‘युवा संगम’ के सातवें चरण में उत्तराखंड के युवा प्रतिनिधियों का दल मंगलवार को पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुआ। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इससे पहले विश्वविद्यालय के एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में प्रतिनिधियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। युवा संगम के इस चरण में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से चयनित छात्र-छात्राएं शामिल हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय को इस कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड की नोडल संस्था बनाया गया है।
कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि युवा संगम केवल अंतरराज्यीय यात्रा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने प्रतिनिधियों से यात्रा के अनुभवों का उपयोग अपने दृष्टिकोण और समझ को व्यापक बनाने के लिए करने को कहा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों ने यात्रा और पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित गतिविधियों को लेकर कुलपति से सवाल भी किए।
नोडल अधिकारी एवं पृथ्वी विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. महाबीर सिंह नेगी ने बताया कि यात्रा को पांच प्रमुख विषयों—पर्यटन, परंपरा, प्रगति, प्रौद्योगिकी और परस्पर संपर्क—के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि पश्चिम बंगाल में उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली से भी लोगों को परिचित कराएंगे।
कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी ने कहा कि इस कार्यक्रम से उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओपी गोसाईं ने प्रतिनिधियों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की अपेक्षा की।
निदेशक प्रो. हरिभजन सिंह चौहान ने चयनित छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं। प्रो. मोहन सिंह पंवार ने प्रतिनिधियों से यात्रा के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का संचालन युवा संगम के समन्वयक डॉ. नरेश ने किया। इस अवसर पर सहायक नोडल अधिकारी डॉ. कौशल, डॉ. अनुराही, डॉ. नरेंद्र, डॉ. सना रफी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

