दून विश्वविद्यालय में रंगमंच की बारीकियों से रूबरू हुए विद्यार्थी

दो दिवसीय कार्यशाला में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने सीखे अभिनय और मंचीय प्रस्तुति के गुर
देहरादून, 8 अक्टूबर। दून विश्वविद्यालय के रंगमंच विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद अदायगी, दृश्य निर्माण और मंचीय प्रस्तुति की बारीकियां सीखीं। भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ के रंगकर्मी एवं प्रशिक्षक अक्षय मिश्रराम ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से रंगमंच की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में सैद्धांतिक जानकारी के बजाय अभ्यास के माध्यम से सीखने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि रंगमंच केवल मंच पर अभिनय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पटकथा, अभिनेता की तैयारी, कथा-वाचन, दृश्य निर्माण, मंचीय स्थान और कलाकारों के बीच समन्वय भी प्रभावशाली प्रस्तुति के महत्वपूर्ण अंग हैं।
कार्यशाला के पहले दिन अभिनेता की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया गया। विद्यार्थियों ने आंगिक एवं वाचिक अभिनय, संवाद अदायगी, शारीरिक सजगता और मानसिक एकाग्रता से जुड़े अभ्यास किए। उन्हें शरीर, आवाज और भावनाओं के माध्यम से प्रभावी अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण दिया गया।
दूसरे दिन मंचीय प्रस्तुति की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों ने दृश्य-बिंब तैयार करने, कथा को मंच पर विकसित करने और समूह के साथ मिलकर प्रस्तुति तैयार करने का अभ्यास किया। इस दौरान सामूहिक सृजन पर आधारित रंगमंच की अवधारणा और उसके प्रयोगात्मक पक्ष से भी परिचित कराया गया।
प्रशिक्षक अक्षय मिश्रराम ने बताया कि पटकथा, अभिनेता और मंच के बीच बेहतर तालमेल से ही प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति संभव होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सह-कलाकारों के प्रति संवेदनशील रहते हुए अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि रंगमंच विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। इससे विद्यार्थियों में सामूहिक कार्य करने और विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता बढ़ती है।
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं अभिनय के साथ अनुशासन, नेतृत्व और सामूहिक समन्वय का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करती हैं।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें शुभम, अनिता, वैशाली, महक, कनिका और सुमित सहित रंगमंच विषय का अध्ययन कर रहे अनेक विद्यार्थी शामिल थे।
इस अवसर पर कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, प्रो. आर.पी. ममगाईं, प्रो. एच. हर्ष डोभाल, प्रो. चेतना पोखरियाल, डॉ. स्वाति बिष्ट, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अजीत पंवार और डॉ. कैलाश कंडवाल सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

