ब्रह्मांड का अद्भुत रहस्य: अतिविशाल ब्लैक होल कैसे रोकते हैं नए तारों का जन्म
A recent study by Indian Institute of Astrophysics researchers, led by Payal Nandi, reveals that supermassive black holes actively suppress star formation in galaxies through powerful outflows. Analyzing over 500 nearby active galactic nuclei using Sloan Digital Sky Survey and Very Large Array data, the team found that radiation-driven winds, boosted by radio jets, eject hot gas at speeds up to 2,000 km/s. Radio-loud galaxies showed outflows in 56% of cases versus 25% in radio-quiet ones. This negative AGN feedback prevents gas from cooling and collapsing, explaining low star-formation rates in galactic centers and advancing our understanding of galaxy evolution. The findings appear in The Astrophysical Journal.

-ज्योति रावत –
हाल ही में हुए एक नए और बेहद दिलचस्प अध्ययन से यह सामने आया है कि ब्लैक होल सिर्फ चीजों को निगलने का काम नहीं करते, बल्कि वे अपने आस-पास नए तारों के जन्म को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह खोज वैज्ञानिकों को आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) के विकास को गहराई से समझने में मदद कर रही है। साथ ही, इससे इस पुराने सवाल का जवाब भी मिल गया है कि आखिर कुछ आकाशगंगाओं में नए तारे बनने की दर इतनी धीमी क्यों होती है।
हर बड़ी आकाशगंगा के ठीक बीच में एक अतिविशाल ब्लैक होल होता है। यह ब्लैक होल हमारे सूरज से कई लाख गुना ज्यादा बड़ा और भारी होता है। जब इन ब्लैक होल के अंदर भारी मात्रा में पदार्थ गिरता है, तो वहां से बहुत अधिक ऊर्जा और गैस बाहर की तरफ तेजी से निकलती है। इसे विज्ञान की भाषा में ‘सक्रिय आकाशगंगा नाभिक’ (AGN) कहा जाता है। खगोलविदों के लिए यह हमेशा से एक पहेली रही है कि ब्लैक होल से निकलने वाली यह गैस और विकिरण (रेडिएशन) आकाशगंगाओं के पूरे विकास और उनके स्वभाव को किस तरह से नियंत्रित करते हैं।
भारतीय खगोलविदों की अहम खोज
इस उलझन को सुलझाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत काम करने वाले भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के खगोलविदों ने एक विस्तृत शोध किया। इस शोध टीम का नेतृत्व आईआईए की शोध छात्रा पायल नंदी ने किया।
इस अध्ययन के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन दूरबीनों के पुराने और सटीक डेटा का इस्तेमाल किया गया। इनमें अमेरिका की ‘स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे’ (एसडीएसएस) जो प्रकाश की किरणों पर काम करती है और ‘वेरी लार्ज ऐरे’ (वीएलए) जो रेडियो तरंगों पर काम करती है, शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब मौजूद 500 से अधिक ऐसी आकाशगंगाओं का गहराई से अध्ययन किया, जिनके केंद्र बेहद सक्रिय (AGN) हैं।

गैस की आंधी और रेडियो जेट्स का प्रभाव
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता पायल नंदी बताती हैं कि जब ब्लैक होल बहुत सक्रिय होते हैं, तो वे अपने आस-पास मौजूद गर्म गैस को बहुत तेजी से बाहर की तरफ धकेलते हैं। हालांकि इस गैस को बाहर फेंकने में ब्लैक होल से निकलने वाला तेज रेडिएशन मुख्य भूमिका निभाता है, लेकिन जिन आकाशगंगाओं में ‘रेडियो जेट्स’ (ब्लैक होल से प्रकाश की गति से निकलने वाले कणों की किरणें) मौजूद होते हैं, वहां यह प्रक्रिया कहीं ज्यादा तेज और शक्तिशाली होती है।
शोध के आंकड़े बताते हैं कि रेडियो तरंगों वाली आकाशगंगाओं में गैस के बाहर निकलने की घटना 56 प्रतिशत पाई गई, जबकि बिना रेडियो उत्सर्जन वाली आकाशगंगाओं में यह केवल 25 प्रतिशत थी। यह गैस इतनी भयंकर गति से बाहर निकलती है कि इसकी रफ्तार 2,000 किलोमीटर प्रति सेकंड तक पहुंच जाती है। यह गति इतनी तेज है कि यह आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण बल को भी पार कर जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि रेडिएशन एक इंजन की तरह काम करता है, जबकि रेडियो जेट्स इसमें ‘बूस्टर’ लगाकर गैस को और ज्यादा ताकत से बाहर फेंकने में मदद करते हैं।

नए तारों का जन्म और आकाशगंगाओं का भविष्य
इस शोध में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि ब्लैक होल से निकलने वाली इसी तूफानी गैस के कारण आकाशगंगाओं के मध्य भाग में नए तारों का बनना लगभग पूरी तरह से रुक जाता है। तारे बनने के लिए गैस का एक जगह इकट्ठा होकर ठंडा होना जरूरी है, लेकिन ब्लैक होल की यह ऊर्जावान गतिविधियां गैस को टिकने ही नहीं देतीं। विज्ञान में इस प्रक्रिया को ‘नकारात्मक एजीएन फीडबैक’ (Negative AGN feedback) कहा जाता है।
आईआईए के वैज्ञानिक सी. एस. स्टालिन के अनुसार, आकाशगंगाओं के विकास की इस पूरी तस्वीर को समझने के लिए अलग-अलग तरह के डेटा (प्रकाश और रेडियो तरंगों) को एक साथ मिलाकर देखना बहुत जरूरी था। वहीं, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स से जुड़े सह-लेखक ध्रुबा जे. सैकिया का मानना है कि यह अध्ययन ब्लैक होल, रेडियो जेट्स और तारों के जन्म के बीच के उलझे हुए रिश्तों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ नामक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित यह शोध साबित करता है कि अंतरिक्ष में हमसे करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर बैठे रहस्यमयी ब्लैक होल केवल विनाशकारी नहीं हैं, बल्कि वे पूरे ब्रह्मांड की बनावट और आकाशगंगाओं के भविष्य को आकार देने वाले सबसे ताकतवर नियंत्रक हैं।

