बेमौसम बारिश से पिंडर घाटी की नकदी फसलों पर संकट
आलू, राजमा, मंडुवा और दलहनी फसलों को नुकसान की आशंका, पशुओं के लिए चारा संग्रह भी प्रभावित
थराली, 10 अक्टूबर (हरेन्द्र बिष्ट)। पिंडर घाटी में पिछले एक सप्ताह से जारी बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रतिकूल मौसम से घाटी के ऊंचाई वाले गांवों में उत्पादित नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, निचले क्षेत्रों में लगातार बारिश से दलहनी फसलों के साथ ही पशुओं के लिए घास की कटाई और भंडारण का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पिंडर घाटी के निचले क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश हो रही है, जबकि ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी का सिलसिला जारी है। इस मौसम का प्रतिकूल प्रभाव विशेष रूप से ऊंचाई पर बसे गांवों में उत्पादित आलू, मंडुवा, राजमा, भट्ट, सोयाबीन, चौलाई और फाफर जैसी नकदी एवं परंपरागत फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। फसलों की कटाई और उन्हें सुखाने के समय लगातार बारिश होने से किसानों के सामने उपज की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
घाटी के निचले क्षेत्रों में भी मौसम की मार पड़ रही है। यहां भट्ट, सोयाबीन, गहत, उड़द सहित विभिन्न दलहनी फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। लगातार नमी और बारिश से तैयार फसलों की कटाई तथा उन्हें सुखाने में कठिनाई हो रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बेमौसम बारिश का असर पशुपालन पर भी दिखाई देने लगा है। पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण इन दिनों शीतकाल और आगामी ग्रीष्मकाल के लिए घास काटकर उसे सुखाने तथा संग्रह करने का काम करते हैं। लेकिन लगातार बारिश के कारण घास की कटाई और उसे सुखाने का कार्य बाधित हो रहा है। इससे आने वाले महीनों में पशुओं के लिए सूखे चारे की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।
पिंडर घाटी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में फसलों और चारे की व्यवस्था पर एक साथ पड़ रही मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसानों को फसलों के नुकसान के साथ ही पशुपालन संबंधी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ सकता है।

