शिक्षा/साहित्य

बीना बेंजवाल के कविता संग्रह “अफु तैं अफ़्वी झकोलणी वा” का लोकार्पण

 

देहरादून, 14 अक्टूबर (शास्त्री)। गढ़वाली कविता और लोकगायन के शीर्ष पुरुष नरेंद्र सिंह नेगी ने आज कहा कि सात- आठ दशक पहले गढ़वाली काव्य की जो संरचना थी, तब शिक्षा का स्तर भी न्यून था, इसलिए उसे हाई स्कूल पास की संज्ञा दे सकते हैं, क्योंकि तब गढ़वाली में जो साहित्य लिखा जा रहा था, उसे कम पढ़ा व्यक्ति भी समझ लेता था और उन्हीं गीतों को लोग पसंद भी करते थे। यहां तक कि अनपढ़ लोग भी उसे समझ लेते थे किंतु आज शिक्षा का प्रसार होने से गढ़वाली कविता का स्तर भी ऊंचा हुआ है और निसंदेह जो कुछ भी लिखा जा रहा है, कह सकते हैं कि कविता भी पढ़ी लिखी हो गई है दूसरे शब्दों में वह ग्रेजुएट हो गई है। बीना बेंजवाल के काव्य संग्रह में उसकी झलक मिलती है।
गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि हमारे लिए यह गौरव की बात है कि आज उत्कृष्ट साहित्य सृजन हो रहा है, साथ ही डिजिटल विधा में परमेंद्र सिंह रावत जैसा काम कर रहे हैं उससे लोकभाषा के प्रसार की उम्मीद बढ़ी है। श्री नेगी गढ़वाली की प्रख्यात कवयित्री बीना बेंजवाल के कविता संग्रह “अफु तैं अफ़्वी झकोलणी वा” का लोकार्पण समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
बीना बेंजवाल के गढ़वाली कविता संग्रह “अफु तैं अफ़्वी झकोलणी वा” का लोकार्पण मंगलवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गीतकार एवं लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी समारोह के अतिरिक्त समारोह में गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक गणेश खुगशाल “गणी”, साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी डॉ.नंदकिशोर हटवाल, लोकभाषा साहित्यकार देवेंद्र जोशी विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन गढ़वाली के सिद्धहस्त कवि गिरीश सुंदरियाल ने किया। इसी समारोह में “गढ़भाषा” मोबाइल एप का लोकार्पण भी हुआ। यह एप परमेंद्र सिंह रावत और उनकी टीम ने किया है।
विनसर पब्लिशिंग कंपनी द्वारा प्रकाशित इस कविता संग्रह में गढ़वाली काव्य संग्रह को गढ़वाली साहित्य में मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी के रचनाकारों को सृजन की प्रेरणा मिलेगी।
गणेश खुगशाल गणी ने बीना बेंजवाल की कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कविताओं का तेवर पाठकों को झकझोरता है। देवेंद्र जोशी ने काव्य संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा कि तीसरी दुनिया के देशों में महिलाओं की स्थिति सर्वत्र समान है और बीना बेंजवाल की कविताएं उसी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि गढ़वाली में जो काव्य सृजन हो रहा है, वह निसंदेह वैश्विक स्तर का है। डॉ. नंद किशोर हटवाल ने बीना के रचना संसार की व्याख्या करते हुए इसे उच्च कोटि का बताया। साहित्यकार मदन मोहन डुकलान ने बीना बेंजवाल के कविता संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि वे शुरू से उत्कृष्ट लेखन करती आ रही हैं।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन रमाकांत बेंजवाल ने किया। इस अवसर पर अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद, रचनाकार, संस्कृतिकर्मी मौजूद थे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!