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भारत में कारों की सुरक्षा के नए मानक : अब पीछे से टक्कर में भी सुरक्षित रहेंगे वाहन, दुर्घटनाओं का हिसाब रखेगा ब्लैक बॉक्स

 

**अप्रैल 2027 से अक्टूबर 2029 के बीच चरणबद्ध ढंग से लागू होंगे नए नियम, वाहन चोरी रोकने और यात्रियों के साथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर भी जोर**

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। भारत में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली जनहानि और वाहनों में आग लगने की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कारों के सुरक्षा मानकों को और कठोर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन निर्माताओं के लिए नए सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समयसीमा निर्धारित की है। इन मानकों में पीछे से टक्कर लगने पर ईंधन टैंक और बैटरी की सुरक्षा, दुर्घटना संबंधी आंकड़ों की रिकॉर्डिंग, वाहन चोरी रोकने की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था तथा पैदल यात्रियों और अन्य असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं।

*द टाइम्स ऑफ इंडिया* में प्रकाशित दीपक दास की रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रावधान अप्रैल 2027 से अक्टूबर 2029 के बीच अलग-अलग चरणों में प्रभावी होंगे। इनका उद्देश्य भारतीय सड़कों पर चलने वाली कारों को केवल सामने से होने वाली टक्कर के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पीछे और बगल से होने वाली दुर्घटनाओं की दृष्टि से भी अधिक सुरक्षित बनाना है।

अप्रैल 2029 से पीछे की टक्कर के लिए नए परीक्षण

नए मानकों का एक महत्वपूर्ण प्रावधान पीछे से होने वाली टक्कर के दौरान वाहन में आग लगने के जोखिम को कम करना है। अप्रैल 2029 से निर्मित सभी नई कारों को ऐसे दुर्घटना परीक्षण मानक का पालन करना होगा, जिसके तहत पीछे से टक्कर लगने की स्थिति में पेट्रोल अथवा डीजल वाहन के ईंधन टैंक से ईंधन का रिसाव न हो और इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को खतरनाक क्षति से बचाया जा सके।

सड़क दुर्घटनाओं में कई बार टक्कर के बाद ईंधन रिसने या बैटरी प्रणाली क्षतिग्रस्त होने से आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है। विशेष रूप से तेज रफ्तार से पीछे से टक्कर लगने पर वाहन के पिछले हिस्से में स्थित ईंधन प्रणाली प्रभावित हो सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी पैक की संरचनात्मक सुरक्षा और विद्युत प्रणाली का सुरक्षित बने रहना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

नए मानकों के अनुरूप वाहन निर्माताओं को कारों की संरचना, ईंधन टैंक की स्थिति, बैटरी की सुरक्षा और टक्कर के प्रभाव को नियंत्रित करने वाले हिस्सों के डिजाइन पर विशेष ध्यान देना होगा। हालांकि, कोई भी दुर्घटना परीक्षण सभी परिस्थितियों में आग या क्षति की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन निर्धारित मानकों का पालन गंभीर दुर्घटनाओं में जोखिम कम करने में सहायक हो सकता है।

अक्टूबर 2029 से कारों में दुर्घटना का विवरण दर्ज करने की व्यवस्था

सरकार ने कारों में विमान के ब्लैक बॉक्स जैसी तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, अक्टूबर 2029 से कारों में लगाए जाने वाले इवेंट डेटा रिकॉर्डर (ईडीआर) के लिए एआईएस-192 मानक का अनुपालन अनिवार्य होगा।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है। समाचार के अनुसार, फिलहाल प्रत्येक कार में ईडीआर लगाना अनिवार्य नहीं किया गया है। यह उपकरण वैकल्पिक रहेगा, लेकिन जिन कारों में इसे लगाया जाएगा, उन्हें निर्धारित तकनीकी मानक का पालन करना होगा।

ईडीआर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो दुर्घटना से ठीक पहले और दुर्घटना के दौरान वाहन की गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज कर सकता है। उपकरण और वाहन की तकनीकी संरचना के अनुसार इनमें गति, ब्रेक लगाने की स्थिति, एक्सीलेरेटर का उपयोग, सीट बेल्ट की स्थिति तथा टक्कर के समय वाहन की गति में आए परिवर्तन जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

इन आंकड़ों से दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में सहायता मिल सकती है। उदाहरण के लिए, किसी दुर्घटना में यह समझने में मदद मिलेगी कि चालक ने समय पर ब्रेक लगाए थे या नहीं, वाहन की गति कितनी थी और टक्कर के दौरान सुरक्षा प्रणालियों ने किस प्रकार काम किया।

इस तकनीक से सड़क सुरक्षा अनुसंधान, वाहन डिजाइन में सुधार तथा दुर्घटनाओं की जांच में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके व्यापक उपयोग के साथ आंकड़ों की गोपनीयता, सुरक्षित भंडारण और जांच एजेंसियों की उन तक पहुंच के स्पष्ट नियम भी आवश्यक होंगे।

अक्टूबर 2027 से वाहन चोरी रोकने के लिए इमोबिलाइजर

नए सुरक्षा प्रावधानों में वाहन चोरी की रोकथाम को भी महत्व दिया गया है। अक्टूबर 2027 से कारों में इलेक्ट्रॉनिक इमोबिलाइजर लगाना अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है।

इमोबिलाइजर एक इलेक्ट्रॉनिक चोरी-रोधी प्रणाली है, जो अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक संकेत प्राप्त हुए बिना वाहन के इंजन को चालू होने से रोकती है। सामान्यतः वाहन की चाबी या संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में मौजूद पहचान प्रणाली के माध्यम से इंजन को चालू करने की अनुमति मिलती है।

इस व्यवस्था से केवल चाबी की नकल बनाकर या पारंपरिक तरीकों से वाहन चालू करना कठिन हो सकता है। हालांकि, यह तकनीक वाहन चोरी की सभी संभावनाओं को समाप्त नहीं करती, क्योंकि आधुनिक वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को भी अपराधी निशाना बना सकते हैं।

यात्रियों के साथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण

मंत्रालय ने अन्य ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (एआईएस) के अनुपालन के लिए भी समयसीमा तय की है। इनमें सामने से तिरछी टक्कर, पार्श्व टक्कर, वाहन में बैठे यात्रियों की सुरक्षा तथा पैदल चलने वालों और अन्य असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा से संबंधित मानक शामिल हैं।

सामने से तिरछी टक्कर के परीक्षण का महत्व इसलिए है कि वास्तविक दुर्घटनाओं में दो वाहन हमेशा सीधे आमने-सामने नहीं टकराते। कई बार वाहन का केवल एक हिस्सा दूसरे वाहन या किसी स्थिर अवरोध से टकराता है। ऐसी परिस्थितियों में टक्कर का प्रभाव वाहन की संरचना पर असमान रूप से पड़ सकता है।

इसी प्रकार पार्श्व टक्कर में वाहन के दरवाजों और यात्रियों के बीच अपेक्षाकृत कम दूरी होने के कारण गंभीर चोट का खतरा रहता है। इसलिए वाहन के किनारों की संरचनात्मक मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा प्रणालियों का प्रभावी होना आवश्यक है।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित मानक भी विशेष महत्व रखते हैं। वाहन के अगले हिस्से की बनावट, बोनट और अन्य बाहरी संरचनाओं का डिजाइन दुर्घटना की स्थिति में पैदल यात्री को लगने वाली चोटों की गंभीरता प्रभावित कर सकता है। ऐसे मानक वाहन निर्माताओं को दुर्घटना के दौरान बाहरी व्यक्तियों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हैं।

भारत के लिए क्यों जरूरी हैं कठोर सुरक्षा मानक?

भारत में सड़क दुर्घटनाएं लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था की गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। तेज रफ्तार, असुरक्षित वाहन संचालन, यातायात नियमों का उल्लंघन, सड़क की खराब स्थिति और आपातकालीन चिकित्सा सहायता में देरी दुर्घटनाओं की गंभीरता बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं।

वाहनों की बेहतर संरचनात्मक सुरक्षा दुर्घटनाओं को रोकने का विकल्प नहीं है, लेकिन दुर्घटना होने पर मृत्यु और गंभीर चोटों की आशंका कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारत में पहले से लागू भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (भारत एनसीएपी) के अंतर्गत कारों की दुर्घटना सुरक्षा का मूल्यांकन किया जाता है। हालांकि, भारत एनसीएपी की सुरक्षा रेटिंग और सरकार द्वारा निर्धारित अनिवार्य वाहन निर्माण मानक अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। नई अनिवार्य आवश्यकताएं वाहन निर्माताओं के लिए न्यूनतम सुरक्षा स्तर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

 क्या कारों की कीमतें बढ़ेंगी?

नए सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए वाहन निर्माताओं को कुछ मॉडलों के डिजाइन, परीक्षण और उपकरणों में बदलाव करने पड़ सकते हैं। इससे उत्पादन लागत प्रभावित होने की संभावना है। विशेष रूप से कम कीमत वाली कारों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपकरणों और संरचनात्मक बदलावों की लागत महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, सरकार की अधिसूचना और उपलब्ध समाचार में इन बदलावों से कारों की कीमतों में संभावित वृद्धि का कोई निश्चित अनुमान नहीं दिया गया है। इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि कारें कितनी महंगी होंगी।

वाहन उद्योग के लिए चुनौती सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के साथ कारों को आम उपभोक्ता की पहुंच में बनाए रखने की भी होगी।

पहाड़ी सड़कों के लिए भी महत्वपूर्ण पहल

उत्तराखंड और अन्य हिमालयी राज्यों के संदर्भ में भी वाहन सुरक्षा मानकों का विशेष महत्व है। संकरी पर्वतीय सड़कों, तीखे मोड़ों, ढलानों और सीमित दृश्यता वाले मार्गों पर वाहन दुर्घटनाओं की प्रकृति मैदानी क्षेत्रों से भिन्न हो सकती है।

ऐसे क्षेत्रों में वाहन की संरचनात्मक मजबूती, यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना के बाद आग लगने के जोखिम को कम करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, नए मानक विशेष रूप से पर्वतीय दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं और न ही ये पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षित ड्राइविंग, सड़क रखरखाव तथा प्रभावी आपातकालीन बचाव व्यवस्था की आवश्यकता को कम करते हैं।

सुरक्षा के साथ जवाबदेही का नया दौर

नए मानकों का महत्व केवल वाहन निर्माण तकनीक तक सीमित नहीं है। दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों का व्यवस्थित विश्लेषण भविष्य में सड़क सुरक्षा नीति को अधिक वैज्ञानिक आधार प्रदान कर सकता है। इससे वाहन निर्माताओं को डिजाइन संबंधी कमजोरियों की पहचान करने और नियामक संस्थाओं को सुरक्षा सुधारों की प्रभावशीलता समझने में सहायता मिल सकती है।

लेकिन इस दिशा में वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए मानकों के अनुरूप परीक्षण कितने विश्वसनीय होते हैं, वाहन निर्माता उनका कितनी गंभीरता से पालन करते हैं और सरकार अनुपालन की निगरानी किस प्रकार करती है।

केंद्र सरकार के नए प्रावधान इस बात का संकेत हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में अब वाहन की कीमत, माइलेज और सुविधाओं के साथ दुर्घटना सुरक्षा को भी अधिक महत्व दिया जा रहा है।

 

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