युवा संगम से मजबूत होंगे उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक संबंध
गढ़वाल विश्वविद्यालय में पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधिमंडल का स्वागत, दोनों राज्यों की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत से परिचित होंगे युवा

श्रीनगर (गढ़वाल), 27 अक्टूबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के अंतर्गत युवा संगम के सातवें चरण में पश्चिम बंगाल से आए युवा प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित शैक्षणिक गतिविधि केंद्र में आयोजित स्वागत एवं संवाद कार्यक्रम में दोनों राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, शैक्षणिक परंपराओं और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुआ। पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों का तिलक लगाकर और पुष्पमालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। समारोह में श्रीनगर नगर निगम की महापौर आरती भंडारी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. नारायण सिंह पंवार ने की। अतिथियों ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को स्मृति चिह्न और आवश्यक सामग्री भेंट की।
महापौर आरती भंडारी ने कहा कि युवा संगम देश की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पश्चिम बंगाल के युवाओं को देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों के बीच भाईचारा बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यवाहक कुलपति प्रो. नारायण सिंह पंवार ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय युवाओं में राष्ट्रीय चेतना तथा व्यापक दृष्टिकोण विकसित करता है। विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान आपसी समझ बढ़ाने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि युवा संगम उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करने की महत्वपूर्ण पहल है।
युवा संगम के राज्य नोडल अधिकारी प्रो. महावीर सिंह नेगी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इससे पहले उत्तराखंड के युवा प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत की जानकारी प्राप्त की थी। अब पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों को उत्तराखंड के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों, तकनीकी प्रतिष्ठानों और पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा संगम केवल भ्रमण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों की ज्ञान-परंपराओं और अनुभवों को साझा करने का अवसर भी है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी ने कहा कि युवा संगम देश की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। प्रतिनिधियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। प्रो. मोहन सिंह पंवार ने कहा कि उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विविधता युवाओं को एक-दूसरे के सामाजिक परिवेश को समझने का अवसर प्रदान करेगी।
स्वागत समारोह के बाद पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के संग्रहालय का भ्रमण किया। इस दौरान युवाओं ने गढ़वाल की प्राचीन कला, भूगर्भीय अवशेषों, ऐतिहासिक धरोहरों और लोक-संस्कृति से संबंधित प्रदर्शित सामग्री का अवलोकन किया तथा क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल से आए संकाय सदस्यों में डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट, डॉ. सुवर्णा त्रिवेदी, डॉ. अंबुपति मणि कल्याणी, डॉ. एकता भारती और डॉ. सुधीर कुमार शामिल रहे। विश्वविद्यालय की आयोजन समिति की ओर से सहायक नोडल अधिकारी डॉ. कौशल कुमार, समन्वयक डॉ. नरेश कुमार, डॉ. रुक्मणी, डॉ. अनु राही, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. हिमशिखा गोसाई, डॉ. विजयकांत पुरोहित, डॉ. आशुतोष और डॉ. सर्वेश उनियाल सहित अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल के आवागमन और सुरक्षा के लिए पुलिस ने आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

