भराड़ीसैंण में सदन के भीतर अनुपूरक बजट, बाहर सड़कों पर संग्राम
राजनीतिक दलों और जनसंगठनों का जोरदार प्रदर्शन, कई जगह अवरोधक तोड़े, पानी की बौछारों से रोका

— महिपाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गैरसैंण (भराड़ीसैंण), 27 अक्टूबर। उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण में मंगलवार से शुरू हुए सत्र के पहले दिन सदन के भीतर सरकार अनुपूरक बजट और विधायी कामकाज में व्यस्त रही, जबकि बाहर सड़कों पर राजनीतिक दलों और जनसंगठनों के प्रदर्शन से संग्राम जैसी स्थिति बनी रही। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़कर विधानसभा तक पहुंचने का प्रयास किया। कई स्थानों पर अवरोधक तोड़े गए और पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक हुई। आखिरकार पुलिस ने पानी की तेज बौछारों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब दस हजार तक आंकी गई।

कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सुराज सेवा दल, ग्राम प्रधानों और विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को कई स्थानों पर चुनौती दी। सिमली से ही पुलिस ने यातायात नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अवरोधक लगाए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पहला अवरोधक तोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बना लिया। इसके बाद जंगलचट्टी से दिवालीखाल तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी रही।

जंगलचट्टी से दिवालीखाल तक जोरदार प्रदर्शन
गैरसैंण के निकट जंगलचट्टी में विभिन्न राजनीतिक दलों और जनसंगठनों के हजारों कार्यकर्ता एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के कारण सड़क पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी दिवालीखाल की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारियों ने कई सुरक्षा अवरोधक तोड़ दिए और विधानसभा की ओर बढ़ते रहे।
बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने छह प्रमुख अवरोधक पार कर लिए थे। हालांकि पुलिस ने विधानसभा की ओर जाने वाले मार्ग पर कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों का एक समूह इन बाधाओं को पार करते हुए विधानसभा परिसर के निकट तक पहुंच गया। करीब दो सौ प्रदर्शनकारी अंतिम सुरक्षा घेरे के पास पहुंचने में सफल रहे। यहां पुलिस ने पानी की तेज बौछारें छोड़कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी जारी रही।
हरक सिंह रावत समेत कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिवालीखाल में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत तथा उनके कुछ सहयोगियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद प्रदर्शन की तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता डटे रहे। वे लगातार अवरोधकों को पार कर विधानसभा की ओर बढ़ने का प्रयास करते रहे।
इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल के एक कार्यकर्ता के घायल होने की भी सूचना मिली। बताया गया कि अवरोधक तोड़ने के प्रयास में उसके पेट पर चोट आई। हालांकि उसकी चोट की गंभीरता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्ग पर पुलिस की घेराबंदी से बचने के लिए जंगल के रास्तों से विधानसभा के निकट पहुंचने का भी प्रयास किया।
जंगलचट्टी में जहां प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब दस हजार बताई जा रही थी, वहीं विधानसभा के निकट पहुंचते-पहुंचते उनकी संख्या कुछ सौ रह गई। इससे पुलिस को अंतिम सुरक्षा घेरे पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत आसानी
भारी जाम में फंसे विधायक और अधिकारी
विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के कारण सिमली से ही यातायात प्रभावित होने लगा था। जंगलचट्टी और दिवालीखाल के बीच कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति यह रही कि कई विधायक और सरकारी अधिकारी भी समय पर विधानसभा नहीं पहुंच सके।
पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं ऋषिकेश के विधायक प्रेमचंद अग्रवाल भी जंगलचट्टी में यातायात जाम में फंसे रहे। वे दोपहर करीब दो बजे विधानसभा पहुंच पाए। बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला भी देर से पहुंचे। वे हरक सिंह रावत के साथ प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे थे। जाम के कारण विधानसभा जाने वाले अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों और अन्य यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी।
पुलिस और प्रशासन ने विधानसभा सत्र को देखते हुए यातायात संचालन तथा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या के सामने कई स्थानों पर ये व्यवस्थाएं प्रभावी नहीं रह सकीं। एक के बाद एक अवरोधक टूटने और सड़कों पर भीड़ बढ़ने से पुलिस को बार-बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
मंगलवार के घटनाक्रम ने विधानसभा की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पहले दिन के अनुभव को देखते हुए पुलिस को बुधवार के लिए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है, ताकि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के साथ आम लोगों की आवाजाही भी सुचारु रखी जा सके।

