अपने देहरादून को जानिये ! भारत छोड़ो आन्दोलन के स्वतन्त्रता-सेनानी नीलाम्बर पन्त
-अनंत आकाश –
भारत छोड़ो आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले देहरादून के स्वतन्त्रता सेनानी नीलाम्बर पन्त जी के शताब्दी बर्ष पर कल स्वतंत्रता सेनानियों , राजनेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जीएमएस रोड़ स्थिति कुमाऊं भवन सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी । कार्यक्रम उनके परिजनों द्वारा आयोजित किया गया । जिसमें शहीदे आजम भगतसिंह के पौत्र एवं देश के जाने माने स्वतंत्रता सैनानियों ने हिस्सेदारी की ।
9 अगस्त 1942 भारत छोड़ो आंदोलन का असर देहरादून में व्यापक था । इस आन्दोलन में झण्डा मौहल्ला निवासी नीलाम्बर पन्त आदि अनेकों स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों की महत्वपूर्ण भूमिका आज भी लोगों की जुवां पर है । आजादी के बाद श्री इन्देश चरण दास देहरादून नगरपालिका के चैयरमैन के साथ वह नगरपालिका के सदस्य चुने गये ।स्वाभिमानी नीलाम्बर पन्तजी ने स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद पेन्शन एवं कोई सरकारी सुविधा नहीं ली । न हीं उनकी पत्नी श्रीमती तारादेवी ने इसके लिये ही कभी आवेदन किया। वह आजीवन अपने पति के सिध्दान्तों के प्रति प्रतिबध्द रहीं।

झण्डा मौहल्ला निवासी पन्तजी का जन्म 23 सितम्बर 1923को गौरीदत्त पन्तजी के घर में हुआ जिनका उनका मूल घर ग्राम स्युगरा विकासखण्ड हवालबाग अल्मोड़ा उत्तराखण्ड है । उनके दादा श्री गोपाल दत्त पन्तजी 1882 में दरबार साहिब कै महन्त प्रयाग दास जी के अनुरोध पर देहरादून दरबार साहिब में नीजि चिकित्सक के साथ ही सीएनआई में संस्कृत अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दी। पन्तजी के पिता देहरादून के एफ आरआई में कार्यरत थे। वह अपने जमाने क लाहौर से स्नातक थ।
सीएनआई पल्टन बजार के छात्र स्वाभिमानी पन्तजी के दिलो दिमाग में बचपन से देशभक्ति कूट कूटकर भरी हुई थी । जिस कारण उन्हे अनेकों बार स्कूल में सजा मिली , किन्तु उन्होंने मुड़कर कभी पीछे नहीं देखा। उन्होने इलाहबाद से स्नातक की डिग्री हासिल की । उनका निधन 1996 में हुआ । खुले दिमाग के होने के नाते सभी विचारधारा के लोग उनके इर्दगिर्द होते थे । आज भी पन्तजी का भरा पूरा परिवार झण्डा मौहल्ले के पैतृक निवास पर रह रहा ।
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अनन्त आकाश
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