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वैज्ञानिकों ने विकसित किया बैटरियों की उम्र बढ़ाने वाला नया एडिटिव

हाइड्रोजन उत्क्रमण अभिक्रिया (एचईआर) को दबाने में जिंक एनोड की सतह पर बीडीआईएम एडिटिव के प्रभाव की तुलना।

 

Aqueous zinc ion batteries (AZIBs) are emerging as a low-cost, safe, and sustainable alternatives to lithium-ion batteries. However, their commercialization is hindered by zinc dendrite growth, hydrogen evolution reaction (HER), corrosion, and poor cycling stability. This study addresses these critical challenges through interface engineering rather than expensive material redesign. The work provides a practical and scalable strategy for extending battery life while maintaining safety and low cost, which is essential for large-scale renewable energy storage applications.

 

-By- Jyoti Rawat

हाल ही में विकसित एक नया इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव सुरक्षित, अधिक टिकाऊ और किफायती रिचार्जेबल जिंक बैटरियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यह नवाचार बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जलीय जिंक-आयन बैटरियां (AZIBs) कम लागत, उच्च सुरक्षा और पर्यावरणीय अनुकूलता के कारण लिथियम-आयन बैटरियों के संभावित विकल्प के रूप में उभर रही हैं। हालांकि, जिंक डेंड्राइट का निर्माण, हाइड्रोजन उत्क्रमण अभिक्रिया (HER), जंग तथा कमजोर साइकलिंग स्थिरता जैसी चुनौतियां इनके व्यावसायीकरण में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। वर्तमान अध्ययन महंगे सामग्री-पुनःडिजाइन के बजाय इंटरफेस अभियांत्रिकी के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने 1,3-बिस (1,3-डाइकार्बोक्सीप्रोपाइल)-1H-इमिडाजोल-3-आयम क्लोराइड (BDIM) नामक एक नया इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव विकसित किया है। यह यौगिक जिंक धातु की सतह पर चयनात्मक रूप से अवशोषित होकर जलीय जिंक-आयन बैटरियों की इनर हेल्महोल्ट्ज़ प्लेन (IHP) को नियंत्रित करता है, जहां वास्तविक इलेक्ट्रोकेमिकल अभिक्रियाएं घटित होती हैं।

शोधकर्ताओं ने ग्लूटामिक एसिड, सोडियम हाइड्रॉक्साइड और पानी के मिश्रण में ग्लाइऑक्सल, फॉर्मल्डिहाइड तथा एसीटिक एसिड मिलाकर नियंत्रित नाइट्रोजन वातावरण में 70 डिग्री सेल्सियस पर 24 घंटे तक अभिक्रिया कराई। इसके बाद निष्कर्षण और लायोफिलाइजेशन की प्रक्रिया से BDIM का क्रिस्टलीय पाउडर प्राप्त किया गया।

BDIM में उपस्थित ऑक्सीजन और नाइट्रोजन डोनर साइट्स जिंक धातु के साथ मजबूत अंतःक्रिया करती हैं। बैटरी संचालन के दौरान यह एडिटिव नकारात्मक रूप से ध्रुवीकृत जिंक सतह पर प्राथमिकता से अवशोषित होकर IHP में स्थान ग्रहण करता है। इससे इंटरफेस से जल अणु हट जाते हैं और पानी-जनित अवांछित अभिक्रियाएं, जैसे हाइड्रोजन उत्क्रमण और जंग, काफी हद तक कम हो जाती हैं। परिणामस्वरूप डेंड्राइट निर्माण भी प्रभावी रूप से नियंत्रित होता है और बैटरी का प्रदर्शन बेहतर होता है।

जिंक निक्षेपण की प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में निर्मित अल्ट्रामाइक्रोइलेक्ट्रोड (UME) को फास्ट-स्कैन साइक्लिक वोल्टैमेट्री (FSCV) तकनीक के साथ संयोजित किया। लगभग 50 माइक्रोमीटर से छोटे आकार वाला UME उच्च स्कैन दरों पर भी सटीक मापन की सुविधा देता है। इस तकनीक की सहायता से शोधकर्ताओं ने इंटरफेशियल चार्ज-ट्रांसफर और मास-ट्रांसफर काइनेटिक्स का प्रत्यक्ष अध्ययन किया तथा जिंक निक्षेपण तंत्र के बारे में नई जानकारियां प्राप्त कीं।

INST मोहाली के वैज्ञानिक डॉ. रामेंद्र सुंदर डे के नेतृत्व में किया गया यह शोध प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ACS Electrochemistry में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग जलीय जिंक-आयन बैटरियों, ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण तथा बैटरी सुरक्षा और आयु बढ़ाने वाली तकनीकों में किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक अधिक सुरक्षित, लंबी अवधि तक चलने वाली और कम लागत वाली रिचार्जेबल बैटरियों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उन्नत जिंक-आयन बैटरियों का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण, बैकअप पावर सिस्टम और ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा अवसंरचना में किया जा सकेगा। बैटरी की आयु बढ़ने और प्रदर्शन में गिरावट कम होने से रखरखाव लागत घटेगी तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों की विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी।

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