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तमक नाले में सेना ने संभाला मोर्चा, हवलदार पंकज की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी

During incessant rainfall, Havildar Pankaj, deployed with 123 Road Construction Company at
Suraithota, accompanied his Officer Commanding to conduct reconnaissance of the bridge
and assess the situation. As the flash flood struck, he displayed exceptional courage and
presence of mind, guiding civilians and vehicles away from the danger area and directing
approaching vehicles to halt at a safe distance. While doing so, he was swept away by the
powerful current and remains missing.

“लोगों को बचाते-बचाते बाढ़ में बहा सेना का जवान, तलाश जारी”

ज्योतिर्मठ, 11 अगस्त (कपरूवाण )। मलारी-नीति राष्ट्रीय राजमार्ग पर तमक नाले के पास सोमवार शाम अचानक आई बाढ़ में तमक धारा पर बना करीब 120 फीट लंबा मॉड्यूलर बेली ब्रिज बह गया। तेज बहाव की चपेट में आसपास खड़े वाहन भी बह गए। इस दौरान लोगों और वाहनों को सुरक्षित स्थान पर हटाने का प्रयास कर रहे भारतीय सेना के हवलदार पंकज भी पानी के तेज बहाव में बह गए। उनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। सेना ने उन्हें खोजने के लिए व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार 10 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे ऊपरी क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद तमक नाले में अचानक पानी का प्रवाह बढ़ गया। देखते ही देखते पानी ने विकराल रूप धारण कर लिया और तमक धारा पर बना मॉड्यूलर बेली ब्रिज इसकी चपेट में आकर बह गया। पुल के बहने से मलारी, गमशाली, जुम्मा, नीति सहित एक दर्जन से अधिक सीमावर्ती गांवों का सड़क संपर्क कुछ समय के लिए बाधित हो गया।

घटना के समय सुराईथोता में 123 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ तैनात हवलदार पंकज अपने कमांडिंग ऑफिसर के साथ पुल और आसपास की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। अचानक बाढ़ आने पर उन्होंने तत्काल सूझबूझ का परिचय देते हुए आसपास मौजूद लोगों और वाहनों को खतरे वाले क्षेत्र से हटाया। उन्होंने सामने से आ रहे वाहनों को भी सुरक्षित दूरी पर रुकने का संकेत दिया। इसी दौरान तेज बहाव की चपेट में आने से वह स्वयं पानी में बह गए और लापता हो गए।

हवलदार पंकज की बहादुरी ने एक बार फिर यह दिखाया कि संकट की घड़ी में सेना के जवान अपनी सुरक्षा से पहले आम नागरिकों की जान की चिंता करते हैं। लोगों और वाहनों को सुरक्षित हटाने के दौरान उनका स्वयं बाढ़ की चपेट में आ जाना उनके कर्तव्य और साहस का उदाहरण है।

घटना की सूचना मिलते ही आइबेक्स ब्रिगेड के तहत मलारी और ज्योतिर्मठ से भारतीय सेना की मानवतावादी सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) टीमें विशेष खोज एवं बचाव दल और चिकित्सा कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गईं। सेना ने सिविल प्रशासन और अन्य बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय कर हवलदार पंकज की तलाश के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

10 अगस्त की देर शाम तक तलाशी अभियान चलाया गया। 11 अगस्त की सुबह मौसम और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद अतिरिक्त जवानों, विशेषज्ञ टीमों और आवश्यक उपकरणों के साथ अभियान फिर शुरू किया गया। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र, तेज पानी का बहाव और लगातार खराब मौसम तलाशी अभियान में चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद सेना की टीमें लगातार संभावित स्थानों पर खोजबीन कर रही हैं।

सेना की ओर से कहा गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सहायता के लिए सभी आवश्यक संसाधन लगाए गए हैं। साथ ही हवलदार पंकज को खोजने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। सेना का यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक जवान का पता लगाने के लिए उपलब्ध सभी संभावनाओं को तलाश नहीं लिया जाता।

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