यूपी में 95 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य हासिल करने का मंत्र दे गए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मुरादाबाद, 16 जुलाई। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) में आयोजित बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) एवं सुपरवाइजरों के संवाद कार्यक्रम में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में 95 प्रतिशत से अधिक मतदान का लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 93.7 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड बन चुका है, अब इसे पीछे छोड़ने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के बीएलओ पर है।
करीब दो घंटे तक चले संवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 60 करोड़ मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा हो चुका है, जबकि शेष 35 करोड़ मतदाताओं का कार्य अभी बाकी है। उन्होंने बीएलओ को चुनाव आयोग का “शेर” बताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया की सफलता और अधिक मतदान सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि थ्री-लेयर कॉन्करेंट ऑडिट चुनाव आयोग की पारदर्शिता की मजबूत कड़ी है और इसी कारण मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) सबसे विश्वसनीय दस्तावेजों में से एक माना जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली की सराहना करती है। भारत में मतदान वैकल्पिक है, फिर भी अनेक ऐसे देशों की तुलना में यहां मतदान प्रतिशत अधिक रहता है, जहां मतदान अनिवार्य है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बीएलओ का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह के “नेरेटिव” से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि तथ्यों के आधार पर उनका सामना करना चाहिए। संवाद के दौरान उन्होंने महाभारत, फुटबॉल टीम और द सीक्रेट पुस्तक के उदाहरण देते हुए टीमवर्क, नेतृत्व और सकारात्मक सोच का महत्व भी समझाया। प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने बीएलओ के सवालों के गंभीरता से उत्तर दिए और कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा, मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, डीआईजी मुनिराज जी, जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया, एसएसपी सतपाल अंतिल, नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। टीएमयू पहुंचने पर मुख्य चुनाव आयुक्त को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने उनका स्वागत किया।
ओडीओपी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने की इच्छा
मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत मुरादाबाद का पीतल निर्मित अशोक स्तंभ, अमरोहा की ढोलक, रामपुर का वायलिन तथा मेरठ के हस्तशिल्प उत्पाद भेंट किए गए। इस दौरान ज्ञानेश कुमार ने जिलाधिकारी से कहा कि आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को मुरादाबाद के ओडीओपी उत्पाद उपहार स्वरूप देने की योजना बनाई जाए। उल्लेखनीय है कि वे वर्तमान में इंटरनेशनल आईडीईए के अध्यक्ष भी हैं।
अमेरिका ने भी दिखाई एसआईआर प्रक्रिया में रुचि
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि अमेरिका भी भारत की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया जैसी व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझा था। हालांकि, वहां इस संबंध में प्रस्तावित व्यवस्था को अभी सीनेट की मंजूरी नहीं मिली है।
एसआईआर में मैपिंग सबसे महत्वपूर्ण चरण
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में मैपिंग सबसे महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने मतदाता पंजीकरण, मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख किया। साथ ही फॉर्म-17सी (भाग-1 एवं भाग-2), आधार अधिनियम की धारा 9 एवं 13 तथा भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के विभिन्न प्रावधानों की भी जानकारी दी।
अनिवार्य मतदान वाले देशों से भी बेहतर भारत
मुख्य चुनाव आयुक्त ने विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशत की तुलना करते हुए कहा कि भारत में स्वैच्छिक मतदान होने के बावजूद मतदान प्रतिशत कई अनिवार्य मतदान वाले देशों से अधिक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मैक्सिको में मतदान अनिवार्य होने के बावजूद लगभग 61 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि केरल में 79.5 प्रतिशत और तमिलनाडु में 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। असम में 86.66 प्रतिशत, पुडुचेरी में 91.19 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 93.7 प्रतिशत मतदान हुआ, जो अब तक का एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड है।
ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय
उन्होंने कहा कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय है। यह किसी इंटरनेट, वाई-फाई या अन्य नेटवर्क से जुड़ी नहीं होती, इसलिए इसमें छेड़छाड़ संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 46 मामलों में इसकी वैधता बरकरार रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ईवीएम का पहला प्रयोग वर्ष 1996 में केरल में किया गया था।
युवाओं में मतदान जागरूकता बढ़ाने की जिम्मेदारी टीएमयू को
युवाओं में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के विषय पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने टीएमयू से इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब को और अधिक सक्रिय बनाने का आग्रह किया। इस पर विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एम.पी. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में क्लब पहले से संचालित है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने सुझाव दिया कि विभागवार विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा निर्वाचन अधिकारियों और बीएलओ के माध्यम से उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे अन्य विद्यार्थियों को भी मतदान के प्रति जागरूक कर सकें।
