हेलंग प्रकरण पर तथ्यान्वेशी दल का खुलासा – पुलिस और प्रशासन से मिलीभगत कर घसियारियां के अधिकारों का हनन और उत्पीड़न

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–उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो–

देहरादूनए 10   सितम्बर । उत्तराखण्ड क्रांतिदल (उक्रांद) की फैक्ट फाइण्डिंग टीम ने हेलंग घसियारी प्रकरण में प्रशासन से मिलभगत से स्थानीय निवासियों के परम्परागत हकहुकूकों तथा मानवाधिकारों का हनन, हाइकोर्ट के आदेश की अवहेलना पाई है। हाइकोर्ट के अधिवक्ता डी.के. जोशी एवं वरिष्ठ पत्रकार रमेश पाण्डे ’कृषक’ की इस टीम ने अपनी रिपोर्ट उक्रांद को सौंप दी है जिसमें इस प्रकरण की न्यायिक जांच के साथ ही दोषियों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही करने तथा ग्रामीणों की घास काटने की जगह की पूर्व स्थिति बहाल करने की शिफारिश की गयी है।

5 जुलाई 2022 को दिन मे हेलन गांव (जोशीमठ तहसील जिला चमोली )की ग्रामीण घसियारी महिलाओं के साथ तहसील प्रशासन व  पुलिस की ज़्यादती का एक वायरल वीडियो ने पूरे प्रदेश के ग्रामीण अंचलो में जल जंगल जमीन के संरक्षण मे लगे संवेदनशील संगठनों एवं  आम जनता आक्रोषित कर दिया था।

डीके जोशी (अधिवक्ता ) अध्यक्ष विधिक प्रकोष्ठ उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा तैयार 43 पृष्ठ की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार तथ्यों की तह मे जाकर बहुत सारे चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं जिन से यही साबित हो रहा है कि प्रशासन व पुलिस की जोर जबरदस्ती से ग्रामीण जनता के अधिकारों पर सभी नियमों कानूनों को ताक मे रखकर पूजीपतियों के लाभ हेतु यह सब किया गया है।

 

फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य डीके जोशी द्वारा लीला देवी के पुत्र आशीष भंडारी से की गयी बातचीत से ये तथ्य सामने आया कि  कैद ग्रामीण महिलाओं को अभिरक्षा से छुड़ाने हेतु आशीष को जोशीमठ पुलिस थाना बुलाया गया जहाँ उन्हें भी 6 घंटे तक इंतज़ार मे बैठाया गया और अंत मे उत्तरखंड पुलिस एक्ट 2007 के अंतर्गत डपिंग का विरोध कर रही महिलाओं को धारा 81(1) (क) मे लिखित अपराधों का दोषी मानते हुए उन्हें धारा 83(2) मे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए  250 रूपये जमा करवाये और अपराध का समन किये जाने संबधित चालान की पर्ची आशीष को थमा दी गयी. और उसके बाद ही कैद निरुद्ध किये गये महिलाओं व डेढ़ साल की बच्ची सभी को छोड़ा गयाA

रिपोर्ट के मुख्य अंश

 

(1). हेलंग गाँव की ग्रामीणों द्वारा बार बार बिनती करने और लिखित प्रत्यावेदन देने के बावजूद भी तहसील प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तथा सचिव जलवायु परिवर्तन उत्तराखंड शासन तक किसी ने नहीं सुनीA

(2). वन विभाग तहसील प्रशासन जिला प्रशासन के द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा झारखण्ड सरकार बनाम पाकुर जागरण मंच (सिविल अपील संख्या 436/2011 निर्णय दिनांक 12.01.2011)मे दिए गये निर्देशों के उलंघन मे TDDC इंडिया कम्पनी को हेलंग गाँव की वन पंचायत की जमीन को टनल का मलुवा जमा करने की अनुमति दी गयीA

(3). सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन हेतु उत्तराखंड सरकार द्वारा शासनादेश दिनांक 27 जनवरी 2014 जिसके द्वारा प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी को निर्देश दिए गये थे कि गौचर पनघट आदि ग्रामीण उपयोग की भूमि को किसी अन्य प्रयोग हेतु न आवंटित न की जाय का भी घोर उलंघन हेलंग घटना के संदर्भ मे जिला प्रशासन द्वारा किया गया हैA

(4).ग्राम सभा की उपयोग की भूमि पर प्राथमिकता संबंधित पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासननादेश संख्या 285/16(1)/73-राजस्व -I दिनांक 9 मई 1984 (उत्तराखंड मे प्रभावी ) का घोर उलंघन राजस्व विभाग द्वारा किया गया हैA

(5). दिनांक 15 जुलाई 2022 को मंदोदरी देवी (50वर्ष )

 

संगीता देवी (22 वर्ष ), लीला देवी (42 वर्ष ), विपिन भंडारी (22 वर्ष ) छोटी बच्ची ‘दिया'(डेढ़ वर्ष ) को पुलिस द्वारा बिना किसी आदेश या समन के गाड़ी के अंदर घंटो तक बैठाये रखा (भूखे प्यासे कैद करके रखा) .

(6). भारतीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों द्वारा अपनी कार्य सीमा से बाहर जाकर हेलंग गाँव मे उपरोक्त महिलाओं के साथ छीना झपटी की और  जानवरो के लिए जंगल से लाये जा रहे घास को उनके पीठ भी जोर जबरदस्ती छीनने की कोसिस की.

(7). महिलाओं युवाओ व बच्चों को तब तक पुलिस अपनी अभिरक्षा मे कैद किये रखी जब तक THDC इंडिया कंपनी द्वारा घास व पेड़ों भरे जमीन (भीड़े ) को टनल के 18-20 डम्पर ट्रकों से पाट न दिया गया.

(8). मंदोदरी के भतीजे व लीला देवी के बेटे आशीष भंडारी (25 वर्ष ) को भी जोशीमठ थाने मे 6 घंटे तक बैठाये रखा और अंत मे गैर कानूनी रूप से 250 रूपये का चालान आशीष से भरवा कर पुलिस द्वारा सभी निरुद्ध ग्रामीणों को छोड़ दिया गयाA

 

(9). पुलिस द्वारा अपनी शक्तियों का दुरूपयोग करके उत्तराखंड पुलिस एक्ट 2007 के धारा 81(1) (क ) की आढ़ मे महिलाओ व बच्चों के साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा डीके बासु बनाम बंगाल राज्य मे दिए गए दिशा निर्देशों का घोर उलंघन किया गयाA

(10). जिला प्रशासन तहसील प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन की मिली भगत से ग्रामीणों के हक़ हकुक पर गैर कानूनी व मनमाने तरीके से प्रहार किया गयाA

 

(11).उपरोक्त घटना के संबंधित जिम्मेदार अधिकारीयों ने अपने पद और गरिमा का दुरूपयोग किया है

 

कमेटी की अनुशंसा

 

(क)उपरोक्त लिखित गंभीर आरोपों की जाँच  रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता मे गठित उच्च स्तरीय  जांच कमेटी द्वारा की जायA

(ख ) जाँच मे दोषी पाये गये सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाय तथा दोषी अधिकारियो के विरुद्ध डंडा त्मक व अनुशासनात्मक कार्यवाही सेवा से भर्खास्त करने की की जायA

(ग ) पुलिस प्रशासन व तहसील प्रशासन द्वारा प्रताड़ित महिलाओं बच्चों को सरकार व THDC इंडिया कम्पनी द्वारा मुआवजा दिया जायA

(घ ) ग्राम सभा हेलंग की वन पंचायत की भूमि  खसरा संख्या 445 पर गिराया गया मलुवा हटाया जाय. ताकि ग्रामीणों के अपने मवेसियों के चारे की व्यवस्था बहाल हो सकेA

 

 

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