विश्व धरोहर रम्माण का मुख्य समारोह 26 अप्रैल को, सलूड़-डुंग्रा में तैयारियां तेज
ज्योतिर्मठ, 14 अप्रैल (कपरुवाण)। सीमांत पैनखंडा क्षेत्र के ज्योतिर्मठ ब्लॉक अंतर्गत सलूड़-डुंग्रा गांव में आयोजित होने वाले विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का मुख्य समारोह इस वर्ष 26 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।
पौराणिक परंपरा के अनुसार मंगलवार को बैसाखी पर्व के शुभ अवसर पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में सलूड़-डुंग्रा महापंचायत, रम्माण आयोजन समिति के पदाधिकारियों, पश्वा-पुजारियों तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचायत पुरोहित द्वारा पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की घोषणा की गई।
इससे पूर्व भूमि क्षेत्रपाल देवता अपने निशान और कण्डियों के साथ वर्षभर की पूजा प्राप्त करने के उपरांत गाजे-बाजे के साथ ग्राम डुंग्रा निवासी दिलवर सिंह कुंवर के आवास से दोपहर लगभग 11 बजे अपने मूल मंदिर चोपता पहुंचे। देवता की विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक होता है। परिवारजन वर्षभर की पूजा के उपरांत अश्रुपूरित नेत्रों से अपने इष्ट देवता को विदा करते हैं।
मंदिर में पहुंचने के बाद भूमि क्षेत्रपाल देवता का पारंपरिक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के उपरांत गांव के युवाओं ने देवता के मुख्य निशान को एक-एक कर मंदिर चौक में विशेष ताल पर नृत्य कराया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का वातावरण बन गया।
इस दौरान ग्रामीणों द्वारा मंदिर परिसर की साफ-सफाई की गई। अंत में पंचायत द्वारा धारियों एवं कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई तथा पंचायत पुरोहित ने मुख्य समारोह रम्माण की तिथि की औपचारिक घोषणा की। आगामी 12 दिनों में परंपरागत पद्धति के अनुसार क्षेत्र के पांच अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में प्रातःकाल धार्मिक अनुष्ठान, भूमि क्षेत्रपाल देवता का मिलन, क्षेत्र भ्रमण तथा नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही विधि-विधानपूर्वक रात्रिकालीन मुखौटा नृत्य कार्यक्रम भी संपन्न होंगे।
तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में अस्सी गाण्यां भरत सिंह पंवार, गाण्या रणबीर सिंह चौहान, कैंसा लक्ष्मी प्रसाद, रघुबीर सिंह, पंकज बैंजवाल, प्रदीप, विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण सलूड़-डुंग्रा के संयोजक डॉ. कुशल भण्डारी, अध्यक्ष शरत सिंह बंगारी, सचिव विकेश कुंवर, कोषाध्यक्ष रघुबीर सिंह, ग्राम प्रधान सलूड़ एवं डुंग्रा, महिला मंगल दल तथा युवक मंगल दल सलूड़-डुंग्रा के सदस्य, समस्त पश्वा एवं क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।
पैनखंडा जोशीमठ रम्माण को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संयोजक डॉ. कुशल भण्डारी के अनुसार, रम्माण एक पौराणिक धार्मिक अनुष्ठान है। मान्यता है कि हजारों वर्ष पूर्व से यह कार्यक्रम क्षेत्रवासियों द्वारा अपने क्षेत्रीय इष्ट देवता की पूजा-अर्चना के साथ-साथ उनके मनोरंजन का भी प्रमुख साधन रहा है। भूमि क्षेत्रपाल देवता के प्रति यह अगाध आस्था पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी जीवित है।
उन्होंने बताया कि आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य के देवभूमि ज्योतिर्मठ एवं बद्रीपुरी प्रवास के समय इस अनुष्ठान को विस्तार मिला। समय-समय पर क्षेत्र में घटित ऐतिहासिक घटनाओं एवं प्रसंगों को जोड़कर पूर्वजों ने इस आयोजन को मेले के वर्तमान वृहद स्वरूप में विकसित किया। रम्माण विषय पर शोध करने वाले विद्वानों का भी मानना है कि इस परंपरा की शुरुआत हजारों वर्ष पूर्व हो चुकी थी।
डॉ. भण्डारी ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 से दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा रम्माण पर शोध कार्य किया जा रहा है। शोध परियोजना से जुड़े शोधकर्ता एवं शोध सहायक दिल्ली से सलूड़-डुंग्रा गांव पहुंच चुके हैं। वहीं, पर्यटन विभाग उत्तराखंड की भी इस वर्ष रम्माण आयोजन में विशेष भूमिका रहेगी। विभाग द्वारा अन्य सहयोग के साथ-साथ रम्माण का अभिलेखीकरण भी किया जा रहा है।
संयोजक डॉ. कुशल भण्डारी ने बताया कि आयोजन समिति द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी भूषण, राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट तथा क्षेत्रीय विधायक लखपत सिंह बुटोला सहित अनेक जनप्रतिनिधियों को मेले में आमंत्रित किया गया है।
