दुनिया को सबसे ज्यादा आकर्षित करते शहर, देश और धरोहरें
Global tourism rebounded strongly in 2024 with 1.4 billion international trips, contributing roughly $10.9 trillion (about 10% of the world economy) and supporting 357 million jobs. Bangkok led cities in international arrivals (around 32 million), while Paris topped the broader city destination index. France remained the world’s top country destination with nearly 100 million visitors (rising to 102 million in 2025), closely followed by Spain. Attractions such as the Louvre drew nearly 9 million visitors, though open spaces like Times Square are harder to measure. Growing overtourism has prompted new management measures, while travellers increasingly seek authentic, sustainable and “slow” experiences beyond classic landmarks.-Jay S Rawat

BY-JAY SINGH RAWAT
दुनिया घूमने की मनुष्य की चाह अब केवल छुट्टियां बिताने या मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। पर्यटन आज दुनिया की अर्थव्यवस्था, रोजगार, संस्कृति और देशों के बीच संपर्क की एक बड़ी ताकत बन चुका है। वर्ष 2024 में करीब 1.4 अरब अंतरराष्ट्रीय पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं और वैश्विक पर्यटन लगभग महामारी-पूर्व स्तर पर लौट आया।
लेकिन दुनिया में सबसे अधिक देखा जाने वाला स्थान आखिर है कौन? इसका कोई एक उत्तर नहीं है। देशों की तुलना अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन से होती है, शहरों की रैंकिंग अलग-अलग मानकों से तैयार की जाती है और किसी स्मारक या बाजार की लोकप्रियता उसके प्रवेश टिकट अथवा कुल आवाजाही से मापी जा सकती है। इसलिए बैंकॉक, फ्रांस, टाइम्स स्क्वायर और लूव्र की तुलना सीधे नहीं की जा सकती।
विदेशी पर्यटकों का शहर—बैंकॉक
अंतरराष्ट्रीय आगमन के लिहाज से 2024 में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक दुनिया में सबसे आगे रही। यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के अनुसार शहर में करीब 3.2 करोड़ अंतरराष्ट्रीय आगमन दर्ज किए गए। हालांकि समग्र “सिटी डेस्टिनेशन इंडेक्स”, जिसमें पर्यटन ढांचा, आर्थिक प्रदर्शन, सुरक्षा, स्थिरता और आकर्षण जैसे 55 मानक शामिल हैं, उसमें पेरिस पहले स्थान पर रहा।
यही अंतर पर्यटन की रैंकिंग समझने के लिए महत्वपूर्ण है—सबसे ज्यादा विदेशी यात्रियों वाला शहर और समग्र रूप से सर्वोच्च रैंक वाला पर्यटन शहर आवश्यक नहीं कि एक ही हो।
बैंकॉक की लोकप्रियता के पीछे ग्रैंड पैलेस, वाट अरुण और वाट फो जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल तो हैं ही, उसका जीवंत बाजार, खान-पान, रात्रि जीवन और अपेक्षाकृत किफायती आतिथ्य भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में उसकी स्थिति उसे आसपास के देशों की यात्रा का प्रवेश द्वार भी बनाती है।
देशों में फ्रांस का दबदबा
देशों की बात करें तो फ्रांस लंबे समय से दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन केंद्रों में शामिल है। वर्ष 2024 में उसने करीब 10 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 10.2 करोड़ पहुंच गई।
फ्रांस का आकर्षण केवल पेरिस या एफिल टॉवर तक सीमित नहीं है। लूव्र संग्रहालय, वर्साय, फ्रेंच रिवेरा, आल्प्स, लोआर घाटी के महल, ग्रामीण इलाके, समुद्र तट और विश्वप्रसिद्ध खान-पान इसे विविध पर्यटन अनुभव देते हैं।
स्पेन भी तेजी से फ्रांस के करीब पहुंचा है। स्पेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान के अनुसार 2024 में वहां रिकॉर्ड 9.38 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहुंचे, जो 2023 के मुकाबले 10.1 प्रतिशत अधिक थे।
यह भी दिलचस्प है कि पर्यटकों की संख्या में पहला स्थान पाने वाला देश जरूरी नहीं कि पर्यटन से सबसे अधिक कमाई भी करे। पर्यटकों का औसत खर्च, ठहरने की अवधि और पर्यटन का स्वरूप आय को प्रभावित करते हैं।
एक इमारत, संग्रहालय या चौक की लोकप्रियता कैसे मापें?
यहां आंकड़ों को लेकर सबसे अधिक सावधानी जरूरी है। किसी खुले सार्वजनिक स्थान से गुजरने वाले पांच करोड़ लोगों की तुलना किसी टिकट वाले संग्रहालय के 90 लाख दर्शकों से करना उचित नहीं होगा।
न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर दुनिया के सर्वाधिक व्यस्त पर्यटन और मनोरंजन क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन उसकी आवाजाही में पर्यटकों के अलावा स्थानीय निवासी, कर्मचारी और दैनिक यात्री भी शामिल होते हैं। इसी तरह इस्तांबुल का ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार विशाल स्थानीय और पर्यटक आवाजाही वाला क्षेत्र है।
इसके विपरीत संग्रहालयों के आंकड़े अपेक्षाकृत स्पष्ट होते हैं। पेरिस के लूव्र संग्रहालय में 2024 में 87 लाख दर्शक पहुंचे। 2023 में यह संख्या 89 लाख थी।
चीन के बीजिंग स्थित फॉरबिडन सिटी यानी पैलेस म्यूजियम भी दुनिया के सबसे व्यस्त ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परिसरों में शामिल है। इसका विशाल शाही परिसर चीन के कई सदियों के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का साक्षी है।
पर्यटन अब कितनी बड़ी अर्थव्यवस्था?
पर्यटन का महत्व केवल यात्रियों की संख्या से नहीं समझा जा सकता। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार 2024 में यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र का वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान करीब 10.9 ट्रिलियन डॉलर था—विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 10 प्रतिशत। इस क्षेत्र ने करीब 35.7 करोड़ रोजगारों को सहारा दिया, यानी दुनिया की लगभग हर दसवीं नौकरी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ी थी।
2026 में इसका वैश्विक आर्थिक योगदान करीब 12 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और लगभग 37.6 करोड़ रोजगार इससे जुड़े रहने की संभावना है।
लोकप्रियता की कीमत—‘ओवरटूरिज्म’
पर्यटन की असाधारण वृद्धि अपने साथ नई समस्याएं भी लेकर आई है। वेनिस, बार्सिलोना और एम्स्टर्डम जैसे शहरों में अत्यधिक पर्यटक दबाव ने स्थानीय जीवन, आवास, परिवहन और पर्यावरण पर असर डाला है। कई लोकप्रिय पर्यटन केंद्र अब अतिरिक्त शुल्क, पर्यटक कर, प्रवेश नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन जैसे उपाय अपना रहे हैं। यूरोमॉनिटर ने भी बढ़ते ‘ओवरटूरिज्म’ के जवाब में कर, प्रवेश शुल्क और साल भर पर्यटन को फैलाने जैसी रणनीतियों का उल्लेख किया है।
इससे पर्यटन की सफलता की परिभाषा भी बदल रही है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि किसी स्थान पर कितने पर्यटक आए, बल्कि यह भी है कि उनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना लाभ हुआ और पर्यावरण तथा स्थानीय जीवन पर कितना दबाव पड़ा।
बदल रहा है दुनिया घूमने का अंदाज
नई पीढ़ी का पर्यटक केवल प्रसिद्ध स्मारक के सामने तस्वीर खिंचवाने तक सीमित नहीं रहना चाहता। स्थानीय भोजन, ग्रामीण जीवन, प्रकृति, संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ाव वाले अनुभवों की मांग बढ़ रही है। कम भीड़ वाले स्थान, ऑफ-सीजन यात्रा और धीमी गति से किसी स्थान को समझने वाला ‘स्लो टूरिज्म’ भी उभर रहा है। यूरोमॉनिटर के अनुसार यात्री अब कम चर्चित स्थलों और सांस्कृतिक रूप से अधिक समृद्ध तथा व्यक्तिगत अनुभवों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
यही वैश्विक पर्यटन की बदलती कहानी है। अंतरराष्ट्रीय आगमन में बैंकॉक जैसे महानगर आगे हैं, देशों में फ्रांस का आकर्षण कायम है और लूव्र जैसे संग्रहालय मानव सभ्यता की विरासत को देखने के लिए लाखों लोगों को खींचते हैं। लेकिन भविष्य की असली चुनौती अधिक पर्यटकों को बुलाना भर नहीं, बल्कि पर्यटन को ऐसा बनाना है जिससे स्थानीय समाज को रोजगार मिले, संस्कृति सुरक्षित रहे और प्रकृति पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
आने वाले वर्षों में शायद पर्यटन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना यही होगा—कितने लोग आए, से अधिक महत्वपूर्ण यह कि वे अपने पीछे क्या छोड़ गए और स्थानीय समाज को क्या देकर गए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कई पुस्तकों के लेखक हैं, इस लेख में प्रस्तुत कंटेंट्स उनके निजी हैं., जिनसे हमारी सहमति जरुरी नहीं है –एडमिन )

