क्षेत्रीय समाचार

गढ़वाल विश्वविद्यालय में कोश्यारी के सम्मान में भव्य समारोह

श्रीनगर गढ़वाल, 10 जून। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में मंगलवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र एवं गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान मिलने के उपलक्ष्य में भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय परिवार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

अपने संबोधन में भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि पद्मभूषण सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उनके अभिनंदन से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने का अवसर होना चाहिए, जिनके नेतृत्व में देश निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है।

कोश्यारी ने कहा कि वर्ष 2013 में राजनीति से संन्यास लेने के बाद जब उनके नाम पर राज्यपाल पद के लिए विचार किया गया था, तब उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनका समर्थन करते हुए कहा था कि उनका राज्यपाल बनना उत्तराखंड के लिए गौरव की बात होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व पटल पर अपनी मजबूत और प्रभावशाली पहचान स्थापित की है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें केदारनाथ में कहा गया था कि “अगला दशक उत्तराखंड का होगा”। कोश्यारी ने कहा कि राज्य सरकार और ग्रामीण समाज इस संकल्प को साकार करने में जुटे हैं। प्रदेश के गांवों में लोग फल, सब्जियां तथा स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के कारण पलायन की प्रवृत्ति में कमी आई है और लोग पुनः अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग चाहे देहरादून, दिल्ली अथवा देश-विदेश के किसी भी हिस्से में रहते हों, उन्हें अपनी मातृभूमि के विकास में योगदान देने की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे जहां भी रहें, अपने कार्य और आचरण से उत्तराखंड की श्रेष्ठ पहचान को स्थापित करें।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए कोश्यारी ने कहा कि जाति-प्रथा समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए सभी वर्गों को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि अपने गांव में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित सहभोज कार्यक्रम में लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। उन्होंने उत्तराखंड को जातिगत भेदभाव से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भगत सिंह कोश्यारी के सार्वजनिक जीवन, सामाजिक योगदान और उत्तराखंड के विकास में निभाई गई भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोश्यारी का जीवन जनसेवा, सादगी और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी भारतीय राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनहित के मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब राजनीति में नैतिक मूल्यों की चर्चा होती है, तब कोश्यारी का व्यक्तित्व एक आदर्श के रूप में सामने आता है। उनके सार्वजनिक जीवन से युवाओं और जनप्रतिनिधियों को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय की गत एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों की भी जानकारी साझा की।

समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग के निदेशक प्रो. पी.बी. सुब्रमण्यम, गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी के निदेशक प्रो. विजय बंगा, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य प्रो. आशुतोष सयाना, गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी, एनआईटी उत्तराखंड के कुलसचिव डॉ. हरि मौल आजाद, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसाईं, अभिनंदन समिति के अध्यक्ष प्रो. धन सिंह बिष्ट, प्रो. एम.एस. पंवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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