दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में रुद्रवीणा के तारों की झंकार ने मंत्रमुग्ध किया श्रोताओं को

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-uttarakhandhimalaya.in-

देहरादून,  13 फ़रवरी। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र और स्पिक मैके की ओर से सोमवार को 12 फ़रवरी को लैंसडाउन चौक स्थित दून पुस्तकालय के सभागार में कलाकारों द्वारा “रुद्र वीणा” की एक बेहतरीन प्रस्तुति दी गयी। इस प्रस्तुति की लोगों द्वारा खूब सराहना की गयी।


उस्ताद बहाउद्दीन डागर द्वारा प्रस्तुत एक लेक-डेम प्रस्तुति, द्रुपद घराने के प्रसिद्ध डागर परिवार से ताल्लुक रखती है।उस्ताद बहाउद्दीन डागर के साथ संगतकार के रूप में श्री संजय आगले पखावज पर और तानपुरा पर इप्सिता बिचकर ने अहम भूमिका निभाई।

उल्लेखनीय है कि 1970 में ध्रुपद संगीतकारों के प्रतिष्ठित डागर परिवार में जन्मे, मोही बहाउद्दीन जी ने पहली बार सात साल की उम्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत में अपना कदम रखा, अपनी माँ श्रीमती प्रमिला डागरके विशेषज्ञ संरक्षण में सितार पर प्रशिक्षण लिया। उनके पिता, उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर, जो एक प्रसिद्ध रुद्र वीणा वादक थे, और उनके चाचा, उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर, ने उन्हें रुद्र वीणा से परिचित कराया।

उनके चाचा, उस्ताद ज़िया फ़रीदुद्दीन डागर, उनके गुरु, के साथ उनके गायन प्रशिक्षण ने उन्हें बहुत मदद की। रुद्रवीणा और आवाज की पराकाष्ठा, आलाप, जोर और झाला प्रस्तुत करते समय वाक्यांशों को काटने में समय की एक विशिष्ट और सटीक समझ लाती है, जो ध्रुपद के साधारण स्कूल की एक प्रमुख विशेषता है ।

उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2012-2013 नई दिल्ली रज़ा पुरस्कार 2007, रज़ा फाउंडेशन नई दिल्ली युवक साधक पुरस्कार 2007, संगीतेंदु लाल मणि मिश्रा फाउंडेशन, भोपाल संस्कृति पुरस्कार 2006 संस्कृति फाउंडेशन, नई दिल्ली राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान, 2014, और मध्य प्रदेश बैजू बावरा सम्मान, 2015, चंदेरी, मध्य प्रदेश मिला हुआ है।

स्पिक मैके ,युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सोसायटी रूप में एक गैर-राजनीतिक, राष्ट्रव्यापी, स्वैच्छिक आंदोलन है जिसकी स्थापना 1977 में आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर-एमेरिटस डॉ. किरण सेठ ने की थी। यह संस्था पूरे भारत में शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय संस्कृति के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

हर साल, स्पिक मैके लगभग 1000 शहरों में 1500 से अधिक संस्थानों में 5000 से अधिक कार्यक्रमों की व्यवस्था करता है, जिसमें 3 मिलियन से अधिक छात्र शामिल होते हैं।

प्रस्तुति से पूर्व रुद्र वीणा के कलाकारों का दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर अभिन्नन्दन और फूल मालाओं से स्वागत किया गया। इस मौके पर अंजली भर्तहरि, कर्नल,एस एस रौतेला, सुंदर सिंह बिष्ट, बिजू नेगी, जगदीश सिंह महर, मधन सिंह बिष्ट, राकेश कुमार, सतपाल सिंह, विजय बहादुर सहित अनेक संगीतकार, संगीतप्रेमी, लेखक व युवा पाठक उपस्थित थे।

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