“चमोली-रुद्रप्रयाग” से संसद की चौखट तक पहुंचने वाले महेन्द्र भट्ट पहले नेता

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प्रकाश कपरुवाण

भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राजनीति मे नए नए प्रयोग कर सबको चौंका देता है,बल्कि यह भी मंथन होता है कि आजादी के बाद कौन कौन से ऐसे क्षेत्र है जो उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रह गए हैं।इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बदरी-केदार की जनता ने तब महसूस किया जब बीते रोज उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट के नाम की घोषणा हुई।

बद्री- केदार”चमोली-रुद्रप्रयाग” से संसद की चौखट तक पहुंचने वाले बद्रीनाथ के पूर्व विधायक महेन्द्र भट्ट पहले सांसद बनेंगे। राज्यसभा सांसद के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया गया यह निर्णय केवल चौंकाने वाला नहीं है,इसके लिए निश्चित ही गहन मंथन भी हुआ होगा कि वर्ष 1991 से लेकर वर्ष 2019 तक के लोकसभा चुनावों मे हर बार जनपद चमोली व रुद्रप्रयाग से पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी को लीड मिलती रही है बावजूद इन जनपदों के किसी भी कार्यकर्ता को लोकसभा या राज्यसभा मे जाने का अवसर आखिर क्यों नहीं मिल सका ?

इस बार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे उत्तराखंड राज्यसभा की सीट हेतु लिए गए निर्णय से चमोली व रुद्रप्रयाग मे खुशी की लहर तो है ही पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं मे भारी उत्साह है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री महेन्द्र भट्ट को राज्यसभा भेजने के निर्णय पर भले ही राजनैतिक पंडित कुछ भी अनुमान लगाएं, लेकिन सत्य यह भी है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की हर गतिविधि पर पार्टी के केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व की सीधी नजर भी होती है, ऐसे मे पद या दायित्व के लिए किसी सिफारिश की गुंजाइश कम ही दिखती है।

इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण यह भी है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रचण्ड जीत के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीतकर आए सांसदों को संबोधित करते हुए कहा था कि मंत्रिमंडल मे शामिल होने के लिए कोई भी सांसद अफवाह, भ्रम व अखबारों मे छप रहे अनुमान तथा अटकलों पर भरोसा न करें,ऐसा कुछ भी नहीं होता है,तब उन्होंने यहाँ तक कहा था कि यदि किसी सांसद को मंत्री बनने का ऑफिसियल पत्र भी मिले तो भी एक बार कन्फर्म जरूर कर लें, क्योंकि मंत्रिमंडल के सीमित पदों पर किसे मंत्री बनना है इस पर कई स्तरों पर चर्चा होती है।

राज्यसभा के लिए नामित हुए महेन्द्र भट्ट के निर्णय मे भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा, बद्रीनाथ विधानसभा से चुनाव हारने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर सौंपना एक प्रयोग हो सकता है, लेकिन संसद के उच्च सदन राज्यसभा भेजने का निर्णय आजादी के बाद सीमान्त जनपद चमोली व रुद्रप्रयाग को संसद मे प्रतिनिधित्व दिए जाने का दूरगामी निर्णय भी हो सकता है।

बहरहाल पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट के राज्यसभा के लिए नामित होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं मे यह संदेश तो गया ही है कि पार्टी द्वारा दिए गए कार्यो का पूरी लगन से करने के साथ ही पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी को विजयश्री दिलाने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़नी है और दूसरा यह कि पार्टी के प्रति निष्ठा व समर्पण है तो पार्टी हारे हुए प्रत्याशी को भी ऊंचे पायदान तक पहुंचाने से पीछे नहीं हटती।

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