दिल्ली में जस्टिस रंजना देसाई की धामी से मुलाकात: कॉमन सिविल कोड पर उनकी भूमिका पर रहस्य बरकरार: चर्चा का खुलासा नहीं

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-जयसिंह रावत–

सूचना विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार गुरुवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन मेंजस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। चर्चा क्या हुई ये किसी को पता नहीं है।

विज्ञप्ति में जस्टिस  देसाई को उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने हेतु उत्तराखंड सरकार द्वारा गठित की  कमेटी की अध्यक्ष बताया गया है। लेकिन जस्टिस रंजना देसाई अब प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष हैं। लेकिन विज्ञप्ति में इसका उल्लेख नहीं है।

इस बात पर भी अभी संसय बना हुआ है कि प्रेस कौंसिल के चेयर पर्सन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ जस्टिस देसाई उत्तराखंड सरकार द्वारा दी गयी जिम्मेदारी निभा पाएँगी या नहीं। खास कर यह जानते हुए भी कि नागरिक संहिता पर केंद्रीय कानून होते हुए राज्य का क़ानून निरर्थक है। और उत्तराखंड सरकार ने  झेंप मिटाने के लिए कमेटी बना रखी है।

बहुत संभव है कि आज की मुलाकात में जस्टिस देसाई ने धामी को संविधान के अनुच्छेद 254 की व्यवस्थाओं  से अवगत करा दिया हो। इस अनुच्छेद में स्पष्ट कहा गया है कि संवर्ती सूची के विषयों में किसी एक पर अगर केंद्र और राज्य दोनो ही कानून बनाते हैं तो केंद्र का कानून ही विधि मान्य होगा। यहाँ अभी तक हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 और उत्तराधिकार अधिनयम 1956 आदि तथा मुस्लिम और ईसाई पर्सनल लॉ मौजूद हैं। उन कानूनों को केवल संसद ही बदल सकती है और उनके होते हुए राज्य द्वारा बनाया गया कानून असंवैधानिक ही होगा।

यह भी संभव है कि उन्होंने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए समय देने में असमर्थता प्रकट कर दी हो। क्योंकि जस्टिस रंजना देसाई के लिए यह बहुमूल्य समय की बर्बादी के सिवा कुछ नहीं है।

 

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