छोटी पहल से शुरू हुई बड़ी परम्परा इस बार : मराठा लाइट इन्फेंट्री करेगी बाबा केदार की अगवानी

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–दिनेश शास्त्री-
एक छोटी सी पहल कब परम्परा बन जाती है, इसका आम तौर पर आभास नहीं होता, किंतु भगवान आशुतोष कब किससे क्या करवा दें, यह न सिर्फ कल्पनातीत है बल्कि सुखद और समयानुकूल भी होता है। ऐसी ही एक पहल वर्ष 2003 में केदारनाथ धाम के लिए हुई थी और वही पहल आज एक भव्य परंपरा बन गई है, जिसके बिना सब कुछ अधूरा सा लगता है। बाबा केदार के कपाट 27 अक्टूबर को भैया दूज के अवसर पर प्रातः 8 बजे शीत काल के लिए बंद हो रहे हैं।
बात है वर्ष 2003 के यात्रा काल की। उस समय रुद्रप्रयाग में तैनात छठी गढ़वाल राइफल के सूबेदार मेजर बैशाख सिंह नेगी बाबा केदार के दर्शन के लिए आए थे। अचानक उन्हें प्रेरणा हुई कि जिस तरह कपाट खुलने और शीतकाल के लिए कपाट बंद होने के मौके पर भगवान बदरी विशाल की अगवानी सेना के बैंड द्वारा की जाती है, उसी प्रकार बाबा केदार के कपाट खुलने और कपाट बंद होने के समय सेना के बैंड द्वारा की जानी चाहिए।
उस समय गौरीकुंड व्यापार मंडल के अध्यक्ष थे, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता महेश चंद्र बगवाड़ी। श्री बगवाड़ी मूलत: केदारनाथ प्रखंड के ल्वारा गांव के निवासी हैं और स्वाभाविक रूप से सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर भाग लेते रहते हैं।
गढ़वाल राइफल के सूबेदार मेजर बैशाख सिंह नेगी ने महेश बगवाड़ी को अपना मंतव्य बताया तो उस समय गौरीकुंड के ग्राम प्रधान जगदम्बा प्रसाद गोस्वामी तथा पूर्व पोस्ट मास्टर अनुसूया प्रसाद गोस्वामी ने क्षेत्र के अन्य ग्राम प्रधानों और मंदिर समिति से संपर्क किया। प्रस्ताव निश्चित रूप से अच्छा था तो सभी ने उसका स्वागत किया और इस आशय का एक पत्र उस समय रुद्रप्रयाग में तैनात छठी गढ़वाल राइफल के अधिकारियों को भेज दिया गया। श्री बैशाख सिंह नेगी ने खुद व्यक्तिगत रुचि ली और केदारनाथ धाम में एक पहल हो गई। गढ़वाल राइफल का बैंड बाबा केदार की अगवानी करने पहुंच गया। अगले वर्ष भारतीय सेना की दूसरी इकाई रुद्रप्रयाग पहुंची तो उसे बाबा की अगवानी का मौका मिला। तब से यह सिलसिला निरंतर जारी है और अब यह एक स्थाई परम्परा बन गई है। तब से सेना की कई रेजीमेंट रुद्रप्रयाग में तैनात हो चुकी हैं और जो भी रेजीमेंट वहां तैनात होती है वह बाबा की अगवानी करती आ रही है। इस परम्परा के शुरू होने के बाद गढ़वाल राइफल ने केदारनाथ धाम में मंदिर के बाहर एक प्रवेश द्वार बना कर वहां घंटा भी भेंट किया था। वर्ष 2013 की आपदा में जब सब कुछ तबाह हो गया था तो प्रवेश द्वार भी बह गया लेकिन बाबा की अगवानी करने की परम्परा यथावत कायम है। इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 27 अक्टूबर को भैया दूज के पर्व पर शीतकाल के लिए बंद होने हैं और रुद्रप्रयाग में तैनात सेना की 11 मराठा लाइट इन्फेंट्री की टीम बाबा केदारनाथ की अगवानी करेगी।
मराठा लाइट इन्फेंट्री का 17 सदस्यीय बैंड वादक दल केदारनाथ धाम पहुंच चुका है। इस दल का नेतृत्व कुमार हीरेमठ करेंगे। समन्वय के लिए एक जेसीओ और एक सूबेदार मेजर भी धाम में पहुंच चुके हैं।
मराठा लाइट इन्फेंट्री के बैंड वादक दल का नेतृत्व कर रहे कुमार हीरेमठ ने बताया कि उन्होंने केदारनाथ धाम पहुंच कर आज बाकायदा भगवान केदारनाथ के चरणों में अपनी प्रस्तुति दी। डेढ़ घंटे के आयोजन में धाम में मौजूद भक्त भी इस प्रस्तुति को देख अभिभूत हो उठे। कुमार हीरेमठ का कहना था कि बाबा की सेवा का मौका मिलना सौभाग्य की बात है। वे अपने बैंड दल के साथ केदारनाथ धाम से ऊखीमठ तक बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली की अगवानी करेंगे, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है।
सेना के प्रति अगाध सम्मान रखने वाले केदार घाटी के लोगों में भी इस बैंड टीम के स्नेह का भाव दिखा।
इस तरह छोटी पहल से बड़ी और स्थाई परम्परा ने केदार धाम की दिव्यता और भव्यता में श्रीवृद्धि की है।

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