जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ जनांदोलन बने : मुख्यमंत्री धामी

अल्मोड़ा, 7 जून। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से हवालबाग में राज्य स्तरीय ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा किसानों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मांडुआ, झंगोरा, चौलाई सहित अन्य पारंपरिक मोटे अनाजों के संरक्षण एवं उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अल्मोड़ा की धरती पर किसानों के बीच आकर उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक जनांदोलन बन चुका है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की शक्ति और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। भारतीय संस्कृति में मिट्टी को मां के समान सम्मान दिया जाता है, इसलिए उसकी उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और खेतों को रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग से बचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ एवं सुरक्षित कृषि व्यवस्था छोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है।
मुख्यमंत्री ने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिक शोध के अनुरूप खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार फसलों का चयन करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं तथा पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बागवानी क्षेत्र के विकास हेतु अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क तथा सुगंधित फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही मोटे अनाजों के उत्पादन और विपणन को भी विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के क्षेत्र में उत्तराखंड का देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होना सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सफलता का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों से केवल वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने का कार्य भी करती है। उन्होंने किसानों से मिट्टी परीक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद में तारबाड़ योजना के अंतर्गत लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न कार्य कराए जाने की घोषणा भी की।
