रक्षा मंत्रालय 2021 – सशस्त्र बलों में महिला सशक्तिकरण

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  • रक्षा सेवाओं में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय द्वारा कई पहल की गयी हैं। सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों का स्थायी कमीशन लागू किया गया है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कंपनियों (आरसीसी) की कमान के लिए बीआरओ ने महिला अधिकारियों को नियुक्त किया। अप्रैल 2021 में, एक जीआरईएफ अधिकारी वैशाली एस हिवासे ईई (सिविल) ने 83 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी की बागडोर संभाली और जिन्होने मुनस्यारी-बुगदियार-मिलम को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण भारत-चीन सड़क रोड के निर्माण की जिम्मेदारी उठाई।
  • सरकार ने अब देश की लड़कियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। आवश्यक प्रशासनिक प्रशिक्षण और नीतिगत परिवर्तन किये गये हैं। एनडीए के जून 2022 के पाठ्यक्रम में महिला कैडेटों का पहला बैच शामिल होगा।
  • 3 फरवरी, 2021 को महिला नेवल ऑपेरेशंस अधिकारियों के पहले बैच को रोटरी विंग में शामिल किया गया और उन्हें आईएनएस गरुड़, कोच्चि के हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन आईएनएएस 336 में तैनाती मिली। लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और लेफ्टिनेंट रीति सिंह ने युद्धपोतों से हवाई कर्मी के रूप में लड़ाकू वायुयानों का संचालन किया।

सैनिक स्कूलों में छात्राओं को प्रवेश

प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण 2021 के दौरान एक घोषणा की कि सभी सैनिक स्कूल अब लड़कियों के लिए खुले रहेंगे। घोषणा के बाद, सभी सैनिक स्कूलों ने लड़कियों को प्रवेश की पेशकश की है और अब तक 350 से अधिक लड़कियों को प्रवेश दिया गया है। आगामी शैक्षणिक सत्रों में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। सैनिक स्कूलों को सिर्फ लड़कों के स्कूलों से सह-शिक्षा के स्कूलों में बदलने से व्यक्तित्व और व्यवहार के विकास में आसानी होगी। सभी विद्यालयों में सर्वोत्तम इंटरेक्शन पद्धति अपनाई जा रही है। इस निर्णय ने गर्ल्स कैडेट्स के लिये लड़कों के समान गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के द्वार खोल दिये हैं।

सशस्त्र सेवाओं में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सेवाओं द्वारा कई पहल की गयी हैं। सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों का स्थायी कमीशन लागू किया गया है।

कुछ अन्य प्रमुख पहलों में शामिल हैं:

  • वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में 10 महिला अधिकारियों को शामिल करना।
  • युद्धपोतों पर महिला अधिकारियों की नियुक्ति।
  • नौसेना के सीकिंग (ऑब्जर्वर) और आरपीए स्ट्रीम में महिला अधिकारियों को शामिल करना।
  • विदेश के मिशन में महिला अधिकारियों की नियुक्ति।
  • सैन्य पुलिस कोर में महिला कर्मियों को शामिल करना।

महिलाओं को स्थायी कमीशन

महिला अधिकारी भारतीय सेना के विभिन्न ऑपरेशनल थिएटरों में गर्व और आत्मविश्वास से सेवा दे रही हैं। महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से, भारतीय सेना ने महिला अधिकारियों को उनके पुरुष समकक्षों के बराबर स्थायी कमीशन (पीसी) प्रदान किया है। पीसी के अनुदान के साथ, महिला अधिकारी अधिक से अधिक गौरव प्राप्त करने और उच्च पद और जिम्मेदारी निभाने की आकांक्षा कर सकती हैं। पीसी पाने वाली सभी महिला अधिकारी विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और चुनौतीपूर्ण सैन्य कार्यों से गुजर रही हैं जिससे वो भारतीय सेना में उच्च नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए सशक्त बन सकें । जूनियर बैच में महिला अधिकारियों के लिए पीसी भी शुरू हो गया है, जिसमें उन्हें 10 वें वर्ष की सेवा में पीसी के लिए योग्य माना जाता है। पीसी के साथ, महिला अधिकारी लैंगिक समानता के युग में आगे बढ़ रही हैं और अपने पुरुष समकक्षों के समान चुनौतीपूर्ण नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कमर कस रही हैं। जून 2022 से महिला कैडेटों को शामिल करने के लिये राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में वर्तमान में चल रही तैयारियों का भी विशेष उल्लेख किया गया है। सैन्य पुलिस कोर में प्रति वर्ष 100 महिलाओं की दर से कुल 1,700 महिला सैनिकों (17 वर्ष के लिए)  को शामिल करने की योजना है। महिला सैनिकों के पहले बैच ने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और अपनी इकाइयों में शामिल हो गये हैं। यह देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एनडीए में महिला उम्मीदवार 

सरकार ने अब देश की बालिकाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। आवश्यक प्रशासनिक प्रशिक्षण और नीतिगत परिवर्तन किये गये हैं। एनडीए जून 2022 के पाठ्यक्रम में महिला कैडेटों का पहला बैच शामिल होगा।

अन्य रैंक में महिलाएं

भारतीय सेना ने सैन्य पुलिस (एमपी) में अन्य रैंकों में महिलाओं की भर्ती शुरू कर दी है। 100 महिला एमपी का पहला बैच मई 2021 में पास आउट हुआ और उन्हें विभिन्न इकाइयों में तैनात किया गया है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण हेतु महिला अधिकारी

इतिहास में पहली बार, सीमा सड़क संगठन ने महिला अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कंपनियों (आरसीसी) की कमान के लिए नियुक्त किया है।  एक जीआरईएफ अधिकारी ईई (सिविल) वैशाली एस हिवासे ने अप्रैल 2021 में 83 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी की बागडोर संभाली और मुनस्यारी-बुगदियार-मिलम को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण इंडो-चाइना रोड पर काम किया। 30 अगस्त, 2021 को, मेजर आईना राणा ने उत्तराखंड में चमोली जिले के पीपलकोटी में 75 आरसीसी के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्यभार संभाला और एक सड़क निर्माण कंपनी की कमान संभालने वाली पहली भारतीय सेना इंजीनियर अधिकारी बनीं, साथ ही उनके अधीन सभी तीन प्लाटून कमांडर, कैप्टन अंजना, एईई (सिविल) सुश्री भावना जोशी, और ऐईई (सिविल) सुश्री विष्णुमाया के साथ पहली महिला आरसीसी गठित हुई।

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

  • भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये वर्ष के दौरान कई प्रमुख पहल शुरू की गयी हैं। रक्षा में आत्मनिर्भरता का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ाना और देश को इस क्षेत्र में एक शुद्ध निर्यातक बनाना है।
  • भारतीय सेना के लिये उपकरणों की योजना बनाने और खरीद के लिये ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को खास तौर पर प्रोत्साहन दिया गया है, जिसमें देश के उभरते रक्षा उद्योग को समर्थन देने का प्रयास है।
  • एलसीए (तेजस), अरुधरा और अश्लेषा रडार, हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाला आकाश मिसाइल सिस्टम, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर आदि सिस्टम को आईएएफ की सूची में शामिल किया गया था, जो ‘आत्मनिर्भर भारत ‘ की सोच के प्रति आईएएफ की प्रतिबद्धता को साबित करता है।
  • एमबीटी ‘अर्जुन’ एमके-1ए को 14 फरवरी 2021 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय सेना को सौंप दिया गया था और 23 सितंबर, 2021 को भारतीय सेना के लिये रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने 118 अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) की आपूर्ति के लिए भारी वाहन कारखाने (एचवीएफ), अवडी, चेन्नई को एक ऑर्डर दिया ।
  • स्वदेशी विमान वाहक पोत ‘विक्रांत’ ने अगस्त 2021 में अपनी पहली समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया। कुछ अन्य समान उपलब्धियों के साथ ये उपलब्धि भारतीय नौसेना के लिये स्वदेश में तैयार सबसे बड़े प्लेटफॉर्म के प्रति भरोसे और आत्मनिर्भर भारत की हमारी कोशिशों पर देशवासियों के भरोसे को मजबूत करेगा। विक्रांत को 15 अगस्त 2022 में कमीशन किये जाने का लक्ष्य है।
  • प्रोजेक्ट 15बी का पहला जहाज आईएनएस विशाखापत्तनम मझगांव डॉक लिमिटेड द्वारा 28 अक्टूबर, 2021 को मुंबई में भारतीय नौसेना को दिया गया था और रक्षा मंत्री द्वारा 21 नवंबर, 2021 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया।
  • दो परिष्कृत और शक्तिशाली प्लेटफॉर्म करंज और वेला को क्रमशः 10 मार्च 21 और 25 नवंबर 21 को कमीशन किया गया, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है, और अत्याधुनिक हथियार लगे हैं और जो पश्चिमी समुद्र तट में हमारे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए उपयुक्त हैं।
  • 10 से 13 मार्च 2022 तक गुजरात के गांधीनगर में होने वाले आगामी डिफेक्सपो-2022 की योजना आजादी का अमृत महोत्सव के अनुरूप बनाई जा रही है और भारत@75 प्रदर्शित करने के लिये घरेलू रक्षा विनिर्माण उद्योग को उसके पूरे विस्तार के साथ शामिल किया जायेगा।
  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 14 दिसंबर 2021 को डीआरडीओ भवन, नई दिल्ली में आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से और रक्षा मंत्रालय के विशेष सप्ताह के रूप में आयोजित एक कार्यक्रम में सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित पांच उत्पाद सौंपे।
  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सात सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते सौंपे। सशस्त्र बलों और गृह मंत्रालय को सौंपे गए उत्पादों में एंटी-ड्रोन सिस्टम, मॉड्यूलर ब्रिज, स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन, चैफ वेरिएंट और हल्के फायर फाइटिंग सूट शामिल हैं।
  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के वायु संस्करण का 8 दिसंबर, 2021 को सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमके-आई से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया । सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के विकास, उत्पादन और मार्केटिंग के लिए भारत (डीआरडीओ) और रूस (एनपीओएम) के बीच ब्रह्मोस एक संयुक्त उद्यम है।
  • डीआरडीओ द्वारा विकसित सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड टारपीडो सिस्टम को 13 दिसंबर 2021 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।
  • सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करते हुए आयुध निर्माणी बोर्ड को स्वायत्तता प्रदान करने और दक्षता बढ़ाने के लिये और आयुध कारखानों में नई विकास क्षमता  के लिए सात नये रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में परिवर्तित कर दिया गया है। नये रक्षा सार्वजनिक उपक्रम 1 अक्टूबर, 2021 से कार्यरत हो गये हैं।

सीमा से लगे इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा मंत्रालय का मुख्य जोर सड़क और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है, जिसका उद्देश्य रक्षा तैयारियों को मजबूत करना और साथ ही इन क्षेत्रों में स्थानीय आर्थिक विकास को मदद देना है।
  • 28 जून 2021 को, रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित सड़कों और पुलों की 75 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
  • समुद्र तल से 19,024 फीट की ऊंचाई पर पूर्वी लद्दाख में उमलिंग ला दर्रे पर बीआरओ द्वारा निर्मित सड़क अब अधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क बन गयी है। सड़क का उद्घाटन माननीय रक्षामंत्री द्वारा 28 दिसंबर, 2021 को वर्चुअल माध्यम से किया गया था।
  • माननीय रक्षा मंत्री ने 28 दिसंबर, 2021 को चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बीआरओ द्वारा निर्मित 24 पुलों और तीन सड़कों को राष्ट्र को समर्पित किया। 24 पुलों में से नौ जम्मू और कश्मीर में हैं; लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पांच-पांच; उत्तराखंड में तीन और सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक हैं। तीन सड़कों में से दो लद्दाख में हैं।
  • बीआरओ ने देश भर में यात्रा करके ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाने और राष्ट्रीय एकता, राष्ट्र निर्माण और सड़क सुरक्षा जागरूकता का संदेश फैलाने के लिये “इंडिया@75” मोटरसाइकिल अभियान का आयोजन किया। 14 अक्टूबर, 2021 को माननीय रक्षा मंत्री द्वारा अभियान को हरी झंडी दिखाई गई। रक्षा सचिव ने 27 दिसंबर, 2021 को अभियान का समापन किया।

वर्ष 2021 की अन्य प्रमुख बातें

  • सरकार ने संबद्धता के आधार पर गैर सरकारी संगठनों/निजी स्कूलों/राज्य सरकारों आदि के साथ साझेदारी में सैनिक स्कूल स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है। पहले चरण में, प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से 2-3 स्कूलों के साथ कुल 100 सैनिक स्कूल स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • एकल सेवा दृष्टिकोण से बढ़कर एकीकृत योजना और क्रियान्वयन की ओर आगे बढ़ने के लिए ठोस प्रयास किये जा रहे हैं। इस दिशा में, पिछले एक वर्ष में तीन संयुक्त सिद्धांततैयार किये गये हैं, जबकि चार नये संयुक्त सिद्धांत अर्थात् कैपस्टोन, अंतरिक्ष, साइबर और खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) अग्रिम चरण में हैं।
  • भारत के ‘ टकराव को पूरी तरह से खत्म करने और यथास्थिति की तत्काल बहाली’ के रुख से समझौता किये बिना स्थिति की तीव्रता कम करने के लिए चीनी समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत हुई है। इसके लिए वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की 13 दौर की बैठक पहले ही संपन्न हो चुकी है।
  • शत्रुवत तत्वों ने अल्पसंख्यकों और गैर-स्थानीय लोगों को खासतौर पर लक्ष्य बनाकर घाटी में शांति भंग करने के अपने प्रयासों को फिर से सक्रिय कर दिया।  ऐसे क्षेत्रों जहां शक्ति की जरूरत नहीं है वहां अग्रिम कदम और सुरक्षा बलों द्वारा खुफिया सूचना आधारित सीधी कार्रवाई से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन के नापाक मंसूबों का मुकाबला करने में सक्षम रहे हैं।
  • सेना ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जम्मू-कश्मीर में आंतरिक स्थिति नियंत्रण में रहे। साल 2021 में सुरक्षाबलों ने कुल 165 आतंकियों को ढेर किया था वहीं सुरक्षाबलों के 39 जवानों ने भी अपनी शहादत दी। वर्ष 2021 में सुरक्षा बलों द्वारा लायी गयी सामान्य स्थिति स्पष्ट रूप से दिखी,  जिसमें पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार ने सकारात्मक रुझान दिखाया।
  • भारतीय सेना ने लगातार ‘मिशन ओलंपिक’ के हिस्से के रूप में युवा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया और टोक्यो ओलंपिक में सूबेदार नीरज चोपड़ा द्वारा प्राप्त एक स्वर्ण पदक के साथ इन प्रयासों का फल भी मिला।
  • वर्ष 2021 में दो नयी आपातकालीन लैंडिंग सुविधाओं का उद्घाटन समारोह हुआ। पहला एनएच-925A (गंधव-बखासर खंड, राजस्थान) के साथ था, जिसका उद्घाटन रक्षामंत्री ने 09 सितंबर 21 को किया था। 16 नवंबर 21 को मिराज-2000, सी-130जे और एएन-32 विमान द्वारा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में ईएलएफ की सफल लैंडिंग की गयी थी। उद्घाटन समारोह के हिस्से के रूप में ईएलएफ पर  माननीय प्रधानमंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और वायुसेना प्रमुख सी-130जे विमान से उतरे।
  • तटीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री के विजन डॉक्यूमेंट में समाहित आईसीजी और तटीय पुलिस द्वारा संयुक्त तटीय गश्त (जेसीपी) 20 अगस्त को स्थापित किया गया। कोविड-19 द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय तटीय पुलिस कर्मियों और आईसीजी इकाइयों के बीच समन्वय और बेहतर तालमेल के परिणामस्वरूप 15अगस्त 20को जेसीपी की अपने समय पर शुरुआत हुई। 01 जनवरी से 16 दिसंबर 2021 तक कुल 383 समुद्री उड़ानें, 199 क्लासरूम इंस्ट्रक्शन और 985 कर्मियों को जेसीपी उड़ानों के लिए जहाजों पर भेजा गया।
  • साल के दौरान 44 माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट सिम्युलेटर और 60 रोइंग सिम्युलेटर की खरीद में सफलता मिली है और इनकी आपूर्ति और इन्हे स्थापित किये जाने का काम प्रगति पर है। सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण ने वायु सेना और नौसेना कैडेटों के प्रशिक्षण को अत्यधिक उन्नत किया है।
  • एयर मार्शल वीआर चौधरी एवीएसएम वीएम ने 30 सितंबर 2021 को वायु सेना प्रमुख (सीएएस) के रूप में पदभार ग्रहण किया। एनडीए के पूर्व छात्र, सीएएस को दिसंबर 82 में भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उन्होंने कई लड़ाकू और प्रशिक्षक विमानों पर 3800 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भरी है।
  • एडमिरल आर हरि कुमार ने 30 नवंबर, 2021 को भारतीय नौसेना के नये प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। कुमार ने एडमिरल करमबीर सिंह से 25 वें नौसेना प्रमुख (सीएनएस) के रूप में पदभार ग्रहण किया, जो भारतीय नौसेना में 41 साल से अधिक के अपने करियर के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।
  • अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे की स्थिति ने राष्ट्र के लिए एक अनूठी चुनौती पेश की। भारतीय वायुसेना को अफगानिस्तान से भारतीयों और दूसरे देशों के कुछ अन्य नागरिकों को निकालने के लिए बुलाया गया था। पहले कंधार, फिर मजार-ए-शरीफ और अंत में काबुल से नागरिकों को बाहर निकालना शुरू किया गया। अमेरिका और उसके सहयोगियों देशों के सैनिकों की वापसी के परिणामस्वरूप काबुल में अराजकता की स्थिति थी। आईएएफ ने लोगों को निकालने के लिए अपने सी-17 और सी-130जे विमान तैनात किये। कंधार (10 जुलाई 21) और मजार-ए-शरीफ (10 अगस्त 21) से निकासी के लिये दोनो जगह सी-17का उपयोग किया गया था। इसके अलावा, 132सरकारी अधिकारियों, 316 भारतीय नागरिकों और अन्य राष्ट्रीयताओं के 126 व्यक्तियों को बचाने के लिए 15 से 28 अगस्त 21के बीच पांच विमान (चार सी-17और एक सी-130जे) का उपयोग किया गया था।
  • देश ने अपना पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के 12 अन्य कर्मियों को 08 दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में खो दिया। उन्होंने पूरी लगन के साथ राष्ट्र की सेवा की। जनरल बिपिन रावत एक उत्कृष्ट सैनिक थे। वो एक सच्चे देशभक्त थे, जिन्होने सशस्त्र बलों और सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण में बहुत योगदान दिया। भारत के पहले सीडीएस के रूप में, जनरल बिपिन रावत ने रक्षा सुधारों सहित सशस्त्र बलों से संबंधित विविध पहलुओं पर काम किया।

सैन्य मामलों का विभाग

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति और सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) की स्थापना आजादी के बाद से किसी भी सरकार द्वारा किया गया सबसे महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी रक्षा सुधार है। आयात के कम होने के साथ, डीएमए ने दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने, सेवाओं के बीच तालमेल और संयुक्तता बढ़ाने और आधुनिक युद्ध की चुनौतियाँ’ जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्त किया है, का सामना करने के लिये सेना के आधुनिकीकरण के लिये सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर कई सुधारों का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी ली है ।

डीएमए के तहत, लॉजिस्टिक्स संरचना को और अधिक कुशल बनाने के लिये इसे पूरी तरह से नया रूप दिया जा रहा है। इस संबंध में, तीन संयुक्त सेवा अध्ययन समूह (जेएसएसजी) सेवाओं के लिए सामान्य लॉजिस्टिक पॉलिसी नीतियां विकसित कर रहे हैं जो आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े कार्यों जैसे योजना, खरीद, इन्वेंटरी का रखरखाव, वितरण, निपटान और दस्तावेजीकरण को बेहतर बनाएंगे। मुंबई, गुवाहाटी और पोर्ट ब्लेयर में प्रत्येक में ज्वाइंट लॉजिस्टिक नोड्स (जेएलएन) की स्थापना पर आधारित एक पायलट परियोजना पहले ही शुरू हो चुकी है।

एकल सेवा दृष्टिकोण से एकीकृत योजना और निष्पादन की ओर आगे बढ़ने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में, पिछले एक वर्ष में तीन ज्वाइंट डाक्ट्रिन तैयार किये गये हैं, जबकि चार नये संयुक्त सिद्धांत अर्थात् कैपस्टोन, अंतरिक्ष, साइबर और खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) अग्रिम चरण में हैं।

युद्धक क्षमता बढ़ाने और रक्षा व्यय को संतुलित करने के लिए, भारतीय सेना के 270 से अधिक लॉजिस्टिक प्रतिष्ठानों को बंद या आकार में छोटा कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप अग्रिम मोर्चे तक सामग्री पहुंचाने के अनुपात में वृद्धि के अलावा, सरकारी खजाने में पर्याप्त बचत हुई है। प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने, एकीकृत करने और युक्तिसंगत बनाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण पद्धति की समग्र समीक्षा भी जारी है। तीनों सेवाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए दस विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें से पांच क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण शुरू हो चुका है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने अगस्त 2020 में 101 वस्तुओं की पहली सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची और 31 मई 2021 को 108 वस्तुओं वाली दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की। ये चयनित उत्पाद सिर्फ घरेलू उद्योग से ही खरीदे जा सकते हैं। इन सूचियों में भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रमुख युद्धक प्लेटफॉर्म, उन्नत हथियार प्रणाली, आयुध और गोला-बारूद शामिल हैं। ये सूचियाँ रक्षा हार्डवेयर के आयात में कटौती करने के राष्ट्र के संकल्प को दिशा देने के अलावा, सरकार द्वारा शुरू किये गये कई परिवर्तनकारी कदमों के आधार पर पिछले छह वर्षों में निर्मित रक्षा निर्माण में घरेलू उद्योग की बढ़ती क्षमता की भी पहचान हैं।

  • थियेटर/संयुक्त कमानस्थापित करने का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अध्ययन समूह की रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया है और कार्यान्वयन के रोडमैप पर विचार किया जा रहा है।
  • सेवाओं के बीच संचार नेटवर्क को एकीकृतकरने की बारीकियों का अध्ययन और काम करने के लिए एक ‘त्रि-सेवा संयुक्त कार्य समूह’ भी स्थापित किया गया है।
  • सेना की इकाइयों को सही आकार देने/बदलने की समीक्षा की जा रही है।

सैन्य क्षमताओं के सर्वोत्तम उपयोग के लिए विभाग संयुक्त योजना के माध्यम से तीनों सेवाओं के एकीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। रक्षा योजना, खरीद और संचालन को एकीकृत करने के लिए सैन्य प्रक्रियाओं पर काम किया जा रहा है। मौजूदा संसाधनों के उपयोग को युक्तिसंगत बनाने के लिए कुछ अन्य उपायों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

इनमें प्रमुख हैं:

  • अनावश्यक खर्च को कम करकेयुद्धक क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से तीनों सेवाओं के कामकाज में सुधार लाना।
  • स्वदेशी उपकरणों के उपयोगको बढ़ावा देना और रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता लाना।
  • बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोगसुनिश्चित करना और सेवाओं के बीच संयुक्तता के माध्यम से इसे युक्तिसंगत बनाना।
  • सेवाओं के बीच जुड़ाव और मानकीकरणको बढ़ावा देना।
  • कैरियर की प्रगति के लिए संयुक्त स्टाफ असाइनमेंटकी घोषणा करना और क्रॉस स्टाफिंग बढ़ाना।
  • सशस्त्र बलों की चतुर्थ संवर्ग समीक्षा
  • अप्रचलित नियमों और अधिनियमोंका उन्मूलन
  • प्रादेशिक सेना की तैनाती की शर्तों की समीक्षा

विभाग ने पूरी क्षमता के साथ कोविड-19 के खिलाफ देश की लड़ाई में योगदान दिया और ईरान, वुहान, चीन, मालदीव, श्रीलंका और ईरान से 4000 से अधिक भारतीय प्रवासियों को निकालने के लिए के लिए सशस्त्र बलों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय किया है। रक्षा बलों ने राष्ट्रीय कोविड पूल के लिए नामित कोविड-19 अस्पतालों और 31 मिली जुली सुविधाओं वाले अस्पतालों के साथ 21 स्थानों पर क्वारंटाइन सुविधाओं की स्थापना की। रक्षा सेवाओं ने दिल्ली (नरेला, शकूरबस्ती और दिल्ली कैंट) और बिहार (पटना और मुजफ्फरपुर) में चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरे देशों तक पहुंच के हिस्से के रूप में, चीन, भूटान, नेपाल, मॉरीशस, सेशेल्स आदि को चिकित्सा से जुड़ी वस्तुओं के संदर्भ में सहायता के अलावा मालदीव, कुवैत, मॉरीशस और कोमोरोस में चिकित्सा दल प्रदान किये गये और तैनात किये गये। ऑपरेशन समुद्र सेतु 2 के तहत, भारतीय नौसेना के जहाज 1100 मीट्रिक टन से अधिक तरल ऑक्सीजन, 314 किलो लीटर ऑक्सीजन के साथ 14,000 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता के परिवहन में शामिल थे ताकि कोविड के खिलाफ राष्ट्रीय प्रयास में सहायता की जा सकी।

डीएमए ने रक्षा हवाई क्षेत्र को खोलने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इन पहलों ने हवाई क्षेत्र के लचीले उपयोग (एफयूए) और संयुक्त उपयोगकर्ता हवाई अड्डा (जेयूए) को सुगम बनाकर देश में नागरिक उड्डयन उद्योग का विस्तार करने में सहायता की है। अनुसूचित उड़ानों के लिए प्राथमिकता मंजूरी, हाईट बैंड के समय को साझा करने आदि के माध्यम से, नागरिक ऑपरेटरों को रक्षा हवाई क्षेत्र की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में पहल की गई है।

देश ने अपना पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के 12 अन्य कर्मियों को 08 दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में खो दिया। उन्होंने पूरी लगन के साथ राष्ट्र की सेवा की। जनरल बिपिन रावत एक उत्कृष्ट सैनिक थे। एक सच्चे देशभक्त, उन्होंने सशस्त्र बलों और सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण में बहुत योगदान दिया। सामरिक मामलों पर उनकी अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोण असाधारण थे। भारत के पहले सीडीएस के रूप में, जनरल बिपिन रावत ने रक्षा सुधारों सहित सशस्त्र बलों से संबंधित विविध पहलुओं पर काम किया। वह अपने साथ भारतीय सेना में सेवा करने का एक समृद्ध अनुभव लेकर आए। राष्ट्र उनकी असाधारण सेवा को कभी नहीं भूलेगा।

रक्षा उत्पादन विभाग

स्वायत्तता प्रदान करने, दक्षता बढ़ाने के लिये, और आयुध कारखानों में विकास की नयी  क्षमता को उजागर करने के लिये, आयुध निर्माणी बोर्ड को सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करते हुए 7 नये रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में परिवर्तित किया गया है। नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रम 1 अक्टूबर, 2021 से कार्यरत हो गए हैं। सशस्त्र बलों को सामरिक हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ओएफबी के पास लंबित 62,000 करोड़ रुपये से अधिक के इंडेंट / ऑर्डर को बनाये रखने का निर्णय लिया है। 15 अक्टूबर 2021 को 7 नये रक्षा सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्र को समर्पित किये गये।

देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे (डीआईसी) स्थापित किये गये हैं जिसमें से प्रत्येक डीआईसी में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य है। रक्षा औद्योगिक गलियारों के विकास को और गति देने के लिए, दोनों डीआईसी को प्रधान मंत्री की ‘गति शक्ति’ राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकृत किया गया है। अब तक उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु डीआईसी में क्रमशः 1401.68 करोड़ रुपये और  2252 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

रक्षा मंत्री ने आईडेक्स के हिस्से के रूप में 19 अगस्त 2021 को डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज के पांचवें संस्करण (डीआईएससी 5) का शुभारंभ किया। शुरू की गयी चुनौतियां सशस्त्र बलों और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की आवश्यकताओं और उनका समाधान देने वालों, यानी एमएसएमई, स्टार्टअप, इनोवेटर, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और शिक्षाविदों  के बीच एक सेतु का काम करेंगी। डीआईएससी -5 के तहत, सशस्त्र बलों और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की 35 चुनौतियों को भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में भाग लेने और रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिये संभावित स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स, एमएसएमई के लिए खुला रखा गया था।

उपरोक्त के अलावा, ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को एक बड़ा बढ़ावा देने के लिए, और आईडेक्स के लिए पहली बार , भारतीय नौसेना ने आईडेक्स चैलेंज  “मानव रहित भूतल वाहन” के तहत देश के पहले स्वदेशी रूप से विकसित रोबोटिक लाइफबॉयज़ खरीदने के लिए 13 करोड़ का अनुबंध दिया। ये अनुबंध विशाखापत्तनम स्थित एक स्टार्टअप सैफ सीज को मिला।

सरकार ने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिये और स्टार्टअप को समर्थन देने के लिये 500 करोड़ (2021-22 से 2025-26) के खर्च के साथ एक योजना को मंजूरी दी है। इससे 300 से अधिक स्टार्टअप नई डिजाइन और विकास परियोजनाओं में भाग ले सकेंगे।

हैदराबाद में वायु सेना के 24 प्रकार के पुर्जों के निर्माण के लिए पहली फैसिलिटी स्थापित करने का अनुबंध 13 अगस्त 2021 को सरकारों के मध्य समझौते (आईजीए) के तहत ‘रूसी/सोवियत मूल के हथियारों और रक्षा उपकरणों से संबंधित पुर्ज़ों, घटकों के संयुक्त निर्माण, संग्रह और  अन्य सामग्री  में पारस्परिक सहयोग” पर हुआ है।

नोवेल कोरोनावायरस के कारण सार्वजनिक समारोहों पर गतिरोध के बाद से दुनिया की पहली हाइब्रिड एयरोस्पेस एंड डिफेंस (ए एंड डी) प्रदर्शनी के रूप में 03 से 05 फरवरी 2021 तक तीन दिवसीय एयरो इंडिया -21 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस आयोजन ने दुनिया के लिये नये नॉर्मल का पालन करने का एक मॉडल स्थापित किया है। कोविड -19 के कारण उत्पन्न कई चुनौतियों जैसे अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध, किसी बेंचमार्क के स्थापित हुए बिना पहला कार्यक्रम आदि के बावजूद , एयरो इंडिया में तीन दिनों में 26,000 से ज्यादा विजिटर्स स्वयं पहुंचे वहीं 5 लाख  से ज्यादा विजिटर्स ने शो वर्चुअली देखा। कुल 710 प्रदर्शकों ने एएंडडी क्षेत्र में अपने उत्पादों और क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए अपने स्टॉल/पैवेलियन लगाए।

10 से 13 मार्च 2022 तक गांधीनगर, गुजरात में आयोजित होने वाले डिफेक्सपो-2022 के आगामी 12 वें संस्करण की योजना आजादी का अमृत महोत्सव के अनुरूप बनाई जा रही है और घरेलू रक्षा विनिर्माण उद्योग को उसके पूरे विस्तार के साथ इसमें शामिल किया जायेगा। इंडिया @75 को प्रदर्शित करने के लिये  25 अक्टूबर 2021 को रक्षा मंत्री ने डिफेक्सपो-2022 के लिये राजदूतों की गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में 97 देशों ने भाग लिया था । कई देशों के राजदूतों ने रक्षा मंत्री को उच्चतम स्तर पर भागीदारी का आश्वासन दिया।

रक्षा मंत्री ने ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मनाने के लिये रक्षा मंत्रालय के समर्पित सप्ताह के हिस्से के रूप में 13 दिसंबर, 2021 को रक्षा उत्पादन विभाग के कई प्रतिष्ठित कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इन आयोजनों में भारत की 75 साल की यात्रा और देश भर में 75 स्थानों पर सार्वजनिक प्रदर्शनियों के साथ-साथ रक्षा निर्माण में विकास को प्रदर्शित करने वाली एक आभासी प्रदर्शनी ‘पाथ टू प्राइड’ शामिल थी। इसके अलावा, जनता को जानकारी देने, शिक्षित करने और प्रेरित करने के लिए 7 अद्वितीय क्यूरेटेड ‘रक्षा संग्रहालय’ भी लॉन्च किये गये। समारोह के दौरान राष्ट्र के प्रति 75 प्रतिबद्धताओं को सूचीबद्ध करने वाली एक पुस्तिका का भी अनावरण किया गया।.

सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष से कल्याण योजनाएं

रक्षा सेवा अनुमान (डीएसई) बजट के अलावा, सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष (एएफएफडीएफ) शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं, ईएसएम और उनके आश्रितों के कल्याण और पुनर्वास के लिए धन का प्रमुख स्रोत है। सरकार इसके वित्त पोषण को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ताकि हम अधिक संख्या में ईएसएम/उनके आश्रितों की सेवा कर सकें। 2019-20 के दौरान, कुल संग्रह 47 करोड़ रुपये था, जो अब तक का सबसे अधिक संग्रह है। पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान महामारी के बावजूद करीब 32 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया गया था।

वित्तीय वर्ष 2019-20 से छात्रों के लिये छात्रवृत्ति की दर 24000 रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति वर्ष और छात्राओं के लिए 27,000 रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 36,000 रुपये प्रति वर्ष कर दी गयी है।

सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष (एबीसीडब्ल्यूएफ) का नाम बदलकर सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष (एएफबीसीडब्ल्यूएफ) कर दिया गया है ताकि वायु सेना और नौसेना के युद्ध हताहतों को भी लाभ दिया जा सके। 60% से कम विकलांगता वाले युद्ध हताहतों को छोड़कर जहाँ राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया गया है, बाकी सभी युद्ध हताहतों के लिए अतिरिक्त अनुग्रह राशि को मौजूदा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है।

किया गया व्यय और आगामी व्यय

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान एएफएफडीएफ से वित्त पोषित विभिन्न योजनाओं के तहत पूर्व सैनिकों/उनके आश्रितों के पक्ष में अब तक 37,815 लाभार्थियों को 133.31 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इनके अलावा, गंभीर बीमारियों के लिए वित्तीय सहायता के रूप में 1.67 करोड़ रुपये की राशि, विकलांगों के लिए मॉडिफाइड स्कूटर की खरीद और युद्ध स्मारक छात्रावासों और किरकी और मोहाली में पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्र को अनुदान भी एएफएफडीएफ के तहत दिया गया है।

प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएस) के तहत वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 10,268 लाभार्थियों को 35.27 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गयी है।

भारतीय सेना

भारतीय सेना मुख्य रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता और प्रभुत्व सुनिश्चित करने की भारत की सोच के अनुरूप अपनी परिचालन तैयारियों को बनाये रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उभरते और भविष्य के खतरों की समीक्षा के साथ उच्च प्रशिक्षण मानकों को बनाये रखते हुए उग्रवाद/आतंकवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाना शामिल है । कोविड महामारी की चुनौतियों के बावजूद, भारतीय सेना ने न केवल सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि इसकी परिचालन तत्परता पर कोई असर न पड़े।

एलएसी पर एक से अधिक क्षेत्रों में चीन के द्वारा बल पूर्वक यथास्थिति को बदलने के लिए एकतरफा और उत्तेजक कार्रवाइयों का पर्याप्त रूप से जवाब दिया गया है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न स्तरों पर बातचीत में लगी हुई हैं। निरंतर संयुक्त प्रयासों के बाद, कई स्थानों पर टकराव खत्म किया गया। उन क्षेत्रों जहां अभी भी स्थिति सामान्य होनी है  सैन्य बलों को पर्याप्त रूप से बढ़ाया गया है। सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर और पीएलए बलों के जमावड़े से निपटने के साथ क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने के सेना को मिले जनादेश को ध्यान में रखते हुए खतरे के आकलन और आंतरिक विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप बलों का पुनर्गठन और पुनर्निमाण हुआ है। सैन्य बल चीन के सेना के साथ दृढ़ता, धीरता और शांति पूर्वक भारत के अधिकारों की पवित्रता सुनिश्चित कर रहे हैं।

उत्तरी सीमाओं के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन और विकास समग्र और व्यापक तरीके से किया जा रहा है, जिसमें सड़कें, सभी मौसम में संपर्क के लिए सुरंगें, चार रणनीतिक रेलवे लाइनें, ब्रह्मपुत्र पर अतिरिक्त पुल,  भारत-चीन सीमा पर महत्वपूर्ण सड़कों पर पुलों का उन्नयन और आपूर्ति, ईंधन और गोला-बारूद के लिए भंडारण शामिल है। दोहरे उपयोग वाले इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए भी बड़े प्रयास किये गये हैं।

पांच साल से अधिक समय तक नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक तनाव की स्थिति के बाद, सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) फरवरी 2021 में नियंत्रण रेखा के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद और स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचे, जो निरंतर जारी है। भीतरी इलाकों में स्थिति उतार-चढ़ाव वाली और नाजुक बनी हुई है लेकिन नियंत्रण में है। विरोधी तत्वों ने अल्पसंख्यकों और गैर-स्थानीय लोगों को चुनिंदा लक्ष्य बनाकर घाटी में शांति भंग करने के अपने प्रयासों को फिर से सक्रिय कर दिया, हालांकि, ऐसे क्षेत्रों जहां शक्ति की जरूरत नहीं है वहां अग्रिम कदम उठाकर साथ ही सुरक्षा बलों द्वारा खुफिया सूचना आधारित सीधी कार्रवाई से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन के नापाक मंसूबों का मुकाबला करने में सक्षम रहे हैं।  कोविड 19 की वैश्विक महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में, भारतीय सेना ने न केवल नागरिक प्रशासन को, बल्कि सीधे नागरिक आबादी को भी, मेडिकल इवैक्यूवएशन, जरूरतमंदों को आवश्यक आपूर्ति और आम लोगों को कोविड 19 से जुड़ी बारीकियों के बारे में शिक्षित करके सहायता प्रदान की। सेना के मानवीय दृष्टिकोण की सभी ने सराहना की है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुल मिलाकर सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रही। सुरक्षा बलों द्वारा नापजोख कर, इंटेलिजेंस आधारित और लोगों के अनुकूल आतंकवाद-रोधी अभियानों के साथ एक मजबूत सुरक्षा रुख ने आतंकवादी समूहों के लिए उपलब्ध परिचालन स्थान को काफी कम कर दिया है, जिससे आतंकवादियों द्वारा शुरू की गई घटनाओं में लगातार गिरावट आई है। नतीजतन, अधिकांश विद्रोही समूह युद्धविराम में हैं। भारत-म्यांमार सीमा सुरक्षा से जुड़े समीकरणों का एक महत्वपूर्ण पहलू होने के कारण, असम राइफल्स द्वारा सीमा सुरक्षा को बढ़ाया जा रहा है और सेना का इरादा आने वाले समय में सीमा सुरक्षा के लिए तैनात बटालियनों की संख्या में लगातार वृद्धि करने का है।

स्वर्णिम विजय वर्ष

1971 के युद्ध के 50 गौरवशाली वर्षों और एक नये राज्य, बांग्लादेश के निर्माण के उपलक्ष्य में, पूरे देश में स्वर्णिम विजय वर्ष मनाया गया। सशस्त्र बलों ने इस बड़ी जीत के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये। इन आयोजनों में तीनों सेनाओं के सैनिकों, अधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठ कमांडरों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। भारतीय सेना ने भी स्वर्णिम विजय वर्ष को भव्य और शानदार तरीके से मनाया। नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के प्रांगण में 11-16 दिसंबर, 2021 को सेना द्वारा भव्य आयोजन किया गया। राजपथ पर 11-14 दिसम्बर, 2021 तक देशवासियों के लिए प्रेरक प्रदर्शनी और लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों की मौजूदगी और उत्साह देखने लायक था। कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा मंत्री ने किया और इसमें रक्षा राज्य मंत्री, सशस्त्र बलों के तीन प्रमुखों, रक्षा सचिव और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। 1971 के युद्ध के मुक्ति योद्धाओं के सम्मान के लिये, एक वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें रक्षा मंत्री ने बांग्लादेश के 31 मुक्ति योद्धाओं और 1971  युद्ध में भाग ले चुके भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत सैनिकों के साथ बातचीत की। 16 दिसंबर 2021 को इस कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री द्वारा एनडब्ल्यूएम में माल्यार्पण करने के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए स्वर्णिम विजय मशालों को रोशन करने के साथ हुआ।

भारतीय सेना की टुकड़ी ने अन्य सेवाओं के साथ 17 दिसंबर 2021 को 1971 के युद्ध में विजय के 50 वें वर्ष और बांग्लादेश के नये राष्ट्र के निर्माण के उपलक्ष्य में बांग्लादेश में आयोजित स्वर्णिम विजय दिवस परेड में भाग लिया । राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

तीन सेवाओं के बीच संयुक्तता

तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से तैयार की जाने वाली थिएटर कमांड पर अध्ययन संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रहा है। रीस्ट्रक्चरिंग से जुड़े कई  निर्णय लिये गये हैं और आने वाले महीनों में उनका प्रभाव दिखाई देगा। आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की दो धुरी पर एक साथ आगे बढ़ने का एक सचेत प्रयास जारी है। नतीजतन, स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र को प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ), आईडेक्स और शिक्षाविदों और स्टार्ट-अप के साथ संपर्क के रूप में समर्थन दिया जा रहा है।

मित्र देशों की सेनाओं के साथ सहयोग

अन्य मित्र देशों के साथ सेनाओं के बीच संबंध गहराई के साथ और अच्छी तरह से स्थापित हैं। यह दोनों सेनाओं के अधिकारियों और जवानों के साथ सभी तरह की बातचीत और आदान-प्रदान की अनुमति देता है। दोनों पक्षों की ओर से उच्च स्तरीय यात्राएं ऐसे संबंधों का परिणाम हैं। इन देशों के साथ सहयोग के दायरे में तकनीकी सहयोग और विशिष्ट क्षेत्रों में प्रशिक्षण शामिल है। भारतीय सेना पड़ोसी देशों की सेनाओं को उनके द्वारा अनुरोधित सहयोग के क्षेत्रों में समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशिक्षण, पेशेवर विशेषज्ञता और विश्वसनीय रक्षा प्रौद्योगिकी के भारतीय सेना के मानकों के कारण, इन देशों द्वारा भारतीय सेना और संबंधित सेवाओं के साथ सहयोग मांगा जा रहा है। जब आवश्यक हुआ तो हम अपने पड़ोसियों के अनुरोधों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम भी चले हैं। भारत के रणनीतिक साझेदारों के साथ रक्षा सहयोग रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र पर केंद्रित है जो कि  ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के साथ-साथ भारतीय सेना के क्षमता विकास का समर्थन करेगा।

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान

विभिन्न शांति अभियानों में भारतीय सेना की भागीदारी ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शांति सुनिश्चित की है और भारत को संयुक्त राष्ट्र के मामलों में एक विशेष जगह बनाने में मदद की है। भारतीय सेना के लगभग 5,300 कर्मी वर्तमान में आठ संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मिशन में तैनात हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में तीसरा सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है। इसने संयुक्त राष्ट्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों जैसे न्याय और समानता सुनिश्चित करने की बारीक समझ विकसित की है और इन क्षमताओं की दुनिया भर में सराहना की जा रही है। भारत में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के निर्माण पर विशेष जोर देने के साथ ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सेना का आधुनिकीकरण

सेना का आधुनिकीकरण विशेष रूप से तीनों सेनाओं को दी गयी आपातकालीन खरीद शक्तियों द्वारा तेज गति से आगे बढ़ रहा है । भारतीय सेना का ध्यान प्लेटफॉर्म और क्षमताओं पर समान रूप से है। आकाश प्रणाली, सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआरएसएएम), मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर (एलयूएच) और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) भारतीय उद्योग के द्वारा तैयार किये गये स्वदेशी हाई-टेक और आधुनिक उपकरण के बेहतरीन उदाहरण हैं। पिछले 3-4 वर्षों के दौरान 93,253 करोड़ रुपये के कुल 62 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किये गये। पूरे हो चुके अनुबंधों के अलावा, वर्तमान में 1,52,387 करोड़ रुपये मूल्य की 94 योजनाएं खरीद प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें से 30,768 करोड़ रुपये मूल्य की 15 योजनाएं अग्रिम चरण में हैं, जिनमें सक्षम प्राधिकारियों द्वारा अंतिम मंजूरी का इंतजार है। नये खरीद मामलों की शुरुआत के लिए पिछले एक साल में 32,609 करोड़ रुपये के कुल मूल्य की 35 एक्सेपटेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) प्राप्त की गयी हैं,जो कि पिछले वर्षों से आगे बढ़ाये गये अनुबंधों के अतिरिक्त हैं।

ऑनरेरी कमीशन प्रदान करने के अनुपात में बढ़त

13 अगस्त 2021 को ऑनरेरी कमीशन (ऑनरेरी लेफ्टिनेंट और अन्य सेवाओं में समकक्ष रैंक) के दिये जाने के अनुपात में 12 प्रति हजार उम्मीदवारों से 15 प्रति हजार उम्मीदवारों तक की वृद्धि की गयी है। इससे बड़ी संख्या में जूनियर कमीशंड अधिकारी उच्च रैंक और बेहतर वित्तीय लाभ के साथ सेवानिवृत्त हुए हैं।

पनडुब्बियों का कमीशन

दो परिष्कृत और शक्तिशाली प्लेटफॉर्म करंज और वेला को क्रमशः 10 मार्च 21 और 25 नवंबर 21 को कमीशन किया गया था, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री , अत्याधुनिक हथियार लगे हैं जो पश्चिमी समुद्र तट में हमारे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए उपयुक्त हैं।

आईएन एलसीयू एल58 (यार्ड 2099) कमीशनिंग

आईएन एलसीयू एल58 को पोर्ट ब्लेयर में 31 मार्च, 2021 को लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे, कमांडर-इन-चीफ, ए एंड एन कमांड द्वारा कमीशन किया गया था। जहाज जीआरएसई, कोलकाता द्वारा निर्मित आठ एलसीयू एमके चतुर्थ जहाजों की श्रृंखला में अंतिम पोत है।

 

आईएनएएस 323 को कमीशन मिला

एएलएच एमके तृतीय के पहले स्क्वाड्रन को आईएनएस हंसा में आईएनएएस 323 के रूप में 19 अप्रैल, 2021 को श्री श्रीपद यासो नाइक, रक्षा राज्य मंत्री द्वारा कमीशन किया गया था।

एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर सेवा में शामिल

29 अक्टूबर, 2021 को आईएनएस शिकारा में दो उन्नत हल्के हेलीकाप्टरों वाली एक नई उड़ान शामिल की गई।

सेवा से मुक्ति

निम्नलिखित नौसेना जहाजों को 2021 में सेवामुक्त कर दिया गया:

क्रमांक समुद्री जहाज जहाज का प्रकार सेवामुक्त करने की तिथि
(क) आईएन एफएसी टी81 फास्ट अटैक क्राफ्ट 28 जनवरी 21
(ख) राजपूत डिस्ट्रॉयर 21 मई 21
(ग) सांध्यक सर्वेक्षण जहाज 04 जून 21
(घ) आईएन एफएसी टी 80 फास्ट अटैक क्राफ्ट 07 अक्टूबर 21
(च) खुखरी मिसाइल कार्वेट 23 दिसंबर 21

विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जाना

लंबी दूरी के सटीक हमले की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विशिष्ट प्रौद्योगिकियों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल किया जा रहा है। लक्षित करने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए स्वयं लक्ष्य तलाश कर उसे नष्ट करने में समर्थ हथियारों के भूमि और समुद्र आधारित संस्करणों को शामिल किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परिचालन क्षमता बढ़ाने और संचालन में लचीलेपन को बढ़ाने के लिए कंटेनर के जरिये इस्तेमाल योग्य मिसाइल प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है।

भारतीय नौसेना के लिए एकीकृत मानवरहित रोडमैप

विश्व स्तर पर विकसित हो रहे तकनीकी परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नौसेना के द्वारा आईएन के लिए एक एकीकृत मानव रहित रोडमैप तैयार किया गया है जिसे रक्षा मंत्री द्वारा 18 अक्टूबर, 2021 को कमांडरों के सम्मेलन के दौरान जारी किया गया था। इसका ही एक अवर्गीकृत संस्करण उद्योग द्वारा उनके अनुसंधान एवं विकास प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने के संदर्भ में तैयार किया जा रहा है।.

फ्रंटलाइन कॉम्बैट प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की नियुक्ति

महिला अधिकारियों को आईएनएस विक्रमादित्य सहित अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर तैनात किया जा रहा है, जिसमें पुरुष अधिकारियों के समकक्ष 4 महिला अधिकारी (02 एनएआई प्रशिक्षु अधिकारियों सहित) तैनात हैं। वर्तमान में जहाजों पर 28 महिला अधिकारियों की नियुक्ति हैं और इनकी संख्या में लगातार वृद्धि की जा रही है। तदनुसार, अतिरिक्त महिला अधिकारियों को समायोजित करने के लिए जहाजों पर इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जा रहा है। जेंडर सेंसिटिव अवसर प्रदान करने की मौजूदा नीति को ध्यान में रखते हुए जहाजों पर लगातार बड़ी संख्या में महिला चिकित्सा अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है।

महिलाओं की विदेश के ऑपरेशंस में तैनाती

इसके अलावा, पहली महिला अधिकारी को सितंबर, 2020 में पहली डोर्नियर तैनाती के लिए संचालन दल के हिस्से के रूप में मालदीव में प्रतिनियुक्त किया गया था। महिला अधिकारियों को 2021 में रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) स्ट्रीम में भी शामिल किया गया है और पहला अधिकारी वर्तमान में आरपीए कन्वर्जन प्रशिक्षण से गुजर रहा है।

पूर्वी लद्दाख

पूर्वी लद्दाख की परिस्थितियों के दौरान भारतीय वायु सेना(आईएएफ) ने किसी भी और सभी स्थिति से निपटने के लिये अपने सेंसर, हवाई प्लेटफॉर्म और सहयोगी उपकरणों को इस क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया। इलाके और मौसम द्वारा उत्पन्न सीमाओं और चुनौतियों से उपयुक्त अनुकूलन और तैयारी के साथ निपटा गया था। आईएएफ ने भारतीय सेना को रसद और हवाई रखरखाव सहायता भी प्रदान की। आईएसआर के संदर्भ में आईएएफ और आईए की आवश्यकताओं को भी प्रभावी ढंग से पूरा किया गया।

भारतीय हवाई क्षेत्र के बेहतर उपयोग के लिए आईएएफ का योगदान

भारतीय वायु सेना और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संयुक्त रूप से हवाई क्षेत्र के कुशल उपयोग के लिये एक तंत्र का गठन किया है। इसे हासिल करने के लिये, प्रतिबंधित हवाई क्षेत्रों से ट्रांजिट की सुविधा के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर हवाई क्षेत्र प्रबंधन कक्ष बनाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप नागरिक विमानों के लिए उड़ान के समय में कमी आई है जिससे एयरलाइंस के लिये बचत हुई है और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आई है। एयरस्पेस मैनेजमेंट सेल (एएमसी) को संयुक्त रूप से भारतीय वायुसेना और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के कर्मियों द्वारा संचालित किया जाता है।

नागरिक उड्डयन की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए हवाई क्षेत्र के साथ-साथ, आईएएफ भी अपने हवाई अड्डों को साझा करने के लिये एमओसीए के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। इसी के अनुसार, उत्तर पूर्वी क्षेत्र में 53 भारतीय वायुसेना हवाई क्षेत्रों और 08 उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) में से 39 को नागरिक अनुसूचित उड़ानों को समायोजित करने के लिये संयुक्त उपयोग के लिये खोल दिया गया है। इसमें क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना-उड़े देश का आम नागरिक (आरसीएस-उड़ान) के तहत उड़ान संचालन भी शामिल है।

निष्कर्ष

आईएएफ की सोच ‘संघर्ष के स्पेक्ट्रम में रणनीतिक पहुंच और क्षमताओं को हासिल करना है जो सैन्य कूटनीति के उद्देश्य को पूरा करने, राष्ट्र निर्माण और भारत के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र में शक्ति स्थापित करने को सक्षम बनाता है।’ इसके लिए, आईएएफ एक केंद्रित आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है जिसकी योजना में एक क्षेत्रीय स्ट्रेटजिक एयरोस्पेस ताकत बनने के साथ सभी पहलुओं में पूरी क्षमता हासिल करना है। आईएएफ केंद्रित, निरंतर और विकसित स्वदेशीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की ओर प्रयास कर रहा है। आईएएफ विदेश निर्मित रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता को उत्तरोत्तर कम करने और देश की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन करने के लिए प्रयास जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

समुद्र में असाधारण बहादुरी के लिए आईएमओ पुरस्कार

हर साल, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) समुद्र में असाधारण बहादुरी के लिए पुरस्कार प्रदान करता है। पुरस्कार का उद्देश्य उन लोगों के लिए एक अद्वितीय, अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करना है, जो अपनी जान के जोखिम पर, समुद्र में उत्कृष्ट साहस का प्रदर्शन करते हुए, असाधारण बहादुरी के कार्य करते हैं। यह पुरस्कार व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूहों (जैसे जहाज / एसक्यूएन / एमआरसीसी / एमआरएससी / एमआरएसएससी आदि) को प्रदान किया जाता है, जो समुद्र में जीवन को बचाने के प्रयास में या समुद्री पर्यावरण को नुकसान को रोकने या कम करने के प्रयास में असाधारण बहादुरी का कार्य करते हैं। पुरस्कार के विजेता को एक पदक मिलता है, जिसके साथ असाधारण बहादुरी के कार्य के बारे में बताते हुए एक प्रमाण पत्र दिया जाता है। भारत सरकार ने साल 2014 से ‘समुद्र में असाधारण बहादुरी के लिए आईएमओ पुरस्कार’ के लिए हर साल आईसीजी से दो नामांकन भेजने की मंजूरी दी है। श्रीलंका तट पर आग से प्रभावित और चालक दल द्वारा छोड़े गए वीएलसीसी एमवी न्यू डायमंड के खींचे जाने के लिये तैयार करने पर सारंग की चार सदस्यों की आईसीजी टीम के नाम डीजीएस द्वारा आईएमओ को आईएमओ बहादुरी पुरस्कार 2021 के लिए भारत के नामांकन के रूप में भेजा गया था। आईएमओ ने आईसीजी टीम को ‘सर्टिफिकेट ऑफ कमेंडेशन’ से सम्मानित किया है।

29 एमआरएससीएस की स्थापना के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति

एमओडी, भारत सरकार ने एमओडी पत्र संख्या 17(18)/2020 डी (सीजी) दिनांक 24 जून 21 के माध्यम से 43.89 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ जिसमें कैपिटल हेड के रूप में  22.11 करोड़ और रेवेन्यू हेड के तहत 21.78 करोड़ रुपये हैं, 29 एमआरएससीएस की स्थापना के लिए सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन प्रदान किया।

.आईसीजीएस वज्र की विदेश में तैनाती (ओएसडी)

आईसीजीएस वज्र इंटीग्रल हेलीकॉप्टर (सीजी-817), आईसीजीएस अपूर्व और 747 स्क्वाड्रन (सीजी), सीजीएई, कोच्चि से सीजीडीओ के साथ भारत, मालदीव और श्रीलंका के तट रक्षकों के बीच संबंधित देशों के तटरक्षक बल के साथ पेशेवर और कामकाजी संबंधों को मजबूत करने के लिए त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास दोस्ती-एक्सवी आयोजित करने के लिए 20 से 24 नवंबर 21 तक मालदीव का दौरा किया।

16 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच एमके-तृतीय)

आईसीजी अपने चार्टर जिसमें निगरानी, ​​​​इंटरडिक्शन, सर्च एंड रेस्क्यू, मेडिकल इवैक्यूएशन (मेड्इवेक), हताहतों को निकालना (कॉज़इवेक्) आदि शामिल हैं, को पूरा करने के लिए फिक्स्ड और रोटरी विंग एयरक्राफ्ट का संचालन करता है। बढ़ते समुद्री व्यापार और हमारे मेरीटाइम जोन में व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ और ज्यादा निगरानी की जरूरत है, जिसके लिए फिक्स्ड और रोटरी विंग प्लेटफॉर्म दोनों के बेड़े में वृद्धि की आवश्यकता है। इस दिशा में, आईसीजी को 16 एएलएच एमके-तृतीय विमानों की आपूर्ति का अनुबंध 29 मार्च 2017 को एचएएल, बैंगलोर के साथ संपन्न हुआ। हेलीकॉप्टरों में समुद्र की भूमिकाओं के लिए निगरानी रडार, ईओ -आईआर पॉड, मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (एमआईसीयू), ऐआईएस, टीसीएएस और ऐडीईएलटी आदि जैसे 19 अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं।

प्रमुख कार्यक्रम

आईसीजी द्वारा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ का समारोह

हमारी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में और  “आजादी का अमृत महोत्सव” की दिशा में, 15अगस्त 21को भारतीय तटरक्षक बल ने 100 बसे हुए और निर्जन द्वीपों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

आईसीजीएस सार्थक की कमीशनिंग

महानिदेशक के नटराजन, पीवीएसएम, पीटीएम, टीएम, डीजीआईसीजी ने 28 अक्टूबर 21 को कॉमसीजी (डब्ल्यू), डीडीजी (पीएंडपी) और सीएमडी (जीएसएल) की उपस्थिति में आईसीजीएस सार्थक को कमीशन किया। आईसीजीएस सार्थक 105 मीटर ऑफशोर पेट्रोल वेसल (ओपीवी) है जिसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ के प्रधान मंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह पोत भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री निगरानी कौशल को महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान करेगा।

उन्नत हल्के हेलीकाप्टर (एएलएच) एमके-तृतीय का ई-इंडक्शन

ऑपरेशन से जुड़ी तैयारियों में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हुए 12 जून 21 को डॉ. अजय कुमार, रक्षा सचिव, भारत सरकार द्वारा 3 उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके-तृतीय को महानिदेशक के नटराजन, पीवीएसएम, पीटीएम, टीएम, डीजीआईसीजी और केन्द्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईसीजी में शामिल किया गया।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन

मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन एमके-1ए  को सौंपना और सप्लाई का ऑर्डर

एमबीटी अर्जुन एमके-1ए में एमके-1 की तुलना में कई बहुमुखी और बेहतर सुविधाएं शामिल की गयी हैं, जो इसे और अधिक बेहतर युद्धक टैंक बनाता है। इन खासियतों में चालक दल की सुविधा, उन्नत लैंड नेविगेशन सिस्टम और टैंक कमांडर और ड्राइवर दोनों के लिए रात में देख सकने की क्षमताओं में वृद्धि खास हैं। यह एक अत्यधिक शक्तिशाली और भरोसेमंद युद्धक मशीन है।

एमबीटी ‘अर्जुन’ एमके-1ए को 14 फरवरी 2021 को प्रधान मंत्री द्वारा भारतीय सेना को सौंप दिया गया था और रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने 23 सितंबर, 2021 को भारतीय सेना के लिए 118 मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) अर्जुन एमके-1ए की आपूर्ति के लिए भारी वाहन कारखाने (एचवीएफ), अवडी, चेन्नई को एक ऑर्डर दिया था।  7,523 करोड़ रुपये का यह ऑर्डर रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और बढ़ावा देगा और यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

डीआरडीओ के द्वारा डिजाइन और विकसित उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट ‘शक्ति’ को भारतीय नौसेना को सौंपा गया

उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) प्रणाली ‘शक्ति’ को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएलआरएल) हैदराबाद जो कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला है द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, यह भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों के लिए पारंपरिक और आधुनिक राडार को डिटेक्ट, इंटरसेप्ट, क्लासिफिकेशन, आइडेंटिफिकेशन के साथ साथ उन्हें जाम करने का काम करेगी। शक्ति ईडब्ल्यू प्रणाली समुद्र में युद्ध की स्थिति में भारतीय जहाजों के इलेक्ट्रॉनिक प्रभुत्व और उत्तरजीविता सुनिश्चित करने और आधुनिक रडार और जहाज-रोधी मिसाइलों के खिलाफ रक्षा की एक इलेक्ट्रॉनिक परत प्रदान करेगी। यह प्रणाली भारतीय नौसेना की पिछली पीढ़ी के ईडब्ल्यू सिस्टम की जगह लेगी। यह प्रणाली भारतीय नौसेना को 19 नवंबर 2021 को प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सौंपी गई थी।

डीआरडीओ ने भारतीय वायु सेना को वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली सौंपी

एमआरएसएएम (आईएएफ) एक उन्नत नेटवर्क केंद्रित लड़ाकू वायु रक्षा प्रणाली है जिसे डीआरडीओ और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा संयुक्त रूप से भारतीय उद्योग के सहयोग से विकसित किया गया है जिसमें एमएसएमई सहित निजी और सार्वजनिक क्षेत्र शामिल हैं। भारत की रक्षा क्षमताओं को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देने के लिये, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की पहली सुपुर्दगी इकाई (एफयू) को रक्षा मंत्री की उपस्थिति में 09 सितंबर, 2021 को भारतीय वायुसेना को सौंप दिया गया।

डीआरडीओ द्वारा विकसित उत्पादों को सशस्त्र बलों को सौंपना

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 14 दिसंबर 2021 को डीआरडीओ भवन, नई दिल्ली में आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित एक कार्यक्रम  रक्षा मंत्रालय के प्रतिष्ठित सप्ताह में सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के द्वारा विकसित पांच उत्पाद सौंपे

उन्होंने सात सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते भी सौंपे। इससे पहले डीआरडीओ ने “भविष्य की तैयारी” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जिसमें सशस्त्र बलों के उप प्रमुखों और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अपने विचार साझा किए। सशस्त्र बलों और गृह मंत्रालय को सौंपे गए उत्पाद एंटी-ड्रोन सिस्टम, मॉड्यूलर ब्रिज, स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन, चैफ वेरिएंट और हल्के फायर फाइटिंग सूट हैं।

उन्नत चैफ प्रौद्योगिकी

शत्रुओं के रडार के खतरों और दुश्मन मिसाइल के हमले के खिलाफ नौसेना के जहाजों के साथ-साथ भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए डीआरडीओ द्वारा उन्नत चैफ प्रौद्योगिकी विकसित की गयी है। डीआरडीओ की रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर ने उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल), डीआरडीओ की पुणे स्थित प्रयोगशाला के सहयोग से उन्नत चैफ सामग्री और चैफ कार्ट्रिज-118/आई विकसित किया है, जो सेनाओं की  आवश्यकताओं को पूरा करता है। चैफ एक पैसिव एक्सपेंडेबल इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर तकनीक है जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में नौसेना के जहाज को दुश्मन के रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) मिसाइल सीकर्स से बचाने के लिए किया जाता है। उन्नत चैफ प्रौद्योगिकी का सफल विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है।

सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर)

सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट को डीआरडीओ द्वारा विकसित और इसका उड़ान परीक्षण किया गया है। परीक्षण के दौरान, बूस्टर मोटर का उपयोग करके एयर लॉन्च परिदृश्य को सिम्युलेट किया गया। इसके बाद, नोज़ल-रहित बूस्टर ने इसे रैमजेट संचालन के लिए आवश्यक मैक नंबर तक बढ़ा दिया। एसएफडीआर प्रपल्शन प्रौद्योगिकी की सफलता एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो देश में लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

नई पीढ़ी की अग्नि पी बैलिस्टिक मिसाइल का पहला प्रक्षेपण

नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि पी का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। अग्नि पी अग्नि श्रेणी की मिसाइलों का एक नई पीढ़ी का उन्नत संस्करण है।

एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन (एआईपी) सिस्टम

डीआरडीओ ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित एआईपी सिस्टम के प्रदर्शन के लिए एक पूर्ण पैमाने पर भूमि-आधारित प्रोटोटाइप (एलबीपी) विकसित किया है, जो भारतीय नौसेना द्वारा शामिल किये जाने पर पारंपरिक पनडुब्बियों के पानी के भीतर रहने की क्षमता को बढ़ाएगा। स्वदेशी प्रणाली ने 14 दिन के क्षमता परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के एआईपी सिस्टम अपनाये जा रहे हैं, डीआरडीओ का ईंधन सेल आधारित एआईपी अद्वितीय है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन उत्पन्न होता है।

लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (एलआरएसएएम)

एलआरएसएएम प्रणाली को भारतीय नौसेना की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिये डीआरडीओ और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई), इज़राइल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमान, सबसोनिक और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों सहित विभिन्न हवाई लक्ष्यों के खिलाफ प्वांइट और एरिया डिफेंस प्रदान कर सकती है। इसे सक्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) सीकर के साथ डिजाइन किया गया है ताकि लक्ष्य को नष्ट करने की  ऊंची संभावना के साथ लक्ष्य की पहचान, उसकी ट्रैकिंग, इंगेजमेंट और उसे नष्ट किया जा सके। दी गई समय सीमा के भीतर डिलीवरी को पूरा करने के लिए एलआरएसएएम के अंतिम उत्पादन बैच को हरी झंडी दिखाई गई।

एटीजीएम हेलिना (सेना संस्करण) और ध्रुवस्त्र (वायु सेना संस्करण)

हेलिना और ध्रुवस्त्र तीसरी पीढ़ी की लॉक ऑन बिफोर लॉन्च (एलओबीएल) फायर एंड फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें हैं जो लक्ष्य को सीधे भेदने के साथ-साथ टॉप अटैक मोड में भी भेद सकती हैं। यह प्रणाली में हर मौसम में दिन और रात काम करने की क्षमता है और यह पारंपरिक कवच के साथ-साथ विस्फोटक रिएक्टिव कवच के साथ युद्धक टैंकों को हरा सकता है। यह दुनिया के सबसे उन्नत टैंक रोधी हथियारों में से एक है।

मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम)

आत्मनिर्भर भारत और भारतीय सेना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में, डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन, फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटीटैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) का उड़ान परीक्षण किया। मिसाइल में उन्नत एवियोनिक्स के साथ-साथ छोटे आकार का अत्याधुनिक इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर शामिल है।

कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का लंबवत प्रक्षेपण  (वीएल-एसआरएसएएम)

मिसाइल को भारतीय नौसेना के लिए समुद्र के करीब उड़ान भर रहे लक्ष्यों सहित बेहद नजदीक पहुंच चुके विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए विकसित किया गया है। मिसाइल के दो लंबवत प्रक्षेपण किये गये और दोनों अवसरों पर, वीएल-एसआरएसएएम ने सटीकता के साथ सिम्युलेटेड लक्ष्यों को रोक दिया। मिसाइलों का परीक्षण न्यूनतम और अधिकतम रेंज के लिये किया गया था।

नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी)

नई पीढ़ी की सतह से हवा में वार करने वाली आकाश-एनजी मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण भूमि-आधारित प्लेटफॉर्म से किया गया था, जिसमें सभी हथियार प्रणाली  तत्व जैसे मल्टीफंक्शन रडार, कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉन्चर तैनाती में जरूरत के आधार पर भाग ले रहे थे। मिसाइल ने तेजी से और फुर्तीले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए आवश्यक उच्च गतिशीलता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। आकाश-एनजी हथियार प्रणाली भारतीय वायुसेना की वायु रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाली साबित होगी।

आकाश प्राइम मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण

आकाश मिसाइल के एक नये संस्करण – ‘आकाश प्राइम’ का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। मौजूदा आकाश प्रणाली की तुलना में, आकाश प्राइम बेहतर सटीकता के लिये एक स्वदेशी सक्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) सीकर से लैस है।

सतह से हवा में मार करने वाली कम दूरी के मिसाइल का वर्टिकल लॉन्च  उड़ान परीक्षण

शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल का वर्टिकल लॉन्च 07 दिसंबर 2021 को सफलतापूर्वक किया गया था। लॉन्च को बहुत कम ऊंचाई पर एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के खिलाफ एक वर्टिकल लॉन्चर से किया गया था। भारतीय नौसेना के जहाजों से मिसाइल के भविष्य के प्रक्षेपण के लिए आवश्यक कंट्रोलर, केनेस्टराइज्ड फ्लाइट व्हीकल, हथियार नियंत्रण प्रणाली आदि के साथ वर्टिकल लांचर यूनिट सहित सभी हथियार प्रणाली घटकों के एकीकृत संचालन को मान्य करने के लिये प्रणाली का लॉन्च किया गया था। पहला परीक्षण 22 फरवरी 2021 को आयोजित किया गया था और यह लॉन्च कॉन्फ़िगरेशन और एकीकृत संचालन के स्थिर प्रदर्शन को साबित करने  के लिए प्रमाणीकरण परीक्षण है।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का वायु संस्करण

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के वायु संस्करण का 08 दिसंबर 2021 को सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमके-आई से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। ब्रह्मोस भारत (डीआरडीओ) और रूस (एनपीओएम) के बीच सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास, उत्पादन और विपणन के लिए एक संयुक्त उद्यम है। यह लॉन्च ब्रह्मोस के विकास में एक प्रमुख मील का पत्थर है। यह सिस्टम को देश के भीतर वायु-संस्करण ब्रह्मोस मिसाइलों के बड़ी संख्या में उत्पादन की मंजूरी देता है।

पिनाका एक्सटेंडेड रेंज सिस्टम, एरिया डिनाइयल म्यूनिशंस और नए स्वदेशी फ्यूज के लिए सफल परीक्षण किये गये

पिनाका एक्सटेंडेड रेंज (पिनाका-ईआर), एरिया डिनाइयल म्यूनिशंस (एडीएम) और स्वदेशी रूप से विकसित फ़्यूज़ के सफल परीक्षण विभिन्न परीक्षण रेंज में किये गये हैं। पिनाका-ईआर मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इस प्रणाली को संयुक्त रूप से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशालाओं – आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ऐआरडीई), पुणे और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल), पुणे के द्वारा डिजाइन किया गया है।

डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी स्टैंड-ऑफ एंटी टैंक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 11 दिसंबर 2021 को स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित हेलीकॉप्टर द्वारा लॉन्च स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक (एसएएनटी) मिसाइल का उड़ान परीक्षण किया। मिसाइल एक अत्याधुनिक एमएमडब्लू  सीकर से लैस है जो सुरक्षित दूरी से उच्च परिशुद्धता के साथ स्ट्राइक क्षमता प्रदान करता है। यह हथियार 10 किलोमीटर तक की सीमा में लक्ष्य को बेअसर कर सकता है। एसएएनटी मिसाइल को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई), हैदराबाद द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के समन्वय और उद्योगों की भागीदारी के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है।

सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड टारपीडो सिस्टम

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड टॉरपीडो सिस्टम को 13 दिसंबर 2021 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम अगली पीढ़ी की मिसाइल-आधारित स्टैंडऑफ टॉरपीडो डिलीवरी सिस्टम है। इस प्रणाली को टारपीडो की पारंपरिक सीमा से कहीं अधिक पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

 उन्नत रेंज के 122 एमएम कैलिबर रॉकेट

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 25 जून 2021 को एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) से स्वदेशी रूप से विकसित 122 मिमी कैलिबर रॉकेट के उन्नत रेंज संस्करणों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इन रॉकेटों को सेना के अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया गया है और ये 40 किलोमीटर तक के लक्ष्य को नष्ट कर सकते हैं। रॉकेट सिस्टम को पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल) के द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है इसके निर्माण में इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड, नागपुर की मदद ली गई है।

स्वदेशी रूप से विकसित स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार का उड़ान परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा संयुक्त रूप से स्वदेश में विकसित स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के दो उड़ान परीक्षण किए गए हैं। उपग्रह नेविगेशन और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर पर आधारित दो अलग-अलग कन्फिगरेशन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। देश में पहली बार इस वर्ग के हथियार का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर आधारित उड़ान परीक्षण किया गया है। इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। इस हथियार को भारतीय वायुसेना के विमान से लॉन्च किया गया था।

अभ्यास हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (हीट) का उड़ान परीक्षण

अभ्यास डीआरडीओ द्वारा विकसित किया जा रहा एक उच्च गति वाला मानवरहित हवाई लक्ष्य है। अभ्यास का कन्फिगरेशन एक इन-लाइन छोटे गैस टरबाइन इंजन पर डिज़ाइन किया गया है और यह नेविगेशन और गाइडेंस के लिए स्वदेशी रूप से विकसित एमईएमएस आधारित नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करता है। अभ्यास के तीन सफल उड़ान परीक्षण आईटीआर बालासोर, ओडिशा से किए गए। परीक्षण अभियान के दौरान, उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया था। वाहन को विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए लक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

डीआरडीओ और भारतीय सेना द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पहली स्वदेशी 9एमएम मशीन पिस्टल

इन्फैंट्री स्कूल, महू और डीआरडीओ के आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई), पुणे ने संयुक्त रूप से चार महीने के रिकॉर्ड समय में 9 मिमी मशीन पिस्टल का डिजाइन और विकास किया।  भारी हथियार टुकड़ी, कमांडरों के टैंक और विमान के चालक दल, ड्राइवर / डिस्पैच राइडर, रेडियो / रडार ऑपरेटरों, करीबी लड़ाई, उग्रवाद विरोधी और आतंकवाद विरोधी अभियानों आदि के लिए इस हथियार में व्यक्तिगत हथियार के रूप में बड़ी क्षमता है। हथियार का नाम “असमी” है जिसका अर्थ है ” गौरव”, “आत्म-सम्मान” और “कड़ी मेहनत”।

हल्के बुलेट प्रूफ जैकेट

सैनिकों को और अधिक सुविधा के लिए, भारतीय सेना के लिए 9.0 किलोग्राम वजन का हल्का बुलेट प्रूफ जैकेट (बीपीजे) विकसित किया गया है। इस महत्वपूर्ण विकास का महत्व इस तथ्य में निहित है कि बीपीजे का वजन में हर एक ग्राम का घटना सैनिकों को सुरक्षित रखते हुए उनकी सुविधा को बढ़ाने के लिये महत्वपूर्ण है। यह तकनीक मध्यम आकार के बीपीजे के वजन को 10.4 किलोग्राम से घटाकर 9.0 किलोग्राम कर देती है।

डीआरडीओ और रक्षा अनुसंधान एवं विकास निदेशालय, इज़राइल के बीच इनोवेशन के लिये द्विपक्षीय समझौता

बढ़ते भारत-इजरायल तकनीकी सहयोग के एक ठोस प्रदर्शन के रूप में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रक्षा अनुसंधान और विकास निदेशालय (डीडीआर एंड डी), रक्षा मंत्रालय, इज़राइल ने दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों और ड्रोन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स, बायोसेंसिंग, ब्रेन-मशीन इंटरफेस, एनर्जी स्टोरेज, वियरेबल डिवाइसेज, नेचुरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों के उत्पादों में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के स्टार्टअप्स और एमएसएमई के आरएंडडी में तेजी लाने के लिये एक द्विपक्षीय इनोवेशन समझौता (बीआईए)  किया है।

निष्कर्ष

डीआरडीओ ने मार्गदर्शक होने के नाते जटिल रक्षा प्रौद्योगिकियों, हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में काफी प्रगति की है। संगठन उन्नत प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक पथ प्रदर्शक रहा है और इसने आत्मनिर्भर भारत को गति दी है। इस प्रयास में, संगठन द्वारा शुरू की गई पहलों, दिशानिर्देशों और नीतियों ने एक खास वातावरण बनाया है। डीआरडीओ अकादमिक, एमएसएमई, उत्पादन एजेंसियों, स्टार्टअप, टीडीएफ भागीदारों आदि के साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी का हिस्सा है। यह सक्षम इकोस्फेयर रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करेगा; नये तकनीकी क्षेत्र में सुसंगत रूप से कार्य करेगा; इस्तेमाल योग्य बेहतर उत्पादों के लिये प्रयास करेगा; रोजगार सृजित करने और उद्योग में नई प्रतिभाओं को आगे लाने का काम करेगा।

डीआरडीओ ने कोविड से निपटने के लिए कई तकनीकों और उत्पादों का भी विकास किया है और महामारी के चुनौतिपूर्ण समय के दौरान वेंटिलेटर, पीपीई, मास्क, अस्पतालों, कोविड दवा और ऑक्सीजन संयंत्रों के स्वदेश में विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन सभी सक्षम तकनीकों ने देश को आत्मनिर्भर भारत के युग में पहुँचाया है

रक्षा मंत्री ने चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बीआरओ द्वारा निर्मित 24 पुलों और तीन सड़कों को वर्चुअली राष्ट्र को समर्पित किया

रक्षा मंत्री ने 28 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली से एक वर्चुअल माध्यम से हुए कार्यक्रम से चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बीआरओ द्वारा निर्मित 24 पुलों और तीन सड़कों को राष्ट्र को समर्पित किया। 24 पुलों में से नौ जम्मू और कश्मीर में हैं; लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पांच-पांच; उत्तराखंड में तीन और सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक हैं। तीन सड़कों में से दो लद्दाख में और एक पश्चिम बंगाल में है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत के पहले स्वदेशी क्लास 70 140-फीट डबल-लेन मॉड्यूलर ब्रिज का उद्घाटन था, जिसे 11,000 फीट की ऊंचाई पर फ्लैग हिल डोकला, सिक्किम और लद्धाख में उमलिंग ला दर्रे पर 19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चिसुमले-डेमचोक रोड पर बनाया गया था जिसे दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी प्राप्त है।

सबसे ऊंचाई पर स्थित मोटर योग्य सड़क के निर्माण का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

बीआरओ ने पूर्वी लद्दाख में उमलिंग ला दर्रे पर समुद्र तल से 19,024 फीट की ऊंचाई पर सड़क का निर्माण किया है, जो अब अधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क बन गयी है,ये रिकॉर्ड पहले बोलीविया में ज्वालामुखी उटुरुंकु के रास्ते में 18,953 फीट पर स्थित एक सड़क के पास था।. 16 नवंबर 2021 को, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, यूनाइटेड किंगडम के आधिकारिक निर्णायक द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में, बीआरओ को पुरस्कार प्रदान किया गया, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी, वीएसएम, डीजीबीआर ने बीआरओ की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया। चिस्मुले को डेमचोक से जोड़ने वाली 52 किमी लंबी सड़क एलएसी से लगभग 15 किमी दूर है और सामरिक महत्व रखती है। इसके निर्माण से स्थानीय लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बेहतर होने की उम्मीद है और लद्दाख के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।.

सेला सुरंग का अंतिम विस्फोट

14 अक्टूबर 2021 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने ई-समारोह के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में 1555 मीटर लंबी सेला मेन टनल (टी 2) में अंतिम विस्फोट किया। सुरंग का निर्माण महत्वपूर्ण बालीपारा-चारदुआर-तवांग रोड (बी-सी-टी) पर किया जा रहा है। एक बार पूरा होने के बाद सेला सुरंग 13000 फीट से अधिक ऊंचाई पर सबसे लंबी दो लेन की सुरंग होगी, इस साल शुरू हुई 980 मीटर लंबाई की सेला सुरंग परियोजना की दूसरी सुरंग ने भी 700 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया है। 2022 में सुरंग के पूरा होने से महत्वपूर्ण सेला दर्रे के पार सैनिकों की निर्बाध आवाजाही की सुविधा होगी और महत्वपूर्ण भारत-चीन सीमाओं तक तवांग से आगे के क्षेत्रों को सभी मौसमों में कनेक्टिविटी मिलेगी।

 

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