अपनी अभद्र टिप्पणी से विधायक दलीप रावत फिर सुर्खियों में: सुनिये वायरल ऑडियो

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रिखणीखाल, 3 जून (प्रभूपाल)। अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दियों पर तीखे और व्यक्तिगत बयानों के लिये सुर्खियों में रहने वाले लैंसडौन के विधायक महन्त दलीप सिंह रावत एक बार फिर चर्चाओं मंे आ गये हैं। इस बार उन्होंने एक सोशियल मीडिया पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता के लिये दलाल से भी आगे के अपशब्दों का प्रयोग किया है। जिस कारण उनके समर्थकों को एक बार फिर अपने नेता की बेलगाम जुबान पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। इससे पहले वह इसी तरह पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता हरक सिंह रावत पर अवांछित टिप्पणियां करते रहे हैं

कोटद्वार के निकट सिद्धबली मंदिर के महंत एवं लैंसडौन के विधायक दलीप सिंह रावत ने एक बार एक धार्मिक पुरुष होने की सीमा तोड़ते हुये रिखणीखाल के सामाजिक कार्यकर्ता, सोशियल मीडिया पत्रकार, पूर्व सैनिक और उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी प्रभुपाल सिंह रावत के लिये दलाल और साला शब्दों का प्रयोग कर डाला। प्रभुपाल का कसूर इतना ही है कि वह रिखणीखाल क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को सोशियल मीडिया के साथ ही प्रिण्ट और इलैक्ट्रानिक मीडिया पर उजागर करते रहते हैं। उनके प्रयासों से क्षेत्र की कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। उनके इस तरह क्षेत्र में सक्रिय होने से विधायक को परेशानी है,क्योंकि उन्हें ऐसी खबरे चलने से शर्मिन्दगी झेलनी पड़ती है।


अभी सोशल मीडिया में एक ऑडियो तेजी से खूब वायरल हो रहा है जिसमें विधायक लैंसडौन महन्त दिलीप सिंह रावत और जितेन्द्र सिंह रावत मूल निवासी ग्राम नावेतल्ली वर्तमान निवास रामनगर में रहते है, जो कि 02 जून,2022 का है। जिसमें विधायक ये कहते सुने जा रहे हैं कि प्रभुपाल सिंह रावत ‘‘ साला बदतमीज और दलाल है।’’
प्रभुपाल का कहना है कि मैने अभी तक कभी विधायक से न फोन किया न कभी आमने सामने मिलन हुआ। अगर मैं अपने गाँव व क्षेत्र की समस्याओं को उजागर करता हंू तो,क्या यही बदतमीजी व दलाली है। क्या कोई मांग उजागर करना अपराध की श्रेणी में आता है। विधायक ये भी कहते सुने जा रहे हैं कि आपकी सड़क चार पांच साल तक उसी की वजह से रोक रखी थी। मेरा सड़क बनाने का बिल्कुल भी इच्छा नहीं थी। प्रभुपाल का कहना है कि अगर एक मंदिर का पुजारी और समाज कर रहनुमा इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करेगा तो समाज पर इसका बुरा असर पडे़गा। प्रभुपाल का कहना है कि सिद्धबली धाम की गरिमा और लोगों की आस्था के सम्मान स्वरूप दलीप रावत को स्वयं ही महंतगिरी से विरत हो जाना चाहिये।
गौरतलब है कि महंत दलीप रावत पूर्व में हरक सिंह रावत पर भी व्यक्तिगत कटु और अवांछित टिप्पणियां करते रहे हैं। जबकि हरक सिंह रावत ने एक जिम्मेदार राजनेता के तौर कभी भी दलीप की ही भाषा में पलटवार नहीं किया।

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