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IMA के निकट प्रस्तावित ₹35 करोड़ का मॉल प्रोजेक्ट निरस्त

सेना ने जताई थी सुरक्षा पर आपत्ति

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पास प्रस्तावित करीब 35 करोड़ रुपये के एक बड़े वाणिज्यिक परिसर (मॉल) के निर्माण को सैन्य आपत्तियों के बाद निरस्त कर दिया गया है। भारतीय सेना ने इस परियोजना को रक्षा सुरक्षा दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और सैन्य प्रतिष्ठान के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

मुख्य विवाद और सेना की आपत्तियां

एक निजी बिल्डर द्वारा आईएमए के समीप भूमि पर इस मॉल के निर्माण की योजना बनाई गई थी। सेना ने जिला प्रशासन और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई। सेना के मुख्य सवाल निम्नलिखित थे:

  • नियमों का उल्लंघन: रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रक्षा भूमि के 100 मीटर के दायरे में एक मंजिला भवन से अधिक निर्माण नहीं हो सकता। साथ ही, 500 मीटर के भीतर चार मंजिला इमारतों पर भी प्रतिबंध है।

  • अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC): सेना ने प्रश्न उठाया कि आईएमए से एनओसी लिए बिना एमडीडीए ने इस परियोजना को शुरुआती अनुमति किस आधार पर दी?

  • सुरक्षा का खतरा: सैन्य अधिकारियों के अनुसार, मॉल की ऊंचाई और स्थिति से आईएमए में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय कैडेटों और विदेशी प्रशिक्षुओं की सुरक्षा और गोपनीयता प्रभावित हो सकती थी।

एमडीडीए की कार्रवाई

सेना की सक्रियता और आपत्तियों के सार्वजनिक होने के बाद, एमडीडीए ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया।

  • संबंधित कंपनी: यह आवेदन ‘शिवम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स’ द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

  • परियोजना का नाम: कंपनी पंडितवाड़ी क्षेत्र के पास ‘दून कर्व’ नाम से वाणिज्यिक परिसर विकसित करना चाहती थी।

  • अस्वीकृति का कारण: प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, आवेदक को एनओसी जमा करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में दस्तावेज न मिलने के कारण नक्शा अस्वीकार कर दिया गया।

बिल्डर का पक्ष

दूसरी ओर, निर्माणकर्ता कंपनी के प्रबंध निदेशक का दावा है कि उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया था। उनका कहना है कि उन्होंने सैन्य अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वे एमडीडीए द्वारा स्वीकृत प्रारंभिक नक्शे के आधार पर ही आगे बढ़ रहे थे।

सेना ने स्पष्ट किया है कि निजी बिल्डरों को सीधे जवाब देने के बजाय वे संबंधित प्रशासनिक विभागों के माध्यम से ही अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला संवेदनशील रक्षा क्षेत्रों के पास निर्माण नियमों की सख्ती और सैन्य-नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

विपक्षी कांग्रेस ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी के अनुसार बिना सत्ता से साँठ गाँठ के यह मामला यहाँ तक नहीं पहुँचता। अगर सेना आपत्ति नहीं करती तो सरकार ने मॉल निर्माण की खुली छुट  दे ही दी थी।

दसौनी ने एक बयान में कहा कि IMA के अधिकारियों द्वारा स्वयं राज्य प्रशासन और MDDA को लिखे गए पत्रों में स्पष्ट किया गया है कि पंडितवाड़ी क्षेत्र में IMA के बेहद नजदीक प्रस्तावित मॉल और रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। रक्षा मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, 100 से 500 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण के लिए स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (LMA) से अनुमति अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में बिना NOC के ही परियोजना को मंजूरी दे दी गई।

दसौनी के अनुसार IMA ने अपने पत्र में साफ कहा है कि यह निर्माण न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार आपत्ति जताने के बावजूद अब तक IMA को न तो कोई संतोषजनक जवाब मिला है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है।

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