खेल/मनोरंजन

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में क्षेत्रीय फिल्मों का प्रदर्शन भारत की समृद्ध विरासत का उत्सव

-uttarakhandhimalaya.in
गोवा, 23 नवंबर। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का 54वां संस्करण केवल वैश्विक सिनेमा की उत्कृष्टता का संगम नहीं है; यह हमारे देश के विभिन्न कोनों से निकलने वाली क्षेत्रीय फिल्मों की समृद्ध विविधता का उत्सव है। क्षेत्रीय सिनेमा को सम्मान देने की अपनी समृद्ध परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, 54वें आईएफएफआई  ने भारत की विभिन्न भाषाओं की फिल्मों के अलग-अलग खंडों की स्क्रीनिंग के लिए सुनियोजित तरीके से समर्पित दिन निर्धारित किए हैं।

आज से, भारतीय पैनोरमा खंड में पूर्वी भारत की मंत्रमुग्ध कर देने वाली फिल्मों की श्रृंखला के साथ क्षेत्रीय फिल्में शुरू हो गईं। बंगाली, उड़िया, असमिया, मणिपुरी और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की विभिन्न बोलियों ने आज सबसे अधिक ध्‍यान खींचा। उत्पल बोरपुजारी द्वारा निर्देशित बरुआर ज़ोंग्क्सर (असमिया फिल्म), शिल्पिका बोरदोलोई द्वारा निर्देशित मऊ: द स्पिरिट ड्रीम्स ऑफ चेरॉ (मिज़ो फिल्म), हिमांशु शेखर खटुआ द्वारा निर्देशित द सी एंड सेवन विलेजेज (उड़िया फिल्म), कौशिक गांगुली द्वारा निर्देशित अर्धांगिनी (बंगाली फिल्म) कुछ क्षेत्रीय फिल्में हैं जिन्हें आज आईएफएफआई के विभिन्न स्थानों पर दिखाया गया।

जैसे ही समारोह शुरू हुआ, निम्नलिखित कार्यक्रम के साथ देश भर में सिनेमा की एक यात्रा का वादा पूरा हुआ:

24 नवम्‍बर : उत्तर: पंजाबी, डोगरी, भोजपुरी, राजस्थानी, उर्दू, छत्तीसगढ़ी

25 नवम्‍बर : पश्चिम: कोंकणी, मराठी, गुजराती

26 नवम्‍बर : दक्षिण 2: कन्नड़ और तेलुगु

आईएफएफआई में प्रतिष्ठित निर्देशक मणिरत्नम द्वारा निर्देशित तमिल फिल्म पोन्नियिन सेलवन-2 और पुरस्कार विजेता निर्देशक जियो बेबी द्वारा निर्देशित मलयालम फिल्म कैथल-द कोर कल (23.11.2023) दिखाई जाएगी। कल्कि कृष्णमूर्ति के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित, पोन्नियिन सेलवन चोल राजवंश के राजकुमार आदित्य करिकालन और मंदिर में रहने वाली एक गरीब अनाथ लड़की नंदिनी की दुःखद प्रेम कहानी का वर्णन करती है। उनके बचपन के रोमांस को राजवंश ने तोड़ दिया था। चूंकि युवा नंदिनी को करिकालन से दूर रखने के लिए भूमि से निर्वासित कर दिया गया था, तब से राजकुमार करिकालन एक पागल आदमी बन जाता है। बाद में कहानी में, नंदिनी ने पांड्य राजा वीरपांडियन की हत्या का बदला लेने के लिए शाही युवराजों और सम्राट सुंदर चोझार के खिलाफ साजिश रची। वह चोल कोषाध्यक्ष पेरिया पझुवेट्टारयार से शादी करके चोलों में घुसपैठ करती है और एक धूर्तता से भरी योजना बनाती है। उत्तराधिकार, सत्ता संघर्ष, प्रतिशोध, प्रेम और चोल राजवंश के अस्तित्व वाली यह एक ऐतिहासिक-शाही-राजनीतिक फिल्‍म है।

अनुभवी मलयालम अभिनेता ममूटी अभिनीत कैथल-द कोर समलैंगिकों के प्रति समाज की मानसिकता की सियासत का पता लगाती है। फिल्म में मुख्य नायक जॉर्ज डेवासी एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं जो हाल ही में एक सहकारी बैंक से सेवानिवृत्त हुए हैं और अपनी पत्नी ओमाना, अपनी बेटी फेमी और जॉर्ज के पिता देवासी के साथ रहते हैं। रविवार की सुबह, चर्च के अनुष्ठानों के बाद, जॉर्ज ने आगामी पंचायत चुनाव लड़ने का फैसला किया और अपना नामांकन दिया। लेकिन हर कोई हैरान रह गया, दो दिन बाद उसकी पत्नी ओमाना ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दायर की और कहा कि जॉर्ज पिछले कुछ सालों से अपने दोस्त थैंकन के साथ समलैंगिक रिश्ते में है, जो उसी गांव में ड्राइविंग स्कूल चलाता है। कहानी परिवार के अंदर और बाहर होने वाली घटनाओं व बड़े समाज पर आधारित है।

आईएफएफआई 2023 सिनेमाई प्रतिभा के इस कैलाइडोस्‍कोप में फिल्म प्रेमियों को खुद को तल्‍लीन कर देने के लिए आमंत्रित करता है, जिसमें हमारे देश की आत्मा से जुड़े असंख्य कथानकों को शामिल किया गया है।

 

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