वैज्ञानिकों ने छोटी आकाशगंगाओं में ब्लैक होल की उपस्थिति की संभावना का पता लगाया
A new study has probed the possibility of some of the smallest galaxies in the universe, particularly dwarf spheroidal galaxies orbiting the Milky Way, hosting black holes. This can help advancing our understanding of black hole formation and galaxy evolution across cosmic time. Supermassive black holes are routinely observed at the centers of large galaxies, but the smaller ones like the dwarf spheroidal galaxies orbiting the Milky Way are extremely faint, gas-poor, and dominated by dark matter, making direct detection of black holes exceptionally challenging.

एक नए अध्ययन में ब्रह्मांड की कुछ सबसे छोटी आकाशगंगाओं, विशेष रूप से मिल्की वे की परिक्रमा करने वाली लघु गोलाकार आकाशगंगाओं में ब्लैक होल की उपस्थिति की संभावना का पता लगाया गया है। इससे ब्रह्मांडीय काल में ब्लैक होल के निर्माण और आकाशगंगाओं के विकास की हमारी समझ को आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
विशाल आकाशगंगाओं के केंद्रों में सुपरमैसिव ब्लैक होल नियमित रूप से देखे जाते हैं, लेकिन मिल्की वे की परिक्रमा करने वाली लघु गोलाकार आकाशगंगाओं जैसी छोटी आकाशगंगाएं अत्यंत धुंधली, गैस-रहित और डार्क मैटर से भरी होती हैं, जिससे ब्लैक होल का प्रत्यक्ष पता लगाना असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यह प्रश्न प्रथम ब्लैक होल के निर्माण, कम द्रव्यमान वाले वातावरण में उनके विकास और आकाशगंगाओं के तारकीय वेग प्रकीर्णन और केंद्रीय ब्लैक होल द्रव्यमान के बीच के संबंध (जो आकाशगंगा विकास का एक मूलभूत सिद्धांत है) से गहराई से जुड़ा हुआ है, और क्या यह संबंध सबसे छोटी आकाशगंगाओं पर भी लागू होता है। ब्रह्मांडीय काल में ब्लैक होल के विकास के एक एकीकृत सिद्धांत के निर्माण के लिए इस मुद्दे का समाधान अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के के. आदित्य और अरुण मंगलम ने हाल ही में मिल्की वे आकाशगंगा की परिक्रमा करने वाली लघु गोलाकार आकाशगंगाओं के सुसंगत गतिशील मॉडल बनाने में सफलता प्राप्त की है, जिनमें तीन गुरुत्वाकर्षण घटक शामिल हैं: तारे, एक डार्क मैटर हेलो और एक संभावित केंद्रीय ब्लैक होल। उच्च गुणवत्ता वाले तारकीय गतिकी डेटा का उपयोग करते हुए, उन्होंने इन आकाशगंगाओं में तारों की गति का मॉडल तैयार किया और यदि ऐसा कोई ब्लैक होल उपस्थित है तो इसका पता लगाने के लिए इस जानकारी का उपयोग किसी भी केंद्रीय ब्लैक होल के द्रव्यमान को सीमित करने के लिए किया।
शोधकर्ताओं ने तारकीय विषमता का उपयोग किया, अर्थात् वेगों के गुणधर्म त्रिज्या और स्पर्शरेखीय दिशाओं में भिन्न होते हैं। इससे वास्तविक कक्षीय संरचनाओं का अनुमान लगाना संभव हुआ और प्रेक्षणों से तारकीय घटक को सीधे निर्धारित किया जा सका, साथ ही डार्क मैटर हेलो और ब्लैक होल द्रव्यमान को संयुक्त रूप से सीमित किया जा सका। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में, उन्होंने इस प्रारूप को लघु गोलाकार आकाशगंगाओं के एक प्रतिनिधि नमूने पर लागू किया और ब्लैक होल द्रव्यमान पर ठोस सीमाएं प्राप्त कीं। महत्वपूर्ण रूप से, उन्होंने अपने नए परिणामों को ब्लैक होल मापों और दस्तावेजों से प्राप्त ऊपरी सीमाओं के साथ मिलाकर एक एकीकृत ब्लैक होल द्रव्यमान-तारकीय वेग प्रकीर्णन संबंध का निर्माण किया, जो लगभग ~10 से ~300 किमी प्रति सेकंड तक के प्रकीर्णन को कवर करता है, और ब्लैक होल द्रव्यमान में लगभग सात परिमाण के क्रम को समाहित करता है।
अरुण मंगलम ने जानकारी दी कि उन्होंने पता लगाया है कि हमारे मॉडल, आंकड़ों के साथ मिलकर, इन लघु गोलाकार आकाशगंगाओं के केंद्रीय ब्लैक होल द्रव्यमान पर मजबूत ऊपरी सीमा निर्धारित करते हैं, जो आमतौर पर दस लाख सौर द्रव्यमान से कम होती है, जबकि कई आकाशगंगाएं इससे भी बहुत कम मानों की अनुमति देती हैं। आंकड़े यह अनिवार्य नहीं करते कि विशाल ब्लैक होल उपस्थित हों, बल्कि यह पूरी तरह से मध्यम द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की उपस्थिति के अनुरूप हैं। इस कार्य में व्युत्पन्न एकीकृत ब्लैक होल द्रव्यमान-वेग प्रकीर्णन संबंध लघु गोलाकार आकाशगंगाओं को विशाल आकाशगंगाओं से सुचारू रूप से जोड़ता है और दर्शाता है कि संपूर्ण आकाशगंगा द्रव्यमान स्पेक्ट्रम में समान स्केलिंग नियम लागू होता है, हालांकि कम द्रव्यमान पर अनिश्चितताएं बढ़ जाती हैं। इसलिए यह कार्य अब तक इस संबंध का सबसे व्यापक अनुभवजन्य अंशांकन प्रदान करता है।
अरुण मंगलम ने बताया कि हमने अपनी सीमाओं की तुलना भौतिक रूप से प्रेरित ब्लैक होल वृद्धि मॉडलों से भी की। संवेग-संचालित गैस संचय पर आधारित मॉडल स्वाभाविक रूप से लघु गोलाकार आकाशगंगाओं में लगभग 1000 सौर द्रव्यमान के ब्लैक होल द्रव्यमान की भविष्यवाणी करते हैं, जबकि तारकीय अभिग्रहण प्रक्रियाएं लगभग 10,000 सौर द्रव्यमान और उससे भी अधिक तक वृद्धि की अनुमति देती हैं, यहां तक कि गैस संचय बंद होने के बाद भी, जैसा कि हमारे समूह ने पहले भविष्यवाणी की थी। दोनों तंत्र ब्लैक होल द्रव्यमान की संभावना जताते हैं जो अवलोकन की ऊपरी सीमाओं के भीतर आराम से आते हैं। इसके अलावा, उन्होंने ज्वारीय पृथक्करण परिदृश्यों का भी पता लगाया जिसमें लघु गोलाकार आकाशगंगाएं कभी विशाल प्रणालियां थीं जिन्होंने मिल्की वे के साथ अंतःक्रिया के दौरान अपने तारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया और यह एक वैकल्पिक व्याख्या भी प्रदान करता है।
उन्होंने कहा इस कार्य के सिद्धांत और भविष्य के प्रेक्षणों दोनों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। सबसे छोटी आकाशगंगाओं तक एक एकीकृत संबंध स्थापित करके, यह आकाशगंगा और ब्लैक होल के विकास के सिमुलेशन के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड प्रदान करता है। यह कार्य आगामी अगली पीढ़ी की अवलोकन सुविधाओं के संदर्भ में विशेष रूप से सामयिक है, जिसमें आईआईए द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय विशाल ऑप्टिकल दूरबीन (एनएलओटी) और अत्यंत विशाल दूरबीन (ईएलटी) शामिल हैं।
ये सुविधाएं अभूतपूर्व स्थानिक और वर्णक्रमीय रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेंगी, जिससे मंद, कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं में तारकीय गतिकी का सटीक मापन संभव हो सकेगा। इस अध्ययन में प्रस्तुत एकीकृत संबंध ऐसे आंकड़ों की व्याख्या के लिए एक मजबूत सैद्धांतिक और अवलोकनात्मक ढांचा प्रदान करता है, विशेष रूप से लघु आकाशगंगाओं के क्षेत्र में, जहां ब्लैक होल के संकेत सूक्ष्म होते हैं। इसके अलावा, यहां खोजे गए भौतिक रूप से प्रेरित विकास मॉडल, जो संवेग-संचालित गैस संचय और तारकीय अभिग्रहण से लेकर पूर्ववर्ती आकाशगंगाओं के ज्वारीय क्षरण तक हैं, स्पष्ट, परीक्षण योग्य भविष्यवाणियां प्रस्तुत करते हैं जिनकी भविष्य में एनएलओटी और ईएलटी के साथ किए जाने वाले अवलोकनों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से जांच की जा सकती है। ये सभी प्रयास मिलकर यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि क्या लघु आकाशगंगाओं में आदिम ब्लैक होल के बीज उपस्थित हैं।
पेपर का लिंक: https://iopscience.iop.org/article/10.3847/1538-4357/ae2d4f
