ब्लॉग

संविधान दिवस पर विशेष : धर्म ग्रंथों से भी बढ़ कर है हमारा संविधान


जयसिंह रावत
दुनियां का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत दुनिया के सबसे विस्तृत और लिखित संविधान पर मजबूती से टिका हुआ है। यह देश की शासन व्यवस्था का आधार और पथ प्रदर्शक होने के साथ ही दुनिया की सर्वाधिक आबादी की अभिलाषाओं और आकाक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही देश की अनूठी सांस्कृतिक विविधिताओं को भी प्रतिविम्बित करता है। इसलिये यह ग्रन्थ विश्व की सर्वाधिक आबादी की आस्था का प्रतीक होने के कारण महाग्रन्थों में भी महानतम् ग्रन्थ है।

मसौदा समिति जिसने संविधान का ढांचा बनाया

सर्वविदित है कि संविधान सभा ने हमारे संविधान को 26 नवम्बर 1949 को पारित किया था। भारत गणराज्य को यह अद्वितीय दस्तावेज देने का मुख्य श्रेय डा. भीमराव अम्बेडकर को तो जाता ही है, जिसके लिये देश उनका ऋणी रहेगा। लेकिन इस महान उपलब्धि के पीछे कई हस्तियां का योगदान है। दरअसल संविधान की मसौदा समिति में कई प्रमुख व्यक्ति शामिल थे जिन्होंने दस्तावेज को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मसौदा समिति के सबसे उल्लेखनीय विशेषज्ञों में पहला नाम डा0 अम्बेडकर का तो था ही लेकिन उनके साथ समिति में सर बेनेगल नरसिंग राऊ भी एक सदस्य थे जो कि एक सिविल सेवक और कानूनी विशेषज्ञ थे। उन्होंने कानूनी विशेषज्ञता और तकनीकी सलाह प्रदान करके मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों में कनैयालाल मानेकलाल मुंशी भी एक थे जो कि स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और शिक्षाविद् थे। उन्होंने विशेषकर मौलिक अधिकारों से संबंधित चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी प्रकार प्रसिद्ध वकील अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर ने संघवाद, अल्पसंख्यक अधिकारों और राष्ट्रपति की शक्तियों पर बहस में योगदान दिया। राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों और मौलिक अधिकारों से संबंधित चर्चाओं में एन. गोपालस्वामी अय्यंगार का एक सदस्य के रूप में योगदान उल्लेखनीय था। इन विशेषज्ञों ने, मसौदा समिति के अन्य सदस्यों के साथ, एक व्यापक दस्तावेज बनाने के लिए कानून, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और प्रशासन में अपनी विविध विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया, जिसने स्वतंत्र भारत के शासन की नींव रखी।

समय के साथ कदमताल करता संविधान

संविधान 26 नवंबर, 1949 को बनकर तैयार हुआ था, जिसे कानूनी रूप से 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी और संविधान को तैयार करने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का वक्त लगा था। संविधान के मसौदे पर 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। सभी जानते हैं कि हमारा संविधान जब लागू किया गया था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। इसमें कुल शब्दों की संख्या करीब 1,45,000 थी। फिलहाल इसमें प्रस्तावना के साथ 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 448 अनुच्छेद हैं। संविधान में अक्टूबर 2021 तक 108 संशोधन हो चुके हैं। इसका मतलब है कि हमार संविधान देशवासियों की अभिलाषाओं को पूरा करने एवं समय के साथ कदमताल करने के लिये सबसे लचीला भी है।

बेहतरीन हस्तलेखन का नमूना भी है संविधान

विश्व का इतना विस्तृत संविधान लिखित होने के साथ ही यह हाथ से लिखा हुआ है और लिखावट भी अपने आप में कलाकारी का एक अ़िद्वतीय नमूना है। संविधान की असली प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी, दो भाषाओं में लिखी गई थीं जो देहरादून स्थित सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में छपी थीं। मूल प्रति आज भी भारत की संसद में हीलियम भरे डिब्बों में सुरक्षित रखा गया है। इस प्रति को अब नये संसद भवन में प्रतिस्थापित कर दिया गया है। इतने बड़े संविधान को कलात्मक ढंग से लिखने का श्रेय प्रेम बिहारी नारायण रायजादा को जाता है।

नन्दलाल को मिला संविधान की प्रति सजाने का अवसर

भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी चित्रों से सजाने का मौका विख्यात चित्रकार नंदलाल बोस को मिला। यह मूल प्रति बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखी गई है। इसके हर पन्ने को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था। नन्दलाल बोस 1922 से 1951 तक शान्तिनिकेतन के कलाभवन के प्रधानाध्यापक रहे। नेहरू जी उनकी कला से इतने प्रभावित थे कि उन्हें भारत के भविष्य को संवारने वाले संविधान की प्रति को संवारने का अवसर दे दिया। दरअसल कानूनविदों ने भरत के शासन विधान को तय करने के लिये संविधान का मसौदा तो तैयार कर लिया था लेकिन उस संविधान में भारत की सांस्कृतिक विधिता, विकास की यात्रा और इसके गौरवमयी अतीत की छाप डालनी अभी बाकी थी। इसी लिये कला मर्मज्ञ नन्दलाल ने संविधान के 22 भागों की शुरुआत में 8 गुणा 13 इंच के चित्र बनाए। वास्तव में ये चित्र भारतीय इतिहास की विकास यात्रा हैं। जिनकी शुरुआत भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक की लाट से होती है।

भारत के अतीत का प्रतिबिम्ब भी है संविधान की प्रति में

संविधान की प्रस्तावना को सुनहरे बार्डर से घेरा गया है, जिसमें घोड़ा, शेर, हाथी और बैल के चित्र बने हैं। ये वही चित्र हैं, जो हमें सामान्यतः मोहन जोदड़ो की सभ्यता के अध्ययन में दिखाई देते हैं। भारतीय संस्कृति में शतदल कमल को भी नंदलाल ने जगह दी है। इन फूलों को समकालीन लिपि में लिखे हुए अक्षरों के घेरे में रखा गया है। अगले भाग में मोहन जोदड़ो की सील दिखाई गई है। उससे आगे वैदिक काल के प्रतीकों से शुरुआत होती है। मूल अधिकार वाले भाग की शुरुआत त्रेतायुग से की गयी है। नीति निर्देशक तत्व वाले अगले भाग में कृष्ण के गीता उपदेश की तस्वीर को उकेरा गया है। भारतीय संघ नाम के पाचवें भाग में भगवान गौतम बुद्ध की जीवन यात्रा से जुड़ा एक दृश्य है। अगले भाग में संघ और उनका राज्य क्षेत्र-1 में भगवान महावीर को समाधि की मुद्रा में दिखाया गया है। आठवें भाग में गुप्तकाल से जुड़ी एक कलाकृति को उकेरा गया है।

भारत की संास्कृतिक विविधता की छाप

दसवें भाग में गुप्तकालीन नालंदा विश्वविद्यालय की मोहर दिखाई गई है। संविधान के 11वें भाग से मध्यकालीन इतिहास की शुरुआत होती है और बारहवें भाग में नटराज की मूर्ति बनाई गई है। तेरहवें भाग में महाबलिपुरम मंदिर पर उकेरी गई कलाकृतियों को दर्शाया गया है। 14वां भाग केंद्र और राज्यों के अधीन सेवाएं। इस भाग में मुगल स्थापत्य कला को जगह दी गई है। जिसमें बादशाह अकबर और उनके दरबारी बैठे हुए हैं। मूल संविधान में 15वां भाग चुनाव है। इस भाग में गुरु गोविंद सिंह और शिवाजी को दिखाया गया है।

भारत के इतिहास का अक्श भी नजर आता है

संविधान की इस कला यात्रा के 16वें भाग से ब्रिटिश काल शुरू होता है। टीपू सुल्तान और महारानी लक्ष्मी बाई को ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेते हुए दिखाया गया है। 17वें भाग जो कि मूल संविधान में आधिकारिक भाषाओं का खंड है, में गांधी जी की दांडी यात्रा को दिखाया गया है। अगले भाग में महात्मा गांधी की नोआखली यात्रा से जुड़ा चित्र है। 19वें भाग में नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज का सैल्यूट ले रहे हैं। 20वें भाग में हिमालय के उत्तंग शिखरों को दिखाया गया है। अंतिम भाग में समुद्र का चित्र है। चित्र में एक विशालकाय पानी का जहाज है, जो हमारे गौरवशाली सामुद्रिक विस्तार और हमारी यात्राओं का प्रतीक है।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!