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टिहरी झील को वैश्विक पर्यटन गंतव्य बनाने की तैयारी, आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र का बनेगा मास्टर प्लान

 

वर्षभर पर्यटन गतिविधियों पर जोर, जलक्रीड़ा से लेकर ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन तक की बनेगी योजना


देहरादून, 24 सितम्बर। टिहरी झील और उसके आसपास के करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए समग्र मास्टर और जोनल प्लान तैयार किया जाएगा। क्षेत्र में बेतरतीब निर्माण रोकने के साथ ही वर्षभर पर्यटन गतिविधियां संचालित करने और पर्यटकों का ठहराव बढ़ाने के लिए चरणबद्ध विकास योजना बनाई जाएगी।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग की बैठक में टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने की योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए अल्पकालिक परियोजनाओं के बजाय दीर्घकालिक और सुनियोजित विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने टिहरी झील के आसपास के लगभग आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करते हुए मास्टर और जोनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें सरकारी और निजी दोनों तरह की भूमि को शामिल किया जाएगा। बेतरतीब विकास रोकने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों की प्रकृति और आवश्यकता के अनुरूप जोन निर्धारित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय स्थानीय लोगों सहित सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाए। योजना में क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। मास्टर प्लान तैयार करने में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली और भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
मुख्य सचिव ने झील क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को जोड़ते हुए प्रमुख आकर्षण केंद्र विकसित करने और इसके लिए चरणबद्ध योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियां इस तरह विकसित की जाएं कि यहां आने वाले पर्यटक कम से कम एक-दो दिन अथवा इससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहरें। जलक्रीड़ा के साथ साहसिक पर्यटन, ट्रैकिंग, प्रकृति पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को एकीकृत रूप से विकसित करने पर जोर दिया गया।
अप्रैल, मई और जून में झील का जलस्तर कम रहने की स्थिति को देखते हुए इन महीनों के लिए अलग पर्यटन गतिविधियां विकसित करने को कहा गया है। वर्षभर पर्यटन संचालन के लिए मौसम और झील के जलस्तर के अनुरूप गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने टिहरी झील के आसपास नए ट्रैकिंग मार्ग विकसित करने के साथ आसपास के गांवों को भी पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। पर्यटकों के लिए गांवों और स्थानीय संस्कृति से परिचित कराने वाले भ्रमण कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन को समझने का अवसर मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बैठक में टिहरी झील को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी है। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी बुलाने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।
बैठक में सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला और टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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