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भारत में लालों (सपूतों)की कभी कमी नहीं रही –

– गोविंद प्रसाद बहुगुणा-

आज 9 जून 1964 के दिन पंडित जवाहर’लाल’ नेहरू के बाद एक दूसरे *लाल* लाल बहादुर शास्त्री जी ने भारत के प्रधानमंत्री के पद का कार्यभार ग्रहण किया था । भले ही उनका कार्यकाल छोटा ही रहा 9 जून 1964 से – 11 जनवरी 1966 ) लेकिन उनके खाते में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां रही जैसे कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नेहरू कैबिनेट वह गृह मंत्री और रेल मंत्री रहे और प्रधानमंत्री बनने के बाद विदेश मंत्रालय का कार्यभार उन्होंने स्वयं संभाला ,उनके कार्यकाल में भारत ने एक युद्ध भी जीता ।प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने संबोधन में कहा था –
हमारे देश की एक खास विशेषता यह है कि यहां हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई पारसी और कई धर्मों को मानने वाले रहते हैं ,हमारे यहां मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा और गिरजाघर हैं लेकिन हमने इनको राजनीति में इस्तेमाल नहीं किया यही खूबी हमें पाकिस्तान से अलग किस्म का देश की पहचान देती है ,…हम दूसरों की नजर में तभी इज्जत पा सकते यदि हम खुद मजबूत हैं और अपने देश में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या को मिटा दें— मैं खुद असहज महसूस करता हूँ जब मैं दूसरों को वह सलाह देने की कोशिश करता हूँ जिसको मैं खुद अमल में नहीं ला सकता —
शास्त्री जी बहुत ही विनम्र रहे शुरू से सेवा का भाव और सरलता उनके चरित्र की विशेषता थी -पार्टी के सम्मेलनों में उन्होंने मंच हथियाने की कोशिश नहीं की बल्कि एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में सभास्थल पर दरी बिछाने का काम भी किया –उनके विषय में बहुत से संस्करण साझा करने योग्य थे लेकिन फिलहाल इतना ही -GPB

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