रूपकुंड ट्रेक पर फिर रोक, 19 पर्यटकों का परमिट निरस्त
बुग्यालों में पर्यटकों के रात्रि प्रवास की अनुमति नहीं, स्थानीय रोजगार की उम्मीदों को झटका

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/देवाल, 13 सितम्बर। विश्व प्रसिद्ध रूपकुंड ट्रेक के खुलने की उम्मीद लगाए रूपकुंड घाटी के ग्रामीणों में एक बार फिर मायूसी छाने लगी है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बुग्यालों में टेंट लगाकर आम पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर रोक अब भी कायम है। सुप्रीम कोर्ट से मिली छूट केवल श्री नंदा देवी राजजात के यात्रियों के लिए है। इसी आधार पर 11 सितम्बर को 19 साहसिक पर्यटकों को रूपकुंड जाने के लिए जारी परमिट भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त, पौड़ी और प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर की ओर से जारी पत्रों के बाद रूपकुंड ट्रेक से पर्यटन और रोजगार फिर शुरू होने की उम्मीद लगाए वांण, कुलिंग, दिदिना और लोहाजंग सहित आसपास के गांवों के लोगों को बड़ा झटका लगा है।
मामला वर्ष 2014 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। इस पर नैनीताल हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2018 को फैसला देते हुए बुग्यालों में पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी वर्ष 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों में बदलाव किया था। इसके बाद 27 जुलाई 2026 को तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ सर्वेश कुमार दुबे ने वन क्षेत्राधिकारी देवाल को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था।
इसी क्रम में 11 सितम्बर को वन क्षेत्राधिकारी, पूर्व पिंडर रेंज देवाल ने इंडिया हैक्स के 19 साहसिक पर्यटकों को रूपकुंड यात्रा के लिए परमिट जारी कर दिया। पर्यटकों का यह दल देवाल विकासखंड के अंतिम गांव वांण से रूपकुंड के लिए रवाना हुआ। लंबे समय बाद पर्यटकों का दल रूपकुंड की ओर जाता देख स्थानीय ग्रामीण उत्साहित हो गए। उन्होंने पर्यटकों का फूलमालाओं से स्वागत किया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद मामला वन विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा। वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त आकाश कुमार वर्मा ने 12 सितम्बर को डीएफओ बद्रीनाथ को पत्र भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ प्रणाली स्वेश उमरे ने वन क्षेत्राधिकारी, पूर्व पिंडर रेंज देवाल को पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट की। पत्र में कहा गया है कि बुग्यालों में टेंट लगाकर पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक अभी प्रभावी है। सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई 2026 के आदेश के तहत दी गई छूट केवल नंदा देवी राजजात में शामिल यात्रियों के लिए है। इसका लाभ सामान्य अथवा साहसिक पर्यटकों को नहीं दिया जा सकता।
डीएफओ ने इसके साथ ही 11 सितम्बर को इंडिया हैक्स के 19 पर्यटकों के लिए जारी परमिट तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निरस्त कर दिया। वन क्षेत्राधिकारी को यह भी निर्देश दिया गया है कि डीएफओ की पूर्व सहमति के बिना रूपकुंड ट्रेक के लिए कोई परमिट जारी न किया जाए।
डीएफओ के पत्र के अनुसार पूर्व पिंडर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ने परमिट बुक संख्या 77 के परमिट संख्या 2 और 3 के माध्यम से इंडिया हैक्स के 19 पर्यटकों को रूपकुंड तक जाने की अनुमति दी थी। इन दोनों परमिटों को अब निरस्त कर दिया गया है। इससे रूपकुंड की ओर गए पर्यटकों को वापस बुलाए जाने की संभावना भी बन गई है।
रोजगार की उम्मीदों पर फिर पानी
वन विभाग के ताजा आदेश का सबसे अधिक असर रूपकुंड घाटी के उन गांवों पर पड़ने की आशंका है, जिनकी आजीविका कभी इस प्रसिद्ध ट्रेक से सीधे जुड़ी रही है। वांण, कुलिंग, दिदिना और लोहाजंग सहित आसपास के गांवों के कई परिवार पर्यटकों के लिए गाइड, पोर्टर, घोड़ा-खच्चर, भोजन, आवास और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार प्राप्त करते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जुलाई के आदेश के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से प्रभावित रूपकुंड पर्यटन फिर पटरी पर लौट सकेगा। 19 सदस्यीय पर्यटक दल के रवाना होने से यह उम्मीद और मजबूत हुई थी, लेकिन वन विभाग के ताजा स्पष्टीकरण और परमिट निरस्त होने से स्थिति फिर अनिश्चित हो गई है।
रूपकुंड और होमकुंड जैसे प्रसिद्ध ट्रेक मार्गों से सीधे जुड़े गांवों के लोगों के लिए अब बड़ा सवाल यह है कि पर्यावरण संरक्षण और बुग्यालों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नियंत्रित एवं टिकाऊ पर्यटन की कोई व्यवस्था बन पाएगी या नहीं। फिलहाल वन विभाग के आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि बुग्यालों में टेंट लगाकर सामान्य पर्यटकों के रात्रि प्रवास की अनुमति नहीं है।
