बड़गाम दिवस पर प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा को दी श्रद्धांजलि
वीरपुर में 4 कुमाऊँ के पूर्व सैनिकों और जवानों ने किया शौर्य एवं बलिदान का स्मरण
देहरादून, 3 नवंबर। भारतीय सेना के प्रथम परमवीर चक्र विजेता एवं 4 कुमाऊँ के वीर सपूत मेजर सोमनाथ शर्मा के सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में मंगलवार को बड़गाम दिवस श्रद्धा और सैन्य गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 4 कुमाऊँ ‘फाइटिंग फोर्थ’ पूर्व सैनिक संगठन के सदस्यों और जवानों ने वीरपुर स्थित सैनिक संस्थान में आयोजित समारोह में शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में डिप्टी कमांडर कर्नल गौरव सिंह, शौर्य चक्र एवं सेना मेडल से सम्मानित, सहित उपस्थित सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने मेजर सोमनाथ शर्मा की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस, कुशल नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि मेजर शर्मा का बलिदान भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जो सैनिकों की अनेक पीढ़ियों को राष्ट्ररक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि 3 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में 4 कुमाऊँ की एक टुकड़ी ने संख्या में कहीं अधिक हमलावरों का अदम्य साहस के साथ मुकाबला किया था। भीषण युद्ध के दौरान उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हुए दुश्मन को आगे बढ़ने से रोके रखा। उनकी टुकड़ी के साहसिक प्रतिरोध से श्रीनगर हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना को महत्वपूर्ण समय मिला। इसी युद्ध में मेजर शर्मा मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनके असाधारण शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के प्रथम परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान आयोजित सामूहिक भोज में 4 कुमाऊँ परिवार के पूर्व सैनिकों, सेवारत जवानों और उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर पुराने सैन्य साथियों का मिलन हुआ और उन्होंने सैनिक जीवन की स्मृतियां साझा कीं। कार्यक्रम में पलटन की गौरवशाली परंपराओं, अनुशासन, एकता और आपसी भाईचारे की भावना को बनाए रखने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान केवल कुमाऊँ रेजिमेंट ही नहीं, बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। उनका जीवन कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्र के प्रति निःस्वार्थ समर्पण का अनुपम उदाहरण है। ऐसे वीर सैनिकों की स्मृतियों को जीवंत रखना और नई पीढ़ी को उनके त्याग एवं बलिदान से परिचित कराना समाज का सामूहिक दायित्व है।
समारोह के अंत में सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने अपनी पलटन के गौरवशाली आदर्शों ‘नाम, नमक, निशान’ तथा ‘पराक्रमो विजयते’ का उद्घोष किया। कालिका माता, बजरंगबली और भारत माता के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

