छूटे राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को सरल बनाने की मांग, दो अक्टूबर को धरना
देहरादून, 29 सितम्बर। उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद ने राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों को शीघ्र चिन्हित करने और मौजूदा प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है। परिषद ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो दो अक्टूबर को शहीद स्थल पर धरना देने के बाद नौ नवम्बर को मुख्यमंत्री आवास कूच किया जाएगा।
शहीद स्थल पर मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में भाग लेने वाले अनेक लोग वर्षों बाद भी सरकारी स्तर पर आंदोलनकारी के रूप में चिन्हित नहीं हो पाए हैं। अभिलेखों की कमी और जटिल मानकों के कारण वास्तविक आंदोलनकारियों को उनके अधिकार और सम्मान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
परिषद ने चिन्हीकरण की मौजूदा अवधि कम से कम दो माह बढ़ाने की मांग की, ताकि छूटे आंदोलनकारी आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन प्रस्तुत कर सकें। संगठन का सुझाव है कि पुराने समाचार पत्रों की कतरनों, तस्वीरों, संगठनात्मक अभिलेखों, जेल अथवा मुकदमों से संबंधित दस्तावेजों के साथ दो वरिष्ठ आंदोलनकारियों के सत्यापन को भी चिन्हीकरण का आधार माना जाए।
परिषद ने चिन्हीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि तैयार सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए और दावों तथा आपत्तियों की सुनवाई की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। केवल तकनीकी कमियों के आधार पर आवेदन निरस्त या लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। चिन्हित आंदोलनकारियों को प्रमाणपत्र के साथ शासन की निर्धारित योजनाओं का लाभ भी दिया जाना चाहिए।
परिषद ने घोषणा की कि दो अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और मुजफ्फरनगर कांड की बरसी के अवसर पर शहीद स्थल पर धरना दिया जाएगा तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो राज्य स्थापना दिवस नौ नवम्बर को मुख्यमंत्री आवास कूच किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में संरक्षक बालेश बबानिया, अध्यक्ष सुरेश कुमार, महिला अध्यक्ष प्रमिला रावत, सत्या पोखरियाल, अनन्त आकाश, चिन्तन सकलानी, प्रभात डण्डरियाल, सुभागा फरस्वाण, विकास रावत, रामपाल, पुष्पलता वैश्य, राजदुलारी लोधी, कल्पेश्वरी नेगी, एकादशी देवी, मीरा गुसाईं, भवानी नेगी, राजेश्वरी रावत और यशोदा रावत सहित कई आंदोलनकारी मौजूद रहे।
