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ईरान-अमेरिका संघर्ष ने बढ़ाई वैश्विक चिंता, पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध का खतरा गहराया

वाशिंगटन/तेहरान, 10 जून। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को बढ़ा दिया है। पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच हुई सैन्य कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और बलों को निशाना बनाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। दूसरी ओर ईरान ने अपने कदमों को राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़ा बताया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं।

संघर्ष का सबसे अधिक प्रभाव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई दे रहा है। विश्व के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। कई देशों ने अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास, परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद तथा क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा ने वर्तमान संकट की पृष्ठभूमि तैयार की है। इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में सक्रिय विभिन्न समूहों के कारण संघर्ष का दायरा और भी जटिल हो गया है।

संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। यूरोपीय देशों ने कूटनीतिक संवाद के माध्यम से समाधान खोजने पर जोर दिया है। चीन और रूस ने भी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता बताई है।

इस संकट का प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार, समुद्री परिवहन और वित्तीय बाजारों पर इसके दूरगामी परिणाम पड़ सकते हैं। भारत सहित ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की भी स्थिति पर पैनी नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के राजनीतिक और सैन्य निर्णय यह तय करेंगे कि स्थिति सीमित टकराव तक रहती है या व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेती है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं।

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