पांच साल से सड़क, दो साल से पानी का इंतजार; नावेतल्ली गांव की समस्याएं जस की तस
रिखणीखाल, 18 अगस्त। रिखणीखाल विकासखंड के ग्राम नावेतल्ली के ग्रामीण लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। पंचायत भवन की जर्जर हालत, पेयजल योजना के बावजूद घरों में पानी नहीं पहुंचना, अधूरी सड़क, जंगली जानवरों का आतंक और मोबाइल नेटवर्क की समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे इन समस्याओं के समाधान के लिए कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार गांव का पंचायत भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और सौंदर्यीकरण की मांग पिछले दो-तीन वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों और बैठकों के लिए भी उन्हें उचित भवन की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ग्राम नावेतल्ली निवासी प्रभुपाल सिंह रावत ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि सबसे गंभीर समस्या पेयजल की है। नावेतल्ली को थवाड़ा-चैबाड़ा पंपिंग पेयजल योजना के तहत जल जीवन मिशन से जोड़ा गया है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो वर्ष पहले गांव तक लगभग तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, 15 हजार लीटर क्षमता का जल संग्रह टैंक तथा 30-35 परिवारों के घरों तक नल और स्टैंड पोस्ट लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में घर-घर शौचालय तो बनाए गए हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण उनका उपयोग भी प्रभावित हो रहा है और कई शौचालय गंदगी से भरे पड़े हैं।
सड़क की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार द्वारी-भौन सड़क मार्ग से गांव को जोड़ने के लिए करीब ढाई किलोमीटर सड़क निर्माण का पहला चरण 25 दिसंबर 2021 को शुरू हुआ था, जो जून 2022 में पूरा किया गया। इसके बाद चार-पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद सड़क का दूसरा चरण शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बाद भी सड़क निर्माण आगे नहीं बढ़ा है, जिससे आवागमन में कठिनाई बनी हुई है।
प्रभुपाल रावत के अनुसार गांव में जंगली जानवरों का आतंक भी लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ कई बार गांव के आसपास आ चुका है और पशुपालकों के बकरों समेत अन्य मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। रात के समय जंगली जानवर घरों के नजदीक तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में गांव में पर्याप्त सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे और जंगली जानवरों के भय के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए रात में घर से बाहर निकलना बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों ने कई बार गांव में पर्याप्त सौर ऊर्जा लाइटें लगाने की मांग की है, लेकिन जरूरत के अनुरूप व्यवस्था नहीं हो सकी।
मोबाइल नेटवर्क की समस्या ने ग्रामीणों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव से दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर भारत संचार निगम लिमिटेड के नावेमल्ली और क्वीराली नाम से दो दूरसंचार टावर हैं, लेकिन इनसे अधिकांश समय अपेक्षित मोबाइल सेवा नहीं मिलती। ग्रामीणों का आरोप है कि महीने में मुश्किल से 10-15 दिन ही नेटवर्क ठीक से काम करता है और बाकी समय सेवा बाधित रहती है। इससे ग्रामीणों के रिचार्ज का पैसा भी व्यर्थ चला जाता है। आपात स्थिति में किसी से संपर्क करना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नावेतल्ली क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के कारण पहले ही अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। यातायात और संचार सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर जिला मुख्यालय पौड़ी तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों के अनुसार गांव से पौड़ी की दूरी करीब 250 किलोमीटर है। ऐसे में नियमित रूप से जनता दरबार या जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचना उनके लिए कठिन है। उनका यह भी कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
ग्राम नावेतल्ली निवासी प्रभुपाल सिंह रावत ने जिलाधिकारी से गांव की समस्याओं का स्थलीय निरीक्षण कराकर संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। ग्रामीणों ने पंचायत भवन, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था, वन्यजीवों से सुरक्षा और दूरसंचार सेवा से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किए जाने की अपेक्षा जताई है।
