उत्तराखंड में वन्य जीव हमले में जनहानि पर सहायता राशि बढ़कर 10 लाख रुपए होगी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया वन्य जीव सप्ताह का प्रारम्भ

देहरादून, 3 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून जू में वन्य जीव सप्ताह का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि प्रदेश में वन्य जीवों के हमले में होने वाली जनहानि पर अब सहायता राशि 10 लाख रुपए कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। देवी-देवताओं ने हमेशा इनके साथ सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का वाहन मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवान कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू और महादेव के कंठ पर विराजमान नागराज व नंदी—ये सभी हमारे सनातन धर्म में मानव और जीव-जगत के बीच एकात्म भाव के प्रतीक हैं। यही कारण है कि भारत में आदिकाल से वन्यजीवों का संरक्षण जीवन पद्धति का स्वाभाविक हिस्सा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि 6 राष्ट्रीय उद्यानों, 7 वन्यजीव विहारों और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के रूप में संरक्षित है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात मात्र 5.27 प्रतिशत है। यह अंतर राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हरियाली और स्वतंत्र रूप से विचरण करते वन्य जीव देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सरकार पर्यटकों की सुविधाओं के साथ-साथ वनों के प्राकृतिक स्वरूप और वन्यजीवों की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर रही है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि हर जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान कर उसे बिना प्राकृतिक स्वरूप बदले पर्यटकों के लिए विकसित किया जाए। प्रदेश में नए इको-टूरिज्म मॉडल पर भी काम चल रहा है, ताकि लोग जंगलों से जुड़ें और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई है, हालांकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। इस संघर्ष को कम करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपाय अपना रही है। वन विभाग को ड्रोन और जीपीएस जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं ताकि निगरानी और सुरक्षा और बेहतर हो सके। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वे संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदार बन सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ’’सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’’ योजना के अंतर्गत एक लाख युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, इको-टूरिज्म और वन्यजीव आधारित उद्यमों से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जिले में छात्रों के लिए इको क्लब के माध्यम से शैक्षिक यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विश्व मंच से ’’लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’’ का आह्वान किया है, जो केवल नारा नहीं बल्कि धरती मां को बचाने का एक मंत्र है। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से अपील की कि वे जंगल सफारी या धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन और वन्य जीवों को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के समन्वय से ही प्रदेश प्रगति कर सकता है।
