ब्लॉगविज्ञान प्रोद्योगिकी

वैज्ञानिकों ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में अधिक तीव्र घूर्णन की खोज की

चित्र : (ऊपर) सौर गतिशील वेधशाला का उपयोग करके अंतरिक्ष से (बाएं) और नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ का उपयोग करके जमीन से (दाएं) सूर्य का दृश्य। (नीचे बायां पैनल) सूर्य की सतह से अलग-अलग ऊंचाइयों पर सूर्य के भूमध्य रेखा की घूर्णन दर में बढ़ती प्रवृत्ति को सूर्य धब्बों की तुलना में देखा जा सकता है, जो आमतौर पर सूर्य की सतह पर देखे जाते हैं। (नीचे दायां पैनल) लाल रंग की बिंदीदार रेखा सूर्य धब्बों की संख्या में वृद्धि के साथ घूर्णन दर में संभावित कमी को दर्शाती है।

Although scientists have long studied how different parts of the Sun’s surface rotate at different speeds (called differential rotation) using optical and extreme ultraviolet (EUV) observations, it has been hard to know exactly at what height in the Sun’s atmosphere these measurements are taken. This is because EUV light depends on temperature, which makes the height of the observed features uncertain. Radio observations are different. They mainly come from stable plasma processes or thermal radiation, so they give a clearer idea of the height being measured. This makes radio data a useful independent way to check the rotation patterns seen in EUV observations. The new findings support the idea that radio observations can reliably study the movement of the Sun’s chromosphere (the layer just above the visible surface) with less uncertainty about height. The equatorial rotation rate measured in this radio study closely matches the rate seen at the 304 Å EUV wavelength. This adds weight to the view that the Sun’s equator rotates faster at higher levels above the surface. In the future, coordinated observations at wavelengths whose formation heights are better known will be important for understanding the complex motions in the solar atmosphere.

 

 

By- Jyoti Rawat

एक नए अध्ययन के अनुसार सूर्य के चारों ओर घूमने वाला वायुमंडल सूर्य की दिखाई देने वाली सतह की तुलना में बहुत अधिक तेज़ गति से घूमता है और सूर्य की सतह से ऊंचाई बढ़ने के साथ इसकी घूर्णन गति भी बढ़ती जाती है। यह खोज क्लासिकल भौतिकी की अपेक्षाओं को चुनौती देती है। सूर्य को बेहतर ढंग से समझने के अलावा ये निष्कर्ष सौर गतिविधि और अंतरिक्ष मौसम के मॉडल को परिष्कृत करने में सहायक होंगे, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार प्रणालियों, नौवहन नेटवर्क और विद्युत अवसंरचना को प्रभावित कर सकते हैं।

सदियों से हमारी संस्कृति सूर्य को सूर्य देव के रूप में पूजती आई है, जो जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है। फिर भी आधुनिक विज्ञान लगातार यह उजागर कर रहा है कि सूर्य जितना दिखता है, उससे कहीं अधिक जटिल है। पृथ्वी की तरह सूर्य का भी एक वायुमंडल है, लेकिन वैज्ञानिक लंबे समय से यह जानने के लिए उत्सुक रहे हैं कि सूर्य के घूर्णन के दौरान यह विशाल वायुमंडल कैसे व्यवहार करता है।

कल्पना कीजिए कि एक आइस स्केटर आइस रिंक पर एक ही बिंदु पर घूम रहा है। जब स्केटर अपने हाथों को अपने शरीर के करीब लाता है, तो वह तेज़ी से घूमता है, और जब वह अपने हाथों को बाहर की ओर फैलाता है, तो उसकी घूर्मन गति धीमी हो जाती है। यह व्यवहार भौतिकी के एक मूलभूत सिद्धांत कोणीय संवेग के संरक्षण के नियम का पालन करता है। पृथ्वी का वायुमंडल सामान्यता इसी नियम का पालन करता है।

हालांकि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान – आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस), उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) और अहमदनगर कॉलेज के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया कि सूर्य इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं करता है।

जापान के नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ से प्राप्त प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए टीम ने पाया कि सूर्य का वायुमंडल उसकी दृश्य सतह की तुलना में अधिक तेजी से घूमता है, जो क्लासिकल भौतिकी के नियमों को तोड़ता है।

इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि सूर्य की सतह से ऊंचाई बढ़ने पर घूर्णन गति बढ़ती जाती है और सौर गतिविधियां (जिन्हें सनस्पॉट यानी सौर धब्बों की संख्या से दर्शाया जाता है) अधिक तीव्र होती हैं, तो घूर्णन गति में थोड़ी कमी आती है। एआरआईईएस से श्रींजना राउत और वैभव पंत (अब आईआईटी दिल्ली में), यूएसओ-पीआरएल से अंशु कुमारी और अहमदनगर कॉलेज से जयदीप कांडेकर द्वारा किए गए इस शोध को ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स लेटर्स’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

चूंकि सूर्य मुख्यतः गैस से बना है और उस पर कोई ठोस भूभाग नहीं है, इसलिए यह कहना बहुत कठिन है कि क्या यह पृथ्वी की तरह ही घूमता है। इसलिए, सौर वायुमंडल के घूर्णन का पता लगाने के लिए, “2डी इमेज-कोरिलेशन विधि” नामक एक तरीके का उपयोग किया गया, जिसमें दो अलग-अलग दिनों की सौर छवियों को समान रेंज में क्रॉप किया गया और उनकी तुलना यह देखने के लिए की गई कि एक छवि दूसरी के सापेक्ष कितनी विस्थापित (शिफ्ट) हुई है। फिर उस विस्थापन का उपयोग घूर्णीय वेग की गणना करने के लिए किया गया।

प्रकाशन लिंक: https://www.aanda.org/articles/aa/abs/2025/08/aa55364-25

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!