फार्मेसी एक्सपर्ट बोले, स्वास्थ्य और समग्र शिक्षा का आधार बनेगी एआई
मुरादाबाद, 30 जुलाई। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक के फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) एवं सेंटर ऑफ आईपीआर स्टडीज के निदेशक प्रो. हरीश दुरेजा ने कहा कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य देखभाल और समग्र शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी। आधुनिक चिकित्सा एवं अनुसंधान में एआई का उपयोग ड्रग डिस्कवरी, प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स और मरीजों की व्यक्तिगत देखभाल के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में एआई की भूमिका पर आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के तत्वावधान में आयोजित वेबिनार का विषय ‘उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई): नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से एनईपी-2020 को आगे बढ़ाना’ रहा।
प्रो. दुरेजा ने कहा कि एनईपी-2020 के तहत डिजिटल परिवर्तन को अपनाकर फार्मेसी के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और नवाचार के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए तकनीकी कौशल विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की ओर से जारी फार्मेसी के नए पाठ्यक्रम और उसमें एआई के अनुप्रयोगों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन और नवाचार के माध्यम से एनईपी-2020 के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।
कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल ने कहा कि पाठ्यक्रम में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने से विद्यार्थी मौजूदा दौर की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि नया पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा।
वेबिनार में उप-प्राचार्य प्रो. मयूर पोरवाल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डॉ. आशीष सिंघई ने आभार व्यक्त किया। संचालन सुश्री उर्वशी सक्सेना ने किया।
