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देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित

The number of women MPs elected in the Lok Sabha elections were 58 in 2009, 62 in 2014, 78 in 2019, and 74 in 2024.  In 1962, the female voter turnout in Lok Sabha Elections was 46.6%, and by 2024, it significantly increased to 65.8% during the 18th Lok Sabha Elections. The number of women contesting elections has also seen a remarkable rise. In 1957, only 45 women stood as candidates in the Lok Sabha elections. During the 18th Lok Sabha elections, this number had soared to 800, demonstrating an increasing willingness and opportunity for women to participate as political candidates. Women’s representation in legislative bodies has gradually improved. In the Lok Sabha, the number of female representatives was 22 (5%) in 1951, which increased to 74 (13.6%) in 2024. Similarly, female representation in the Rajya Sabha went from 7% in 1952 to 13% in 2023. At the local level, women hold a more significant share of seats. In 2022, women comprised 44% of representatives in local self-government institutions, with a total of 1,375,914 female representatives.

 

लोकसभा और विधानसभाओं में केवल 10 प्रतिशत महिलाएं, कई क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं

 

नई दिल्ली, 8 मार्च। देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी अभी भी बेहद सीमित है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और राज्यों की वर्तमान विधानसभाओं के चुनावों में उतरे कुल 51,708 उम्मीदवारों में से केवल 5,095 यानी लगभग 10 प्रतिशत ही महिलाएं थीं।

रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्तमान में 543 सांसद और 4,123 विधायक हैं। इन 4,666 सांसदों और विधायकों में से केवल 464 यानी लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह स्थिति तब है जब देश की कुल आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है।

लोकसभा चुनाव में महिलाओं की स्थिति
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 800 यानी 9.6 प्रतिशत महिलाएं थीं। 543 लोकसभा क्षेत्रों में से 152 क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं थी। बारामती, सिकंदराबाद और वारंगल लोकसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक आठ-आठ महिला उम्मीदवार थीं, जबकि करूर और कोलकाता दक्षिण में सात-सात महिलाओं ने चुनाव लड़ा।

राजनीतिक दलों के स्तर पर देखें तो महिलाओं को टिकट देने में भाजपा सबसे आगे रही, जिसने अपने कुल उम्मीदवारों में 16 प्रतिशत महिलाओं को मौका दिया। इसके बाद कांग्रेस और माकपा ने 13-13 प्रतिशत तथा बसपा ने आठ प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया।

विधानसभा चुनावों में भी कम प्रतिनिधित्व
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के 43,348 उम्मीदवारों के विश्लेषण में पाया गया कि इनमें से केवल 4,295 यानी लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं थीं। देश के 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में से 1,698 यानी 41 प्रतिशत क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं थी।

राज्यों में ओडिशा और दिल्ली में 14-14 प्रतिशत तथा छत्तीसगढ़ में 13 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जबकि नागालैंड में केवल दो प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पांच-पांच प्रतिशत महिलाओं ने चुनाव लड़ा।

लोकसभा में 14 प्रतिशत महिला सांसद
18वीं लोकसभा में 543 सांसदों में से 74 महिलाएं हैं, जो कुल सदस्यों का लगभग 14 प्रतिशत हैं। राज्यों के हिसाब से पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक 11 महिला सांसद चुनी गईं। इसके बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से सात-सात तथा मध्य प्रदेश से छह महिला सांसद हैं।

विधानसभाओं में 9 प्रतिशत महिला विधायक
देश की विधानसभाओं में कुल 4,123 विधायकों में से 390 महिलाएं हैं, जो लगभग नौ प्रतिशत हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 47 महिला विधायक हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 40, बिहार में 29 और मध्य प्रदेश में 27 महिला विधायक हैं।

महिला जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के अनुसार 476 महिला सांसदों और विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण में पाया गया कि इनमें से 127 यानी 27 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से 68 यानी 14 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

आर्थिक स्थिति के मामले में इन 476 महिला सांसदों और विधायकों की कुल संपत्ति लगभग 8,234 करोड़ रुपये है और प्रति महिला जनप्रतिनिधि की औसत संपत्ति लगभग 17.30 करोड़ रुपये है। इनमें 14 महिलाएं अरबपति श्रेणी में आती हैं।

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में इंटर पार्लियामेंटरी यूनियन की रैंकिंग में भारत 185 देशों में 151वें स्थान पर है। ऐसे में राजनीतिक दलों को चुनावों में महिलाओं को अधिक टिकट देने और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने से भविष्य में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

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