केदारनाथ के पास स्थापित होगा बायोगैस संयंत्र, गीले कचरे के निस्तारण का मिलेगा स्थायी समाधान
देहरादून, 13 मई। चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए केदारनाथ क्षेत्र में गीले कचरे के निस्तारण के लिए एक बड़े बायोगैस संयंत्र की स्थापना की तैयारी शुरू कर दी गई है। केदारनाथ नगर पंचायत ने मंगलवार को इसकी योजना की घोषणा की। इसका उद्देश्य यात्रा सीजन में तेजी से बढ़ रहे जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में जहां लगभग 2.47 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 16.5 लाख से अधिक हो गई। वर्तमान यात्रा सत्र में भी कपाट खुलने के बाद से साढ़े चार लाख से अधिक यात्री धाम पहुंच चुके हैं। बढ़ती भीड़ के साथ कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
नगर पंचायत के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में लगभग 13.2 टन जैविक कचरा बिना उपचार के सीधे लैंडफिल में डाला गया था। वर्ष 2023 में करीब 18.5 टन जैविक तथा 14.1 टन अजैविक कचरा उत्पन्न हुआ। वर्ष 2024 में कुल 26 टन से अधिक कचरा पैदा हुआ, जिसमें लगभग 17.5 टन बिना उपचार वाला जैविक कचरा था। वर्ष 2025 में लगभग 21.4 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न हुआ, लेकिन उसका केवल 40 प्रतिशत ही संसाधित किया जा सका, जबकि शेष कचरा खुले में डंप करना पड़ा।
वर्तमान में केदारनाथ में लगभग 3,000 वर्गफुट क्षेत्र में स्थापित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सूखे कचरे के प्रबंधन का कार्य कर रही है और प्रतिदिन करीब 1.5 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। हालांकि जैविक कचरे के निस्तारण की स्थायी व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि क्षेत्र में मौजूद दोनों लैंडफिल स्थल लगभग भर चुके हैं और नए स्थानों की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बायोगैस संयंत्र गीले कचरे के दीर्घकालिक समाधान के रूप में कार्य करेगा। इसके लिए कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केदारनाथ में 600 केएलडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पिछले तीन सप्ताह से बंद पड़ा है। जबकि यात्रा शुरू होने से पहले इसके सफल संचालन का दावा किया गया था। फिलहाल सूखे कचरे को एमआरएफ में संपीड़ित कर आगे प्रसंस्करण के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान यात्रियों की संख्या कम होने पर संचित कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
बायोगैस संयंत्र शुरू होने तक केदारनाथ क्षेत्र का अधिकांश जैविक कचरा लैंडफिल स्थलों पर ही भेजा जाता रहेगा। हालांकि प्रशासन को उम्मीद है कि नई परियोजना के लागू होने के बाद धाम में स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल बन सकेगी।
