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आईटीबीपी को अब उत्तराखंड के गांवों से मिलेंगे ताज़े फल-सब्जियां

**मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में औद्यानिक परिषद और आईटीबीपी के बीच हुआ एमओयू

**सीमांत किसानों को मिलेगा स्थायी बाजार, जवानों तक पहुंचेगा स्थानीय और पौष्टिक आहार

देहरादून,1 अप्रैल । सीमांत क्षेत्रों के किसानों को मजबूत बाजार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के जवानों को ताज़े व गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत आईटीबीपी और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत उत्तराखंड में तैनात आईटीबीपी की विभिन्न वाहिनियों को स्थानीय स्तर पर ताज़े फल और सब्जियों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

किसानों और जवानोंदोनों के हित में पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस समझौते को राज्य के किसानों, स्थानीय उत्पादकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एक ओर आईटीबीपी के जवानों को पौष्टिक, ताज़ी और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य सरकार के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के संकल्प को और मजबूती देगी तथा किसानों को विपणन के लिए एक स्थायी और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समझौते के तहत चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे सीमावर्ती एवं दूरस्थ जिलों के साथ-साथ देहरादून में भी स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें बाजार तक पहुंचने में आने वाली दिक्कतों से भी राहत मिलेगी।

पहले के समझौते से मिले बेहतर परिणाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार और आईटीबीपी के बीच स्थानीय उत्पादों की खरीद को लेकर पहले भी समझौता किया जा चुका है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक आईटीबीपी राज्य से 14 करोड़ 77 लाख रुपये के स्थानीय उत्पाद खरीद चुकी है। सरकार इस खरीद को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड में तैनात आईटीबीपी अपनी वार्षिक आवश्यकता का केवल 25 प्रतिशत फल और सब्जियां भी स्थानीय किसानों से खरीदती है, तो इससे प्रदेश के किसानों को लगभग 6 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। यह व्यवस्था सीमांत क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति देगी।

सीमांत विकास और आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और सीमा पर तैनात जवानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और सीमांत क्षेत्रों में आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को भी मजबूत करेगा।

इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री , सचिव कृषि श्री एस.एन. पाण्डेय, आईजी आईटीबीपी श्री मनु महाराज, अपर सचिव श्री आनन्द श्रीवास्तव, निदेशक उद्यान श्री एस.एल. सेमवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड औद्यानिक परिषद श्री नरेन्द्र कुमार यादव तथा आईटीबीपी के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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