स्वास्थ्य

टीएमयू हॉस्पिटल की ओर से शवों के बेहतर संरक्षण को खुला माॅडर्न मोर्चुरी कोल्ड रूम

 

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के डॉक्टरों एवम् शोध स्टुडेंट्स के लिए बेहतर प्रशिक्षण और अध्ययन में साबित होगी मील का पत्थर

ख़ास बातें :

  • 4 से 7 डिग्री सेंटीग्रेड पर 20 शवों तक की संरक्षण क्षमता
  • यह सुविधा स्वास्थ्य और न्यायिक सेवाओं को बनाएगी और अधिक सशक्त
  • फोरेंसिक और मेडिको-लीगल पर हुईं रचनात्मक पोस्टर प्रतियोगिताएं, बेस्ट स्टुडेंट्स पुरस्कृत
  • मॉक क्राइम सीन में मानव पुतला, खून के धब्बे, क्राइम सीन-डू नॉट एंटर की पट्टियां, चाकू और पैरों के निशान जैसी बारीकियों को हूबहू दर्शाया
  • एचओडी प्रो. डॉ. प्रमोद डोडे ने न्याय, सत्य और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में फोरेंसिक मेडिसिन के बढ़ते महत्व को किया रेखांकित

मुरादाबाद, 3 जून। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग की ओर से शवों के संरक्षण के स्तर को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई अत्याधुनिक मोर्चुरी कोल्ड रूम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस मोर्चुरी कोल्ड रूम में 15 से 20 शवों का संरक्षण 4-7 डिग्री सेंटीग्रेड पर किया जा सकता है। कोल्ड रूम के टेम्परेचर को मैनेज करने के लिए अब आईओटी बेस्ड अलर्ट की सुविधा है। मसलन समय-समय पर तापमान से जुड़ी अपटेड प्राप्त होती रहती है। आपातकाल में इससे शवों के संरक्षण में विशेष लाभ होगा। साथ ही जिले की सरकारी मोर्चुरी पर भी दबाव कम हो जाएगा। यह सुविधा स्वास्थ्य और न्यायिक सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाएगी। मेडिकल डॉक्टरों एवम् शोध स्टुडेंट्स के लिए बेहतर प्रशिक्षण और अध्ययन में सहायक होगी। इस मौके पर मेडिकल के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह,डीन प्रो. एसके जैन, वाइस प्रिंसिपल प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के एचओडी प्रो. प्रमोद डोडे, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रो. चिंटू चौधरी आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा, टीएमयू आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विकास एवम् समाज को गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके अलावा फोरेंसिक और मेडिको-लीगल पर रचनात्मक पोस्टर प्रतियोगिता में एमबीबीएस स्टुडेंट्स ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए पुरस्कृत भी किया गया। संचालन एफएमटी विभाग की डॉ. रितुपर्णा जाना ने किया। शैक्षणिक अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. सचिन और पीजी स्टुडेंट्स ने मॉक क्राइम सीन तैयार किया। इसमें पुतले को मृत शरीर के रूप में दिखाकर, लाल रंग से खून के धब्बे, क्राइम सीन-डू नॉट एंटर की पट्टियां, चाकू और पैरों के निशान जैसी बारीकियों को हूबहू दर्शाया गया। इस व्यावहारिक गतिविधि ने छात्रों में अपराध स्थल की जांच और फोरेंसिक व्याख्या के प्रति गहनता से समझाया। सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। एचओडी प्रो. डॉ. प्रमोद डोडे ने राष्ट्रीय फोरेंसिक चिकित्सा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए न्याय, सत्य और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में फोरेंसिक मेडिसिन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। डॉ. पूजा हटवाल ने भारत में फोरेंसिक मेडिसिन के क्रमिक विकास और इतिहास से सभी को रूबरू कराया। कार्यक्रम में एफएमटी विभाग के प्रो. अभिषेक कुमार वार्ष्णेय, डॉ. आमिर शेख, डॉ. हर्ष के संग-संग पीजी स्टुडेंट्स आदि मौजूद रहे।

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