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आईएनएस तारागिरी नौसेना में शामिल, देश की समुद्री शक्ति को नई मजबूती

विशाखापत्तनम, 3 अप्रैल (पीआईबी)। भारतीय नौसेना को आज एक और बड़ी ताकत मिल गई, जब आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह ने भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीकात्मक संदेश दिया।
यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित चौथा उन्नत फ्रिगेट है, जिसे वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और Mazagon Dock Shipbuilders Limited ने देश की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों (MSMEs) के सहयोग से तैयार किया है। लगभग 6,670 टन वजनी यह जहाज आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता बेहद कम हो जाती है और यह दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बनता है।


आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी दक्षता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस जहाज में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो देश के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस
आईएनएस तारागिरी उच्च गति से लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रहने में सक्षम है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और मिसाइल प्रणालियां लगी हैं, जिनमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। यह युद्धपोत दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जवाब देने में सक्षम है।
यह फ्रिगेट बहुउद्देशीय है और उच्च तीव्रता वाले युद्ध, समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों, तटीय निगरानी तथा मानवीय सहायता जैसे विभिन्न कार्यों में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
मजबूत नौसेना की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और तीन ओर से समुद्र से घिरे होने के कारण देश का विकास समुद्री सुरक्षा से अलग नहीं देखा जा सकता। उन्होंने बताया कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, ऐसे में एक सशक्त नौसेना का निर्माण समय की आवश्यकता है।
वैश्विक समुद्री सुरक्षा में भारत की भूमिका
Indian Navy की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में 24 घंटे सक्रिय रहकर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। वैश्विक तनाव की स्थिति में नौसेना वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबल्स वैश्विक संचार की रीढ़ हैं, जिनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए अब समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर एक व्यापक और भविष्य-उन्मुख दृष्टि से देखना होगा।
रक्षा उत्पादन में नई ऊंचाई
रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात लगभग 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो एक दशक पहले के मुकाबले कई गुना अधिक है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।
नौसेना प्रमुख का बयान
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने आईएनएस तारागिरी की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जहाज 1980 में शामिल पुराने लींडर श्रेणी के फ्रिगेट की परंपरा को आगे बढ़ाता है। उन्होंने बदलते समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में नई चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश के हितों की रक्षा के लिए तैयार है।
आधुनिक युद्धपोत निर्माण में भारत की पहचान
आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत अब अत्याधुनिक युद्धपोतों के निर्माण में अग्रणी देशों की श्रेणी में पहुंच चुका है। यह जहाज न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समारोह के दौरान जहाज पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और कमीशनिंग पेनेंट फहराकर इसे औपचारिक रूप से नौसेना को समर्पित किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण ने भारत की समुद्री ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा नीति को नई ऊंचाई प्रदान की है।

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